गाजियाबाद: आवासीय सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई पहल
सारांश
Key Takeaways
- गाजियाबाद ने सौर ऊर्जा को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक मॉडल प्रस्तुत किया है।
- नए भवनों के लिए सोलर रूफटॉप सिस्टम अनिवार्य किया गया है।
- बिजली की बचत और पर्यावरण संरक्षण के लिए यह पहल महत्वपूर्ण है।
- लगभग 60 हजार लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
- यह पहल प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बना सकती है।
लखनऊ, १३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार में लगातार नवाचार हो रहे हैं। इसी दिशा में, औरैया के बाद गाजियाबाद जनपद ने आवासीय सौर ऊर्जा को प्रोत्साहित करने का एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम उठाया है, जिससे यह प्रदेश का एक मॉडल बन गया है। गाजियाबाद के जिलाधिकारी ने औरैया के जिलाधिकारी के उदाहरण को देखते हुए आदेश जारी किया है। अब जनपद में नए आवासीय भवनों के नक्शा पास कराने की प्रक्रिया में सोलर रूफटॉप सिस्टम और वर्षा जल संचयन को अनिवार्य कर दिया गया है। इस पहल का उद्देश्य न केवल बिजली की बचत करना है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जल संसाधनों के सतत उपयोग को भी सुनिश्चित करना है।
इस प्रस्ताव के तहत संबंधित नगरपालिकाएं, नगर निगम और नगर पंचायतें अपने-अपने बोर्ड की बैठकों में प्रस्ताव पारित करके इस व्यवस्था को लागू कर सकती हैं। नक्शा स्वीकृति के बाद भवन निर्माण में सोलर पैनल और वर्षा जल संचयन प्रणाली का क्रियान्वयन अनिवार्य होगा। इससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा का दायरा बढ़ेगा।
योगी सरकार गाजियाबाद जनपद की इस पहल को अन्य जिलों के लिए भी अनुकरणीय मान रही है। सरकार का मानना है कि प्रदेश के सभी जनपदों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तृतीय श्रेणी शहरी एवं ग्रामीण स्थानीय निकायों के स्तर पर नीतिगत निर्णय लेकर आवासीय सौर कवरेज बढ़ाने के प्रयास करने चाहिए। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश घरेलू रूफटॉप सोलर के क्षेत्र में तेजी से अग्रसर हो रहा है। वर्तमान में प्रदेश में कुल १४४० मेगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित की जा चुकी है, जिससे ६० लाख यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन हो रहा है। यह बिजली बिना कोयला जलाए उत्पन्न की जा रही है, जिससे पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
रूफटॉप सोलर के माध्यम से आम नागरिकों को प्रतिदिन औसतन लगभग ४ करोड़ रुपए की बिजली बचत का लाभ मिल रहा है। इसके अतिरिक्त, इस पहल से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। लगभग ६० हजार लोगों को प्रत्यक्ष और लाखों लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उपलब्ध हुए हैं। साथ ही, सोलर रूफटॉप मॉडल के कारण ५००० एकड़ से अधिक भूमि का संरक्षण संभव हो सका है, जिसे अब अन्य विकास परियोजनाओं के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। यह पहल ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए मजबूती से काम कर रही है। योगी सरकार का मानना है कि औरैया का यह मॉडल प्रदेश के अन्य जनपदों में भी लागू होने से उत्तर प्रदेश स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा और हरित भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम साबित करेगा।