20 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

रायचूर के किल्ले बृहन्मठ में 21वीं सद्भावना पदयात्रा, पेटा इंडिया के रोबोटिक हाथी ने मोहा मन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रायचूर के किल्ले बृहन्मठ में 21वीं सद्भावना पदयात्रा, पेटा इंडिया के रोबोटिक हाथी ने मोहा मन

सारांश

रायचूर के किल्ले बृहन्मठ की 21वीं सद्भावना पदयात्रा इस बार सिर्फ श्रद्धा का आयोजन नहीं थी — यह परंपरा और करुणा का संगम था। पेटा इंडिया के दान किए 3 मीटर ऊँचे, 500 किलो के रोबोटिक हाथी ने जीवित हाथी की जगह ली और पशु कल्याण की नई मिसाल पेश की।

मुख्य बातें

रायचूर के किल्ले बृहन्मठ में 20 सितंबर 2026 को 21वीं सद्भावना पदयात्रा का आयोजन हुआ।
पेटा इंडिया और सीयूपीए ने मठ को रोबोटिक हाथी दान किया, जो जीवित हाथी की परंपरागत भूमिका निभाता है।
रोबोटिक हाथी 3 मीटर ऊँचा , 500 किलोग्राम वजनी है और पाँच मोटरों से संचालित होता है।
मठाध्यक्ष शांतमल्ला शिवाचार्य महास्वामीजी ने इसे परंपरा और दया के संयोजन का प्रतीक बताया।
यह पहल धार्मिक आयोजनों में पशु क्रूरता रोकने और जागरूकता फैलाने की दिशा में एक अनुकरणीय कदम मानी जा रही है।

कर्नाटक के रायचूर स्थित ऐतिहासिक किल्ले बृहन्मठ में 20 सितंबर 2026 को स्वर्गीय श्री गुरुपाद शिवाचार्य स्वामीजी की स्मृति में 21वीं सद्भावना पदयात्रा का आयोजन हुआ। इस बार आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता रही पेटा इंडिया द्वारा दान में दिया गया रोबोटिक हाथी, जिसने जीवित हाथी की परंपरागत भूमिका को आधुनिक और मानवीय तरीके से निभाया।

पदयात्रा का महत्व और परंपरा

किल्ले बृहन्मठ में हर वर्ष आयोजित होने वाली यह सद्भावना पदयात्रा स्वर्गीय श्री गुरुपाद शिवाचार्य स्वामीजी को श्रद्धांजलि के रूप में निकाली जाती है। इस वर्ष आयोजन अपने 21वें संस्करण में पहुँचा, जिसमें हजारों श्रद्धालु सम्मिलित हुए। गौरतलब है कि इस प्रकार के धार्मिक जुलूसों में पारंपरिक रूप से जीवित हाथियों का उपयोग होता रहा है।

रोबोटिक हाथी क्यों बना आकर्षण का केंद्र

'पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया' (पेटा इंडिया) और सीयूपीए ने संयुक्त रूप से मठ को यह रोबोटिक हाथी दान में दिया। धार्मिक आयोजनों में हजारों की भीड़ और तेज संगीत के बीच जीवित हाथी भय और बेचैनी का अनुभव करते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का जोखिम बना रहता है। इस रोबोटिक विकल्प का उद्देश्य पशुओं के प्रति क्रूरता को रोकना और समाज में जागरूकता फैलाना है।

यह रोबोटिक हाथी 3 मीटर ऊँचा और 500 किलोग्राम वजनी है। इसे रबर, फाइबर, धातु, जाल, फोम और स्टील से निर्मित किया गया है और यह पाँच मोटरों से संचालित होता है। इसे इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि यह दिखने और महसूस होने में असली हाथी जैसा लगे।

मठाधीश का संदेश

मठ के अध्यक्ष श्री 108 साविर देवरा शांतमल्ला शिवाचार्य महास्वामीजी ने कहा, 'हमारे लिए यह मंदिर में केवल एक नई चीज़ का जुड़ना नहीं है। यह हमारी परंपराओं को ऐसे तरीके से मनाने की दिशा में एक कदम है जो दया और बदलते समय को दर्शाता है।' उन्होंने आगे कहा कि यह रोबोटिक हाथी भक्तों को समारोहों की सुंदरता और गरिमा से जोड़ता है, साथ ही यह भरोसा भी दिलाता है कि किसी असली हाथी को परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। उन्होंने पेटा इंडिया और सीयूपीए का आभार व्यक्त किया।

