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AMCA के लिए RFP जारी: कॉन्ट्रैक्ट के 30 महीने में पहला प्रोटोटाइप, 5 स्टील्थ जेट बनाने का लक्ष्य

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AMCA के लिए RFP जारी: कॉन्ट्रैक्ट के 30 महीने में पहला प्रोटोटाइप, 5 स्टील्थ जेट बनाने का लक्ष्य

सारांश

भारत के सबसे महत्वाकांक्षी रक्षा कार्यक्रम AMCA ने रफ्तार पकड़ी — RFP जारी, बिडिंग 11 जून से। कॉन्ट्रैक्ट के 30 महीने में पहला स्टील्थ प्रोटोटाइप उड़ाना होगा। टाटा, L&T-BEL और भारत फोर्ज-BEML दौड़ में। वायुसेना की 42 में से सिर्फ 29 स्क्वाड्रन — AMCA इस खाई को पाटने की कुंजी है।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्रालय ने 27 मई 2025 को AMCA के लिए RFP (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) जारी किया।
बिडिंग 11 जून से शुरू, अंतिम तिथि 27 जुलाई , बोलियाँ 28 जुलाई को खुलेंगी।
कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर के 30 महीने के भीतर पहले प्रोटोटाइप की उड़ान अनिवार्य; कुल 5 स्टील्थ प्रोटोटाइप बनाए जाएँगे।
शॉर्टलिस्टेड कंसोर्टियम: टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स , L&T-BEL , और भारत फोर्ज-BEML ।
AMCA दो इंजन वाला, 1.2–1.8 मैक गति, 10 घंटे उड़ान क्षमता और आंतरिक हथियार प्रणाली से लैस होगा।
IAF के पास अभी 42 में से केवल 29 स्क्वाड्रन ; AMCA इस कमी को दूर करने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा।

रक्षा मंत्रालय ने 27 मई 2025 को भारत के स्वदेशी पाँचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लिए औपचारिक रूप से रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी कर दिया है। RFP के अनुसार, कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर होने के 30 महीने के भीतर पहले प्रोटोटाइप की उड़ान अनिवार्य होगी, और कुल पाँच लो-ऑब्जर्वेबल (स्टील्थ) फाइटर जेट प्रोटोटाइप तैयार किए जाने हैं। यह कदम भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।

बिडिंग प्रक्रिया और समयसीमा

RFP के तहत बिडिंग प्रक्रिया 11 जून 2025 से शुरू होगी और अंतिम तिथि 27 जुलाई 2025 निर्धारित की गई है। बोलियाँ 28 जुलाई 2025 को खोली जाएँगी। एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) ने संभावित बोलीदाताओं से खरीद प्रक्रिया में भागीदारी माँगी है।

ADA द्वारा उपलब्ध कराए गए डिज़ाइन डेटा और ड्रॉइंग्स के आधार पर पाँच प्रोटोटाइप के साथ-साथ एक स्ट्रक्चरल टेस्ट स्पेसिमेन का निर्माण भी प्रस्तावित है। बोलीदाता को फ्लाइट टेस्टिंग और टाइप सर्टिफिकेशन गतिविधियों में सहयोग देना होगा।

AMCA की तकनीकी विशेषताएँ

AMCA एक पाँचवीं पीढ़ी का, मध्यम भार वर्ग का, दो इंजन वाला, बहुउद्देश्यीय स्टील्थ लड़ाकू विमान है, जिसे भारतीय वायुसेना (IAF) की परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप डिज़ाइन किया जा रहा है। यह भारत का पहला स्वदेशी दो-इंजन वाला फाइटर जेट होगा।

इस विमान की गति 1.2 से 1.8 मैक के बीच होगी और यह लगातार करीब 10 घंटे तक उड़ान भरने में सक्षम होगा। रडार से बचने की क्षमता बढ़ाने के लिए हथियारों और मिसाइलों को विमान के आंतरिक हिस्से में रखा जाएगा, जो परंपरागत फाइटर जेट्स से एक बड़ा तकनीकी अंतर है। विमान को इक्विपमेंट स्टैंडर्ड ऑफ प्रिपरेशन (ESOP) के अनुरूप कॉन्फिगर किया जाएगा और इसमें आवश्यक लाइन रिप्लेसेबल यूनिट्स (LRUs) तथा ऑनबोर्ड सिस्टम शामिल होंगे।

शॉर्टलिस्टेड कंसोर्टियम और निजी क्षेत्र की भूमिका

AMCA की शॉर्टलिस्टिंग प्रक्रिया में तीन निजी क्षेत्र-नेतृत्व वाले कंसोर्टियम सामने आए हैं — टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड, लार्सन एंड टुब्रो-भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, और भारत फोर्ज-BEML। भारतीय कानून के तहत सिंगल कंपनी, जॉइंट वेंचर या कंपनियों का कंसोर्टियम — सभी आवेदन के पात्र हैं।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष 27 मई 2024 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने AMCA कार्यक्रम के लिए निजी कंपनियों के साथ एग्जिक्यूशन मॉडल के विकास को मंजूरी दी थी। इसके मात्र 20 दिन बाद ही एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) माँगे गए थे। अब RFP जारी होने के साथ यह कार्यक्रम एक और निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है।

