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श्रावणी मेला 2025: मुंगेर में 51 फीट की कांवड़ और 250 किलो की भोलेनाथ प्रतिमा बनी आकर्षण का केंद्र

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श्रावणी मेला 2025: मुंगेर में 51 फीट की कांवड़ और 250 किलो की भोलेनाथ प्रतिमा बनी आकर्षण का केंद्र

सारांश

श्रावणी मेले में इस बार आस्था ने नया आयाम छुआ है। कोलकाता से आई टोलियाँ 250 किलो और 110 किलो की भोलेनाथ प्रतिमाएँ कंधों पर उठाए बाबाधाम की ओर बढ़ रही हैं, तो कटनी की 250 सदस्यीय टोली 25 साल की परंपरा को 51 फीट की कांवड़ से सम्मानित कर रही है।

मुख्य बातें

कोलकाता से आई 40 श्रद्धालुओं की टोली 250 किलोग्राम वजनी बाबा भूतनाथ की प्रतिमा रूपी कांवड़ लेकर बाबाधाम की ओर अग्रसर है।
कोलकाता की ही 60 सदस्यीय एक अन्य टोली 110 किलोग्राम वजनी भोलेनाथ की प्रतिमा-कांवड़ लेकर यात्रा कर रही है, जिसे बनाने में दो महीने लगे।
कटनी, मध्य प्रदेश की शिवशक्ति कांवड़िया संघ की 250 सदस्यीय टोली 51 फीट लंबी, 12 ज्योतिर्लिंगों से सजी कांवड़ लेकर चल रही है।
संघ की यह 25वीं वार्षिक यात्रा है; इस कांवड़ को तैयार करने में एक महीने का समय लगा।
सभी कांवड़ें सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक के लक्ष्य से निकली हैं।

मुंगेर के कच्ची कांवड़िया पथ पर इस वर्ष के श्रावणी मेले में आस्था के अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिल रहे हैं — 51 फीट लंबी कांवड़ से लेकर 250 किलोग्राम वजनी भोलेनाथ की प्रतिमा तक, देशभर से आए शिवभक्त अपनी भक्ति को नए और अनोखे रूप में अभिव्यक्त कर रहे हैं। बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ती इन विशाल कांवड़ों ने मेले की भव्यता को कई गुना बढ़ा दिया है।

मुख्य आकर्षण: तीन विशाल कांवड़ें

कोलकाता, पश्चिम बंगाल से आए करीब 40 श्रद्धालुओं की एक टोली 250 किलोग्राम वजनी बाबा भूतनाथ की प्रतिमा रूपी भव्य कांवड़ लेकर बाबाधाम की ओर अग्रसर है। महादेव के स्वरूप में सजाई गई इस कांवड़ में आकर्षक सजावट और धार्मिक प्रतीकों का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। अत्यधिक भार के कारण टोली के सदस्य बारी-बारी से इसे कंधों पर उठाकर यात्रा पूरी कर रहे हैं।

इसी शहर से आए करीब 60 शिवभक्तों की एक अन्य टोली 110 किलोग्राम वजनी बाबा भोलेनाथ की विशाल प्रतिमा को कांवड़ का रूप देकर सुल्तानगंज से बाबाधाम की यात्रा कर रही है। प्लास्टर ऑफ पेरिस, फोम, कपड़े और आकर्षक सजावटी सामग्री से तैयार इस कांवड़ को बनाने में करीब दो महीने का समय लगा। इसे एक साथ चार कांवड़िया अपने कंधों पर उठाकर चलते हैं।

25 वर्षों की परंपरा और 51 फीट की कांवड़

मध्य प्रदेश के कटनी से आई शिवशक्ति कांवड़िया संघ की करीब 250 सदस्यीय टोली अपनी 51 फीट लंबी विशाल कांवड़ के साथ लोगों का ध्यान खींच रही है। इस कांवड़ पर 12 ज्योतिर्लिंगों की आकर्षक प्रतिकृतियाँ सजाई गई हैं। संघ के सदस्यों के अनुसार, वे पिछले 25 वर्षों से लगातार बाबा बैद्यनाथ के दरबार में जलाभिषेक करने पहुँच रहे हैं। इस वर्ष यात्रा के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में उन्होंने इसे विशेष बनाने के लिए यह भव्य कांवड़ तैयार की, जिसे बनाने में करीब एक महीने का समय लगा।

