क्या चुनाव आयोग भाजपा का साथी बन चुका है? बिहार में वोट चोरी नहीं होने देंगे: राहुल गांधी

सारांश
Key Takeaways
- राहुल गांधी की यात्रा का मुख्य उद्देश्य वोटिंग जागरूकता बढ़ाना है।
- चुनाव आयोग की भूमिका पर उठे सवाल महत्वपूर्ण हैं।
- यात्रा 1,300 किलोमीटर का सफर तय करेगी।
- बिहार के लाखों लोग वोट चोरी की बात को सच मानते हैं।
- यह यात्रा 1 सितंबर को पटना में समाप्त होगी।
अररिया, 24 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस समय बिहार में अपनी वोटर अधिकार यात्रा पर हैं। उन्होंने रविवार को एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि वे किसी भी स्थिति में बिहार में वोटों की चोरी नहीं होने देंगे। उनका यह आरोप है कि चुनाव आयोग अब भाजपा का एक सहयोगी बन चुका है।
अररिया में आज इंडिया गठबंधन की संयुक्त प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि उनकी इस यात्रा की सफलता यह दर्शाती है कि बिहार के लाखों लोग वोट चोरी की बात को सही मानते हैं। उन्होंने कहा कि इस यात्रा में लोग स्वयं आकर जुड़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग का कार्य सही वोटर लिस्ट उपलब्ध कराना होता है, लेकिन हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक में ऐसा नहीं हुआ। चुनाव आयोग का व्यवहार बिहार में भी वोट चोरी को बढ़ावा देने वाला है।
राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि बिहार में वे वोट चोरी नहीं होने देंगे। चुनाव आयोग स्वयं अपनी छवि को नुकसान पहुँचा रहा है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के एक विधानसभा में वोटर की जानकारी के लिए उन्होंने डाटा प्रस्तुत किया था, लेकिन चुनाव आयोग ने उनसे एफिडेविट की मांग की, जबकि भाजपा के अनुराग ठाकुर से ऐसी मांग नहीं की गई। उन्होंने यह भी बताया कि मीडिया को अच्छी तरह पता है कि चुनाव आयोग किसके साथ खड़ा है।
यह ध्यान देने योग्य है कि राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा 17 अगस्त को बिहार के सासाराम से शुरू हुई थी। इस यात्रा में इंडिया ब्लॉक में शामिल राजद के नेता तेजस्वी यादव तथा अन्य घटक दलों के सभी नेता भी शामिल हैं। यह यात्रा 16 दिनों तक चलेगी और लगभग 20 जिलों से होते हुए 1,300 किलोमीटर का सफर तय करेगी। यह यात्रा 1 सितंबर को पटना में एक बड़ी रैली के साथ समाप्त होगी।