पीएम सूर्यघर योजना: छत्तीसगढ़ में बिजली बिल जीरो और पर्यावरण संरक्षण का जरिया
सारांश
Key Takeaways
- बिजली बिल में कमी: सोलर सिस्टम लगाने से बिजली बिल जीरो हो गया है।
- अग्रिम शुल्क की आवश्यकता नहीं: योजना के तहत कोई अग्रिम शुल्क नहीं लिया जाता।
- सरकारी सब्सिडी: एक लाख 8 हजार रुपए की सब्सिडी प्राप्त होती है।
- पर्यावरण संरक्षण: सौर ऊर्जा का उपयोग पर्यावरण के लिए फायदेमंद है।
- आसान रखरखाव: केवल सप्ताह में एक बार धूल की सफाई करनी होती है।
बालोद, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बढ़ते बिजली बिल और पर्यावरण संरक्षण की चिंता के बीच छत्तीसगढ़ में पीएम सूर्यघर बिजली योजना लोगों के लिए राहत और बचत का एक प्रभावशाली साधन बनती जा रही है। इस योजना के तहत घरों एवं संस्थानों में सोलर सिस्टम स्थापित कर उपभोक्ता न केवल बिजली बिल से मुक्ति पा रहे हैं, बल्कि अतिरिक्त बिजली भी संग्रहित कर रहे हैं। बालौद के लाभार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए इसे आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत लाभकारी बताया है।
पीएम सूर्यघर योजना के तहत सोलर सिस्टम लगवाने वाले ईश्वर साहू ने उल्लेख किया कि पहले उनके घर का बिजली बिल हर महीने लगभग एक हजार से 1200 रुपए तक आता था। जब उन्हें पीएम सूर्यघर बिजली योजना के बारे में जानकारी मिली, तो उन्होंने इसे अपनाने का निर्णय लिया। उनके घर में सोलर सिस्टम अब स्थापित हो चुका है, जिसके लिए उन्हें अपनी जेब से कोई राशि खर्च नहीं करनी पड़ी। बैंक के माध्यम से इसका पूरा भुगतान हुआ है। इस योजना के तहत उन्हें लाभ मिलने पर अग्रिम भुगतान भी नहीं करना पड़ा।
उन्होंने बताया कि सोलर सिस्टम लगने के बाद अब उनके घर का बिजली बिल लगभग शून्य हो गया है। इस सिस्टम की स्थापना के लिए उन्हें किसी भी प्रकार का अग्रिम शुल्क नहीं देना पड़ा। पूरा खर्च बैंक द्वारा वित्तपोषित किया गया है, जिसे वे किस्तों में चुका रहे हैं। इसके अलावा, उन्हें एक माह के भीतर एक लाख 8 हजार रुपए की सब्सिडी भी प्राप्त हुई है।
लाभार्थी मनीष कोठारी ने कहा कि योजना के अंतर्गत सोलर सिस्टम लगवाने के बाद उनका बिजली बिल पूरी तरह से समाप्त हो गया है और उनके खाते में लगभग एक हजार यूनिट बिजली अब भी जमा है। उन्होंने ऑनलाइन आवेदन कर वेंडर का चयन किया, जिसके बाद पूरी प्रक्रिया वेंडर द्वारा संपन्न की गई।
प्रदीप जैन ने बताया कि सौर ऊर्जा का उपयोग पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने अपने अस्पताल में इस योजना के तहत 12 किलोवाट का सोलर प्लांट स्थापित किया है, जिससे अब उनके अस्पताल का बिजली बिल जीरो हो गया है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा अपनाने से कोयला और पनबिजली जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भरता भी कम होगी और आर्थिक बचत भी होगी।
उन्होंने आगे बताया कि पिछले दो वर्षों में सिस्टम के रखरखाव की कोई विशेष आवश्यकता नहीं पड़ी। केवल सप्ताह में एक बार धूल की सफाई करनी होती है। उनके अनुसार, जिन लोगों की बिजली खपत अधिक है, उन्हें इस योजना का लाभ अवश्य उठाना चाहिए।