रणनीतिक संदर्भ: वायुसेना की ज़रूरत और वैश्विक परिदृश्य

फिलहाल भारतीय वायुसेना सुरक्षा आवश्यकताओं के लिए निर्धारित 42 फाइटर स्क्वाड्रन के मुकाबले केवल 29 स्क्वाड्रन के साथ काम कर रही है। इस कमी को पूरा करने में LCA Mk-1A, LCA Mk-2 और AMCA मिलकर अहम भूमिका निभाएँगे।

यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका, रूस और चीन के बाद चीन, पाकिस्तान को भी पाँचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान देने की तैयारी में बताया जा रहा है। तेजस फाइटर जेट कार्यक्रम से मिली तकनीकी परिपक्वता और स्वदेशी इकोसिस्टम को AMCA के विकास में एक मज़बूत आधार माना जा रहा है।

आगे क्या होगा

बिडिंग प्रक्रिया के पूरा होने के बाद कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर का मार्ग प्रशस्त होगा, जिसके बाद 30 महीने की उलटी गिनती शुरू होगी। पहली उड़ान के बाद टाइप सर्टिफिकेशन और IAF में शामिल होने की प्रक्रिया शुरू होगी। भारत का लक्ष्य है कि अगली पीढ़ी का यह स्टील्थ जेट देश की वायु शक्ति को गुणात्मक रूप से नई ऊँचाई पर ले जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा समयसीमा पर खरा उतरने की होगी — भारत के रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रमों में देरी का इतिहास लंबा है, और तेजस कार्यक्रम भी दशकों तक खिंचा था। 30 महीने की प्रोटोटाइप समयसीमा महत्वाकांक्षी है, खासकर तब जब इंजन तकनीक अभी भी विदेशी निर्भरता के दायरे में है। पाकिस्तान को चीन के पाँचवीं पीढ़ी के जेट की संभावित आपूर्ति ने रणनीतिक दबाव बढ़ाया है, जो इस कार्यक्रम को महज तकनीकी उपलब्धि से आगे एक भू-राजनीतिक ज़रूरत बनाता है। निजी क्षेत्र की भागीदारी — टाटा, L&T और भारत फोर्ज — एक सकारात्मक संरचनात्मक बदलाव है, पर इसकी सफलता तभी मानी जाएगी जब पहला प्रोटोटाइप तय समय पर हवा में उड़े।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

AMCA क्या है और यह भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) भारत का स्वदेशी पाँचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है, जिसे ADA द्वारा IAF की ज़रूरतों के लिए विकसित किया जा रहा है। यह दो इंजन वाला, कम रडार परावर्तन क्षमता वाला और बहुउद्देश्यीय विमान होगा, जो भारत को पाँचवीं पीढ़ी के जेट बनाने वाले देशों की विशिष्ट श्रेणी में शामिल करेगा।
AMCA के लिए RFP की बिडिंग प्रक्रिया कब और कैसे होगी?
बिडिंग प्रक्रिया 11 जून 2025 से शुरू होगी और 27 जुलाई 2025 अंतिम तिथि है। बोलियाँ 28 जुलाई को खोली जाएँगी। टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, L&T-BEL और भारत फोर्ज-BEML तीन शॉर्टलिस्टेड कंसोर्टियम हैं जो इस प्रक्रिया में भाग लेंगे।
AMCA का पहला प्रोटोटाइप कब तक तैयार होगा?
RFP के अनुसार, कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर होने के 30 महीने के भीतर पहले प्रोटोटाइप की उड़ान अनिवार्य है। कुल पाँच लो-ऑब्जर्वेबल प्रोटोटाइप और एक स्ट्रक्चरल टेस्ट स्पेसिमेन बनाए जाएँगे।
AMCA की प्रमुख तकनीकी विशेषताएँ क्या हैं?
AMCA 1.2 से 1.8 मैक की गति से उड़ान भरेगा और लगभग 10 घंटे तक लगातार उड़ सकेगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत आंतरिक हथियार प्रणाली है, जिससे रडार पर इसकी पहचान मुश्किल होगी। यह भारत का पहला स्वदेशी दो-इंजन वाला फाइटर जेट होगा।
भारतीय वायुसेना को AMCA की ज़रूरत क्यों है?
IAF को सुरक्षा ज़रूरतों के लिए 42 फाइटर स्क्वाड्रन चाहिए, लेकिन अभी केवल 29 स्क्वाड्रन उपलब्ध हैं। AMCA, LCA Mk-1A और LCA Mk-2 के साथ मिलकर इस कमी को दूर करने की दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है, जिसमें स्वदेशी विमानों को प्राथमिकता दी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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