4 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पंजाब पुलिस पर हिरासत में यातना के आरोप, कांग्रेस ने एनएचआरसी से मांगा हस्तक्षेप

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पंजाब पुलिस पर हिरासत में यातना के आरोप, कांग्रेस ने एनएचआरसी से मांगा हस्तक्षेप

सारांश

नशे के विरुद्ध आवाज़ उठाने वाले कार्यकर्ता मोहनजीत शेरों पर कथित पुलिस यातना, जबरन नशा और झूठे मामले का आरोप — यह सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि पंजाब में असहमति की आवाज़ को दबाने के गंभीर सवाल खड़े करती है। कांग्रेस ने एनएचआरसी का दरवाज़ा खटखटाया है।

मुख्य बातें

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने 4 सितंबर को एनएचआरसी को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप माँगा।
सामाजिक कार्यकर्ता मोहनजीत सिंह उर्फ मोहनजीत शेरों ने 2 सितंबर को संगरूर में मुख्यमंत्री की रैली के दौरान शांतिपूर्ण विरोध किया था।
हिरासत में बिजली के झटके, चप्पलों से मारपीट, नमक छिड़कने और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप।
सबसे गंभीर आरोप: जबरन नशीला पदार्थ देकर डोप टेस्ट कराया गया और रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर मामला दर्ज।
कांग्रेस ने सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड, कॉल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और स्वतंत्र मेडिकल परीक्षण की माँग की।
मोहनजीत सिंह को किसी भी दबाव या धमकी से सुरक्षा देने का भी आग्रह किया गया।

नशे के विरुद्ध आवाज़ उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता मोहनजीत सिंह उर्फ मोहनजीत शेरों के कथित उत्पीड़न, हिरासत में यातना और जबरन नशीला पदार्थ दिए जाने के गंभीर आरोपों को लेकर पंजाब कांग्रेस ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) का दरवाज़ा खटखटाया है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने 4 सितंबर को आयोग को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप और स्वतंत्र जाँच की माँग की है। यह मामला 2 सितंबर को संगरूर जिले के गाँव शेरों में मुख्यमंत्री की रैली के दौरान शांतिपूर्ण विरोध के बाद सामने आया।

मुख्य घटनाक्रम

2 सितंबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान की संगरूर रैली के दौरान मोहनजीत सिंह ने एक मकान की छत से काला झंडा दिखाते हुए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। उनका सवाल था कि मुख्यमंत्री के अपने गृह जिले संगरूर में नशे की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं हो पा रहा। विरोध के तुरंत बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

अस्पताल से मोहनजीत सिंह ने कथित तौर पर बताया कि हिरासत के दौरान उन्हें चप्पलों से बुरी तरह पीटा गया, सुनाम पुलिस चौकी ले जाकर बिजली के झटके दिए गए, पैरों को जबरन फैलाया गया, दाढ़ी और बाल खींचे गए तथा शरीर पर लगी चोटों पर नमक छिड़का गया। उनका यह भी आरोप है कि उन्हें शौचालय में फेंक दिया गया और यातना की पूरी प्रक्रिया वीडियो कॉल के ज़रिए किसी अन्य व्यक्ति को दिखाई गई।

जबरन नशा और डोप टेस्ट का गंभीर आरोप

सांसद वडिंग ने एनएचआरसी को भेजे पत्र में सबसे गंभीर आरोप का उल्लेख करते हुए बताया कि मोहनजीत सिंह का दावा है कि पुलिस हिरासत के दौरान उन्हें जबरन नशीला पदार्थ दिया गया, इसके बाद उनका डोप टेस्ट कराया गया और रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उनके विरुद्ध नशा सेवन का मामला दर्ज कर दिया गया। आरोप है कि डीएसपी खैरा ने उन्हें धमकी दी कि यदि उन्होंने घटना की जानकारी किसी को दी तो उन्हें घर से बाहर भी नहीं निकलने दिया जाएगा।

गौरतलब है कि यदि ये आरोप सत्यापित होते हैं, तो यह न केवल पुलिस की बर्बरता का मामला होगा, बल्कि किसी व्यक्ति को झूठे नशे के मामले में फँसाने की सुनियोजित साज़िश भी होगी — जो भारतीय दंड विधान और मानवाधिकार कानूनों के तहत अत्यंत गंभीर अपराध है।

कांग्रेस की एनएचआरसी से माँगें

सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने एनएचआरसी से निम्नलिखित कदम उठाने का आग्रह किया है:

