राज्यपाल रविंद्र नारायण रवि ने कालीघाट मंदिर में की पूजा-अर्चना, बंगाल की समृद्धि की कामना
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रविंद्र नारायण रवि ने मंगलवार, 5 मई 2026 को अपनी पत्नी लक्ष्मी रवि के साथ कोलकाता के प्रसिद्ध कालीघाट काली मंदिर में मां काली की पूजा-अर्चना की। इस धार्मिक यात्रा के दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल के लोगों के कल्याण, प्रगति और समृद्धि की कामना की।
दौरे की जानकारी कैसे सामने आई
लोक भवन, पश्चिम बंगाल के आधिकारिक 'एक्स' हैंडल पर राज्यपाल के इस धार्मिक कार्यक्रम की जानकारी साझा की गई। पोस्ट में इस यात्रा को विशेष धार्मिक महत्व का बताया गया। राज्यपाल ने मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली की प्रार्थना की।
कालीघाट मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
कालीघाट काली मंदिर पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि समूचे भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यह मंदिर 51 पवित्र शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि यहाँ देवी सती के दाहिने पैर का अंगूठा गिरा था, जिस कारण यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है। प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए पहुँचते हैं।
गौरतलब है कि ऐसा माना जाता है कि 'कोलकाता' नाम की उत्पत्ति भी 'कालीघाट' से ही हुई है। यह मंदिर पूर्वी भारत में तांत्रिक साधना का एक प्रमुख केंद्र रहा है और इसने बंगाल की कला, साहित्य तथा पारंपरिक 'पटचित्र' (स्क्रॉल पेंटिंग) को सदियों से प्रेरित किया है।
राज्यपाल रवि का परिचय और पृष्ठभूमि
राज्यपाल रविंद्र नारायण रवि ने 12 मार्च 2026 को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का पद संभाला था। वे 1976 बैच के सेवानिवृत्त भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं और खुफिया क्षेत्र में दीर्घकालीन अनुभव रखते हैं।
राज्यपाल बनने से पूर्व वे तमिलनाडु और नागालैंड के राज्यपाल रह चुके हैं। नागालैंड में उन्होंने अगस्त 2019 से सितंबर 2021 तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई, विशेष रूप से नागा शांति प्रक्रिया के दौरान। इसके अतिरिक्त, दिसंबर 2019 से जनवरी 2020 तक वे मेघालय के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल चुके हैं।
आम जनता और श्रद्धालुओं पर असर
राज्यपाल की इस धार्मिक यात्रा को स्थानीय श्रद्धालुओं और मंदिर प्रबंधन ने सकारात्मक दृष्टि से देखा है। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम बंगाल में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। राज्यपाल की उपस्थिति ने कालीघाट मंदिर के राष्ट्रीय महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया है।