रघुवर दास की हेमंत सरकार को चेतावनी: एक सप्ताह में छात्रों की मांगें मानो, नहीं तो बिरसा मुंडा समाधि पर अनशन
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 12 अगस्त 2026 को रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में आंदोलित छात्रों से मुलाकात के बाद हेमंत सोरेन सरकार को कड़ी चेतावनी दी — यदि एक सप्ताह के भीतर छात्रों की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे भगवान बिरसा मुंडा की समाधि स्थल पर अनशन पर बैठेंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को नज़रअंदाज़ करना किसी भी सरकार के लिए स्वीकार्य नहीं है।
छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि
झारखंड में रोज़गार, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रिया में सुधार को लेकर छात्रों का आंदोलन लंबे समय से जारी है। दास के अनुसार, प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर बार-बार विवाद सामने आने से युवाओं में असंतोष गहरा हुआ है। यह आंदोलन केवल किसी एक परीक्षा-संबंधी फैसले तक सीमित नहीं, बल्कि भर्ती व्यवस्था में भरोसे और पारदर्शिता की व्यापक माँग है।
रघुवर दास का सरकार को संदेश
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग की नौबत नहीं आनी चाहिए। उन्होंने सोरेन सरकार से अपील की कि स्थिति को टकराव की दिशा में ले जाने के बजाय तत्काल संवाद की पहल की जाए। उनका कहना था, 'सरकार का दायित्व युवाओं की आवाज़ सुनना है, उसे दबाना नहीं।'
अनशन की चेतावनी
दास ने स्पष्ट किया कि यदि एक सप्ताह की समयसीमा में सरकार ने ठोस पहल नहीं की, तो वे स्वयं आंदोलन में शामिल होंगे और भगवान बिरसा मुंडा की समाधि स्थल पर अनशन शुरू करेंगे। बिरसा मुंडा की समाधि को झारखंड की आदिवासी अस्मिता का प्रतीक माना जाता है — इस स्थान का चुनाव राजनीतिक दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
युवाओं पर असर और आगे की राह
गौरतलब है कि झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवाद नए नहीं हैं। आलोचकों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में बार-बार की अनियमितताओं ने राज्य के लाखों युवाओं का भरोसा तोड़ा है। दास ने सरकार से माँग की कि वह युवाओं की आशंकाओं को दूर करने के लिए भरोसेमंद और सत्यापन-योग्य कदम उठाए। अब सभी की निगाहें इस पर हैं कि हेमंत सोरेन सरकार इस राजनीतिक दबाव पर क्या प्रतिक्रिया देती है।