श्रद्धालुओं पर असर और मेले का माहौल

कच्ची कांवड़िया पथ पर जहाँ भी ये टोलियाँ पहुँचती हैं, स्थानीय लोग और अन्य श्रद्धालु रुककर इन कांवड़ों को निहारते हैं और तस्वीरें लेते हैं। रास्तेभर 'बोल बम' और 'हर हर महादेव' के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय बना हुआ है। कांवड़ियों का कहना है कि उनके लिए यह यात्रा केवल सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करने की परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, संकल्प और समर्पण का जीवंत प्रतीक है।

आस्था के आगे वजन और दूरी बेमानी

गौरतलब है कि यह मेला हर वर्ष सावन माह में लाखों श्रद्धालुओं को एकत्र करता है, किंतु इस बार की कांवड़ें अपने आकार और शिल्पकारी में विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। भक्तों का कहना है कि बाबा भोलेनाथ के प्रति श्रद्धा के आगे कांवड़ का वजन और लंबा रास्ता भी छोटा पड़ जाता है। 250 किलो की कांवड़ हो, 110 किलो की भोलेनाथ की प्रतिमा हो या 51 फीट लंबी ज्योतिर्लिंगों से सजी कांवड़ — इन सभी के पीछे एक ही संकल्प है: बाबाधाम पहुँचकर गंगाजल अर्पित करना। श्रावणी मेले का यह दृश्य एक बार फिर यह सिद्ध करता है कि आस्था के मार्ग पर कठिनाइयाँ भक्तों का उत्साह नहीं तोड़ सकतीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

महीनों की तैयारी और अंतर-राज्यीय सांस्कृतिक एकता का भी प्रमाण हैं। कोलकाता से कटनी तक, विभिन्न राज्यों के भक्तों का बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर यह अभियान दर्शाता है कि धार्मिक पर्यटन और आस्था-आधारित यात्राएँ भारत के सामाजिक ताने-बाने को किस गहराई से जोड़ती हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इन यात्राओं को केवल संख्याओं में मापती है, जबकि असली कहानी उस सामूहिक संकल्प में है जो 250 किलो का बोझ उठाकर सैकड़ों किलोमीटर चलने की प्रेरणा देती है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रावणी मेला 2025 में मुंगेर की सबसे बड़ी कांवड़ कौन-सी है?
मध्य प्रदेश के कटनी से आई शिवशक्ति कांवड़िया संघ की 51 फीट लंबी कांवड़ इस वर्ष सबसे बड़ी है, जिस पर 12 ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियाँ सजाई गई हैं। इसे 250 सदस्यीय टोली बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर लेकर जा रही है।
कोलकाता से आई टोली की 250 किलो की कांवड़ कैसे बनाई गई?
यह कांवड़ प्लास्टर ऑफ पेरिस, फोम, कपड़े और सजावटी सामग्री से तैयार की गई है और इसे बनाने में करीब दो महीने का समय लगा। इसे एक साथ चार कांवड़िया कंधों पर उठाकर चलते हैं और टोली के सदस्य बारी-बारी से यह भार वहन करते हैं।
शिवशक्ति कांवड़िया संघ ने इस वर्ष 51 फीट की कांवड़ क्यों बनाई?
संघ की इस वर्ष बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा के 25 साल पूरे हो रहे हैं। इस रजत जयंती को विशेष बनाने के लिए संघ ने 51 फीट लंबी कांवड़ तैयार की, जिसे बनाने में करीब एक महीने का समय लगा।
कांवड़ियों की यात्रा का मार्ग क्या है?
कांवड़िया सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर) की ओर पैदल यात्रा करते हैं। मुंगेर का कच्ची कांवड़िया पथ इस यात्रा का प्रमुख मार्ग है।
श्रावणी मेला कब और कहाँ आयोजित होता है?
श्रावणी मेला प्रत्येक वर्ष सावन माह में बिहार के देवघर (बाबा बैद्यनाथ धाम) में आयोजित होता है। यह विश्व प्रसिद्ध धार्मिक आयोजन है जिसमें देशभर से लाखों शिवभक्त सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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