वायुसेना प्रमुख एपी सिंह की फ्रांस यात्रा संपन्न, ₹3.25 लाख करोड़ की 114 राफेल डील पर बड़ी प्रगति
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने फ्रांस की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की, जिसके दौरान दोनों देशों के बीच दशकों पुरानी सामरिक और रक्षा साझेदारी को नई गति देने पर विशेष बल दिया गया। यह दौरा ऐसे अहम मोड़ पर हुआ जब भारत ने 1 जून को फ्रांसीसी सरकार को 114 राफेल लड़ाकू विमानों की लगभग ₹3.25 लाख करोड़ की सरकार-से-सरकार डील के लिए लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (एलओआर) जारी किया है।
द्विपक्षीय वार्ता और सैन्य सम्मान
फ्रांस की वायु एवं अंतरिक्ष सेना के मुख्यालय बालार्ड में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने फ्रांसीसी वायु एवं अंतरिक्ष सेना प्रमुख जनरल जेरोम बेलांजे के साथ विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता की। उनका गार्ड ऑफ ऑनर देकर औपचारिक स्वागत किया गया। दोनों पक्षों ने वायु सेनाओं के बीच परिचालन सहयोग, संयुक्त प्रशिक्षण, तकनीकी आदान-प्रदान और भविष्य की रक्षा साझेदारी को व्यापक बनाने पर चर्चा की।
यात्रा के दौरान वायुसेना प्रमुख ने फ्रांस के राष्ट्रपति के सैन्य स्टाफ प्रमुख जनरल विन्सेंट गिरो से भी मुलाकात की, जो इस दौरे के राजनयिक महत्व को रेखांकित करती है।
सैन्य शिक्षण संस्थानों में संबोधन
वायुसेना प्रमुख ने पेरिस स्थित प्रतिष्ठित सैन्य शिक्षण संस्थानों 'एकोल द गेर' और 'एकोल मिलिटेयर' में अधिकारियों को संबोधित किया। इस अवसर पर भारत से विनिमय कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे अधिकारी कैडेट भी उपस्थित रहे। यह कदम दोनों देशों के बीच सैन्य शिक्षा और मानव संसाधन आदान-प्रदान की गहरी जड़ों को दर्शाता है।
परिचालन क्षमताओं का अवलोकन
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने मोंट-दे-मार्सां एयर कॉम्बैट सेंटर का दौरा कर वहाँ की परिचालन क्षमताओं का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने ऑरलियॉं एयर बेस से ए-400एम सैन्य परिवहन विमान में परिचयात्मक उड़ान भरी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस अनुभव से दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग और पारस्परिक समझ को व्यावहारिक आधार मिलता है।
रक्षा कंपनियों से अहम बैठकें
दौरे का एक निर्णायक पहलू फ्रांस की प्रमुख रक्षा कंपनियों के साथ हुई बैठकें रहीं। वायुसेना प्रमुख ने डसॉल्ट एविएशन, थेल्स, सफ्रान और एमबीडीए के वरिष्ठ प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इन चर्चाओं में रक्षा उत्पादन, तकनीकी सहयोग, स्वदेशीकरण और 'मेक इन इंडिया' पहल को आगे बढ़ाने के अवसरों पर केंद्रित विचार-विमर्श हुआ।
114 राफेल डील: मुख्य बिंदु
प्रस्तावित सौदे के तहत 114 राफेल विमानों में से 94 का निर्माण भारत में ही किया जाएगा, जिसके लिए डसॉल्ट एविएशन किसी भारतीय साझेदार के साथ मिलकर उत्पादन करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील न केवल भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि देश में रक्षा विनिर्माण और अत्याधुनिक तकनीक के हस्तांतरण को भी नई रफ्तार देगी। आगामी हफ्तों में इस डील पर औपचारिक वार्ता और तेज होने की उम्मीद है।