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राफेल बेड़े के लिए ब्रिज सपोर्ट आरएफपी जारी, 18 सितंबर 2026 तक पीबीएल कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने से पहले अंतरिम व्यवस्था

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राफेल बेड़े के लिए ब्रिज सपोर्ट आरएफपी जारी, 18 सितंबर 2026 तक पीबीएल कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने से पहले अंतरिम व्यवस्था

सारांश

भारतीय वायुसेना का राफेल बेड़ा बिना किसी व्यवधान के उड़ता रहे — इसी के लिए ब्रिज सपोर्ट आरएफपी जारी हुआ है। 18 सितंबर 2026 को पीबीएल कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने से पहले यह पाँच महीनों की अंतरिम व्यवस्था है, जबकि नया दीर्घकालिक समझौता डीएसी की मंजूरी का इंतजार कर रहा है।

मुख्य बातें

भारतीय वायुसेना ने 36 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए ब्रिज सपोर्ट आरएफपी ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर जारी किया।
मौजूदा परफॉर्मेंस बेस्ड लॉजिस्टिक (पीबीएल) कॉन्ट्रैक्ट 18 सितंबर 2026 को समाप्त हो रहा है।
ब्रिज सपोर्ट पाँच महीनों के लिए है; अनुमानित उड़ान समय लगभग 2,250 घंटे ( 150 घंटे/विमान/वर्ष के मानक पर)।
प्रस्ताव फ्रांसीसी इंजन निर्माता सैफरान विमान इंजन को भेजा गया है।
नया दीर्घकालिक कॉन्ट्रैक्ट रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की मंजूरी के बाद लागू होगा।
रक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह नियमित प्रक्रिया है; राफेल की ऑपरेशनल क्षमता प्रभावित नहीं।

भारतीय वायुसेना ने अपने 36 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए एक अंतरिम ब्रिज सपोर्ट आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) जारी किया है, क्योंकि मौजूदा परफॉर्मेंस बेस्ड लॉजिस्टिक (पीबीएल) कॉन्ट्रैक्ट 18 सितंबर 2026 को समाप्त हो रहा है और नए दीर्घकालिक लॉजिस्टिक समझौते की प्रक्रिया अभी जारी है। रक्षा अधिकारियों के अनुसार यह कदम पूरी तरह नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे राफेल बेड़े की उपलब्धता या ऑपरेशनल क्षमता में किसी कमी का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।

पृष्ठभूमि: राफेल सौदे से पीबीएल तक का सफर

23 सितंबर 2016 को भारत और फ्रांस के बीच हुए समझौते के तहत डसॉल्ट एविएशन से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदे गए थे। इस मूल अनुबंध में पाँच वर्षों की पीबीएल सहायता भी शामिल थी, जिसके अंतर्गत विमानों के संचालन के लिए आवश्यक उपकरण, स्पेयर पार्ट्स, उपभोग्य सामग्री और रखरखाव सेवाएँ प्रदान की गई थीं। यह व्यवस्था प्रति विमान औसतन 150 उड़ान घंटे प्रतिवर्ष के मानक पर आधारित थी। सभी 36 राफेल विमानों की डिलीवरी निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी हो गई थी।

2021 में इस पीबीएल व्यवस्था को अगले पाँच वर्षों के लिए नवीनीकृत किया गया, जो अब 18 सितंबर 2026 को समाप्त होने वाली है। इसमें ग्राउंड सपोर्ट इक्विपमेंट (जीएसई) और ग्राउंड हैंडलिंग इक्विपमेंट (जीएचई) के रखरखाव के लिए जरूरी स्पेयर पार्ट्स भी सम्मिलित थे।

ब्रिज सपोर्ट आरएफपी: क्या है प्रस्ताव

नए दीर्घकालिक लॉजिस्टिक कॉन्ट्रैक्ट की प्रक्रिया रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की मंजूरी के अधीन है, जो अभी लंबित है। इस बीच, राफेल बेड़े के निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने के लिए पाँच महीनों की अंतरिम अवधि हेतु ब्रिज सपोर्ट का प्रस्ताव माँगा गया है। इस अवधि में 36 राफेल विमानों के लिए कुल अनुमानित उड़ान समय लगभग 2,250 घंटे है — यानी प्रति विमान 150 उड़ान घंटे प्रतिवर्ष के मानक के अनुरूप।

यह आरएफपी सरकार के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर जारी किया गया है। ब्रिज सपोर्ट का प्रस्ताव फ्रांस की इंजन निर्माता कंपनी सैफरान विमान इंजन को भेजा गया है, जो राफेल इकोसिस्टम से जुड़ी प्रमुख मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) कंपनियों में से एक है।

रक्षा अधिकारियों की स्पष्टता

रक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस आरएफपी को राफेल जेट की सेवा से बाहर होने या उनकी उपलब्धता में किसी बड़ी समस्या के संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अधिकारियों के अनुसार यह पूरी तरह एक नियमित और अंतरिम लॉजिस्टिक व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य नए दीर्घकालिक कॉन्ट्रैक्ट के लागू होने तक बेड़े का संचालन बिना किसी व्यवधान के जारी रखना है।

आगे क्या होगा

नए दीर्घकालिक पीबीएल कॉन्ट्रैक्ट की प्रक्रिया डीएसी की अनुमति के बाद आगे बढ़ेगी। ब्रिज सपोर्ट की यह अंतरिम व्यवस्था उस अंतराल को पाटने का काम करेगी, जो मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट की समाप्ति और नए समझौते के लागू होने के बीच बन सकता है। यह घटनाक्रम भारतीय वायुसेना की अपनी सबसे उन्नत लड़ाकू संपत्तियों में से एक की ऑपरेशनल तैयारी बनाए रखने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े सवाल की ओर इशारा करती है — क्या भारत के सबसे महँगे लड़ाकू विमान सौदे के लिए दीर्घकालिक रखरखाव ढाँचा पर्याप्त रूप से आगे की योजना के साथ बनाया गया था? पीबीएल का दो बार नवीनीकरण और अब ब्रिज सपोर्ट की ज़रूरत यह दर्शाती है कि रक्षा अधिग्रहण में दीर्घकालिक लॉजिस्टिक योजना अभी भी प्रतिक्रियात्मक है, सक्रिय नहीं। डीएसी की मंजूरी में देरी और इस अंतरिम व्यवस्था की आवश्यकता रक्षा खरीद प्रक्रिया की गति पर सवाल उठाती है, जो कि 36 जैसे छोटे बेड़े के लिए भी कॉन्ट्रैक्ट की निरंतरता सुनिश्चित नहीं कर पाई।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राफेल ब्रिज सपोर्ट आरएफपी क्या है?
यह भारतीय वायुसेना द्वारा अपने 36 राफेल विमानों के लिए जारी एक अंतरिम लॉजिस्टिक प्रस्ताव अनुरोध है। इसका उद्देश्य मौजूदा पीबीएल कॉन्ट्रैक्ट की समाप्ति (18 सितंबर 2026) और नए दीर्घकालिक कॉन्ट्रैक्ट के लागू होने के बीच पाँच महीनों के लिए बेड़े का निर्बाध संचालन सुनिश्चित करना है।
राफेल का मौजूदा पीबीएल कॉन्ट्रैक्ट कब खत्म हो रहा है?
मौजूदा परफॉर्मेंस बेस्ड लॉजिस्टिक (पीबीएल) कॉन्ट्रैक्ट 18 सितंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। यह 2021 में नवीनीकृत कॉन्ट्रैक्ट का अंत है, जो मूल 2016 के सौदे में शामिल पाँच वर्षीय पीबीएल के बाद आया था।
क्या इस आरएफपी का मतलब है कि राफेल विमानों में कोई समस्या है?
नहीं। रक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह आरएफपी राफेल बेड़े की उपलब्धता, ऑपरेशनल क्षमता या रखरखाव में किसी समस्या का संकेत नहीं है। यह पूरी तरह एक नियमित और अंतरिम प्रशासनिक प्रक्रिया है।
ब्रिज सपोर्ट प्रस्ताव किस कंपनी को भेजा गया है?
ब्रिज सपोर्ट का प्रस्ताव फ्रांसीसी इंजन निर्माता कंपनी सैफरान विमान इंजन को भेजा गया है, जो राफेल इकोसिस्टम की प्रमुख मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) कंपनियों में से एक है।
नया दीर्घकालिक राफेल लॉजिस्टिक कॉन्ट्रैक्ट कब लागू होगा?
नए दीर्घकालिक पीबीएल कॉन्ट्रैक्ट की प्रक्रिया रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की मंजूरी के अधीन है, जो अभी लंबित है। मंजूरी मिलने के बाद ही इस पर आगे की कार्रवाई होगी; तब तक ब्रिज सपोर्ट व्यवस्था काम करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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