पशु कल्याण की दिशा में बड़ा कदम

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में धार्मिक आयोजनों में पशुओं के उपयोग को लेकर बहस तेज हो रही है। पशु अधिकार संगठनों का लंबे समय से कहना रहा है कि जुलूसों और मेलों में हाथियों को भीड़, शोर और गर्मी में झोंकना उनके लिए अत्यंत कष्टदायक होता है। किल्ले बृहन्मठ का यह निर्णय उन मठों और मंदिरों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करता है जो परंपरा और पशु कल्याण के बीच संतुलन खोज रहे हैं।

आगे की राह

मठ प्रशासन के अनुसार, रोबोटिक हाथी को अब भविष्य के सभी धार्मिक आयोजनों में नियमित रूप से शामिल किया जाएगा। यह पहल अन्य धार्मिक संस्थाओं को भी प्रेरित कर सकती है कि वे अपने आयोजनों में तकनीक और करुणा का सम्मिश्रण करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि धार्मिक संस्थाओं की बदलती सोच का प्रमाण है। यह उस व्यापक प्रश्न को उठाता है जिसे अब तक मुख्यधारा की कवरेज टालती रही है — क्या भारत के सैकड़ों मंदिर और मठ जो अभी भी हाथियों को 'देवदूत' मानकर उनका उपयोग करते हैं, वे इस उदाहरण से सीखेंगे? पशु अधिकार कानून तो हैं, पर क्रियान्वयन की कमी बनी रहती है। यदि धार्मिक संस्थाएँ स्वेच्छा से यह परिवर्तन अपनाएँ, तो यह किसी सरकारी आदेश से अधिक प्रभावशाली साबित हो सकता है।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किल्ले बृहन्मठ की सद्भावना पदयात्रा में रोबोटिक हाथी का उपयोग क्यों किया गया?
धार्मिक जुलूसों में भीड़ और तेज संगीत के बीच जीवित हाथियों को भय और तनाव होता है, जिससे दुर्घटनाएँ हो सकती हैं। पशु क्रूरता रोकने और जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से पेटा इंडिया और सीयूपीए ने मठ को यह रोबोटिक हाथी दान किया।
रोबोटिक हाथी को किसने दान किया और यह कैसे बना है?
'पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया' (पेटा इंडिया) और सीयूपीए ने यह रोबोटिक हाथी किल्ले बृहन्मठ को दान किया। यह 3 मीटर ऊँचा, 500 किलोग्राम वजनी है और रबर, फाइबर, धातु, फोम तथा स्टील से बना है, जो पाँच मोटरों से संचालित होता है।
21वीं सद्भावना पदयात्रा किसकी याद में निकाली जाती है?
यह पदयात्रा रायचूर के किल्ले बृहन्मठ के स्वर्गीय श्री गुरुपाद शिवाचार्य स्वामीजी की स्मृति में प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है। इस वर्ष 20 सितंबर 2026 को इसका 21वाँ संस्करण हुआ।
क्या भविष्य में भी इस रोबोटिक हाथी का उपयोग होगा?
मठ प्रशासन के अनुसार इस रोबोटिक हाथी को भविष्य के सभी धार्मिक आयोजनों में नियमित रूप से शामिल किया जाएगा। मठाध्यक्ष ने इसे परंपरा और करुणा के सम्मिश्रण का प्रतीक बताया है।
रोबोटिक हाथी के उपयोग से पशु कल्याण को कैसे बढ़ावा मिलता है?
रोबोटिक हाथी के उपयोग से किसी जीवित हाथी को भीड़ और शोर में लाने की आवश्यकता नहीं रहती, जिससे पशु उत्पीड़न की संभावना समाप्त होती है। यह अन्य धार्मिक संस्थाओं के लिए भी एक मॉडल बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले