पंजाब यूनिवर्सिटी में करंट से पीएचडी स्कॉलर ज्योति की मौत, छात्रों ने मांगा ₹1 करोड़ मुआवजा और दोषियों पर कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में 28 जुलाई को बिजली का करंट लगने से 28 वर्षीय पीएचडी स्कॉलर ज्योति की दर्दनाक मौत के बाद परिसर में छात्रों का आक्रोश उबल पड़ा है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) सहित अनेक छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जाँच, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को ₹1 करोड़ मुआवजे की माँग की है।
घटनाक्रम: कैसे हुई यह त्रासदी
छात्र नेताओं के अनुसार यह हादसा साउथ कैंपस में उस समय हुआ जब परिसर में बिजली से संबंधित कार्य चल रहा था। आरोप है कि बारिश और प्रतिकूल मौसम के दौरान अनिवार्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई, जिसके परिणामस्वरूप जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) प्राप्त कर रही ज्योति करंट की चपेट में आ गईं। ज्योति न केवल अपनी पढ़ाई में अग्रणी थीं, बल्कि अपने परिवार की जिम्मेदारियाँ भी वहन कर रही थीं।
छात्रों का प्रदर्शन और माँगें
घटना के विरोध में छात्र नेताओं ने कुलपति (वीसी) कार्यालय के बाहर धरना दिया और प्रशासन से जवाबदेही सुनिश्चित करने की माँग की। प्रदर्शन में शामिल छात्र नेता हिमांगी शर्मा ने कहा कि इस दुखद घटना ने पूरे विश्वविद्यालय परिवार को हिला दिया है। उन्होंने कहा, 'ज्योति हम सभी की बहन की तरह थीं — हम केवल न्याय चाहते हैं और यह जानना चाहते हैं कि इस लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है।'
एबीवीपी ने इस घटना को 'गंभीर प्रशासनिक विफलता' करार देते हुए तीन प्रमुख माँगें रखी हैं: पीड़ित परिवार को ₹1 करोड़ का मुआवजा, जाँच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई, और जिम्मेदार अधिकारियों से इस्तीफा।
प्रशासन पर आरोप
छात्र संगठनों का आरोप है कि साउथ कैंपस में विद्युत कार्य के दौरान बुनियादी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। हिमांगी शर्मा ने कहा कि खराब मौसम में इस तरह के कार्य करवाना और सुरक्षा उपायों की अनदेखी करना सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने पूरे मामले की पारदर्शी जाँच और दोष निर्धारण की माँग की।
आगे क्या होगा
छात्र संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी माँगों पर ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक विरोध-प्रदर्शन जारी रहेगा। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के विश्वविद्यालय परिसरों में बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। छात्रों का दबाव बढ़ने के साथ यह मामला विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए गंभीर परीक्षा बन गया है।