स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जाँच; पंजाब सरकार और संबंधित पुलिस अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट; सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड, डोप टेस्ट रिपोर्ट और कॉल रिकॉर्ड सुरक्षित रखना; मोहनजीत सिंह का स्वतंत्र मेडिकल परीक्षण; तथा दोषी पाए जाने वाले पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई। साथ ही उन्होंने माँग की कि मोहनजीत सिंह को किसी भी प्रकार की धमकी या दबाव से सुरक्षा प्रदान की जाए।

वडिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, 'सत्ता कभी क्रूरता की ढाल नहीं बन सकती और दोषियों को कानून के दायरे में लाकर जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।'

व्यापक संदर्भ और सरकार पर दबाव

यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में नशे की समस्या लगातार राजनीतिक विमर्श के केंद्र में है। आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने नशामुक्ति को अपने चुनावी एजेंडे का मुख्य बिंदु बनाया था, लेकिन आलोचकों का कहना है कि ज़मीनी स्थिति अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं बदली। मोहनजीत सिंह का विरोध इसी असंतोष की अभिव्यक्ति था।

यह पहला मौका नहीं है जब पंजाब पुलिस पर हिरासत में दुर्व्यवहार के आरोप लगे हों। मानवाधिकार संगठन लंबे समय से राज्य में पुलिस जवाबदेही की माँग करते रहे हैं। एनएचआरसी का हस्तक्षेप इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएगा और पंजाब सरकार पर जवाब देने का दबाव बनेगा।

आगे क्या होगा

अब सबकी नज़रें एनएचआरसी पर हैं कि वह इस शिकायत पर संज्ञान लेता है या नहीं। यदि आयोग नोटिस जारी करता है, तो पंजाब सरकार और पुलिस को निर्धारित समय-सीमा में जवाब देना होगा। मोहनजीत सिंह के स्वतंत्र मेडिकल परीक्षण की रिपोर्ट भी इस मामले में निर्णायक साक्ष्य बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह केवल पुलिस बर्बरता नहीं बल्कि एक नागरिक को झूठे नशे के मामले में फँसाने की सुनियोजित कोशिश है — जो AAP सरकार के नशामुक्ति के दावों को सीधी चुनौती देती है। विडंबना यह है कि जिस व्यक्ति ने नशे के विरुद्ध आवाज़ उठाई, उसी पर नशे का मामला दर्ज हुआ। एनएचआरसी की भूमिका यहाँ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि निर्णायक होनी चाहिए — क्योंकि सीसीटीवी और मेडिकल साक्ष्य ही सच और झूठ के बीच की रेखा खींचेंगे। मुख्यधारा की कवरेज राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पर केंद्रित है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या पंजाब में असहमति की आवाज़ अब भी सुरक्षित है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहनजीत सिंह शेरों कौन हैं और उन्हें क्यों हिरासत में लिया गया?
मोहनजीत सिंह उर्फ मोहनजीत शेरों पंजाब के संगरूर जिले के गाँव शेरों के एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं जो नशे के विरुद्ध सक्रिय रहे हैं। 2 सितंबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान की रैली के दौरान उन्होंने छत से काला झंडा दिखाकर शांतिपूर्ण विरोध किया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
कांग्रेस ने एनएचआरसी को पत्र क्यों लिखा?
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने मोहनजीत सिंह पर हिरासत में यातना, जबरन नशा देने और झूठा मामला दर्ज करने के कथित आरोपों को लेकर एनएचआरसी से स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच की माँग की है। उनका कहना है कि मामला अत्यंत गंभीर है और राज्य सरकार पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
जबरन नशा देने का आरोप क्या है और यह इतना गंभीर क्यों है?
मोहनजीत सिंह का कथित आरोप है कि पुलिस ने हिरासत में उन्हें जबरन नशीला पदार्थ दिया, फिर डोप टेस्ट कराया और रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उनके विरुद्ध नशा सेवन का मामला दर्ज कर दिया। यदि यह सत्य है, तो यह किसी व्यक्ति को झूठे मामले में फँसाने की साज़िश होगी, जो भारतीय कानून के तहत गंभीर अपराध है।
एनएचआरसी इस मामले में क्या कर सकता है?
एनएचआरसी शिकायत का संज्ञान लेकर पंजाब सरकार और पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट तलब कर सकता है। आयोग सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड और डोप टेस्ट रिपोर्ट सुरक्षित रखने का निर्देश दे सकता है, स्वतंत्र मेडिकल परीक्षण करा सकता है और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है।
इस मामले में आगे क्या होने की संभावना है?
अब एनएचआरसी के संज्ञान लेने पर पंजाब सरकार को निर्धारित समय-सीमा में जवाब देना होगा। मोहनजीत सिंह का स्वतंत्र मेडिकल परीक्षण और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जाँच इस मामले की दिशा तय करेगी। राजनीतिक दबाव को देखते हुए यह मामला पंजाब विधानसभा में भी उठने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले