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राजा कंसा पासी किला विवाद: संत समाज पासी समाज के साथ, परमहंस आचार्य बोले- 'प्राण देंगे पर अपमान नहीं होने देंगे'

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राजा कंसा पासी किला विवाद: संत समाज पासी समाज के साथ, परमहंस आचार्य बोले- 'प्राण देंगे पर अपमान नहीं होने देंगे'

सारांश

लखनऊ के मलिहाबाद में राजा कंसा पासी किले के विवाद में संत समाज सीधे मैदान में उतर आया है। जगतगुरु परमहंस आचार्य ने 'प्राण देने' तक की बात कही और सीएम योगी से माँग पूरी करने का आग्रह किया — यह विवाद अब स्थानीय संपत्ति विवाद से बढ़कर दलित-पिछड़े समाज की सांस्कृतिक पहचान की लड़ाई बन चुका है।

मुख्य बातें

जगतगुरु परमहंस आचार्य ने 25 मई को लखनऊ मलिहाबाद के पासी किला विवाद में पासी समाज के पक्ष में कड़ा बयान दिया।
परमहंस आचार्य ने कहा कि किले में नमाज पढ़कर पासी समाज को अपमानित करने का सिलसिला बंद होना चाहिए और वहाँ महादेव की पूजा होनी चाहिए।
ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश त्रिपाठी ने कहा कि लखनऊ में अनेक पासी राजा हुए हैं और किले के अवशेष उनकी विरासत के प्रमाण हैं।
साकेत भवन मंदिर, अयोध्या के महंत सीताराम दास ने इसे पासी समाज की 'चैतन्यता का प्रतीक' बताया।
संत समाज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पासी समाज की माँगें मानने का दबाव बनाया है।

लखनऊ के मलिहाबाद स्थित राजा कंसा पासी किले के विवाद में संत समाज खुलकर पासी समाज के समर्थन में आ गया है। जगतगुरु परमहंस आचार्य ने 25 मई को अयोध्या से पासी समाज के पक्ष में कड़ा बयान देते हुए कहा कि यह लड़ाई आर-पार की है और पूरा सनातन समाज इस संघर्ष में उनके साथ खड़ा है।

परमहंस आचार्य का बयान

जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि पासी समाज की ओर से हक और अधिकारों की जो माँग उठाई गई है, वह पूरे देश की माँग है। उन्होंने कहा, 'भारत की वैदिक संस्कृति में जब इस्लाम और ईसाइयत का अस्तित्व भी नहीं था, उससे पहले से ही पासी समाज इस धरती का अभिन्न हिस्सा है।' परमहंस आचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें विश्वास है कि सीएम पासी समाज की माँग स्वीकार करेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि किले में नमाज पढ़कर पासी समाज को दबाने और अपमानित करने का जो सिलसिला वर्षों से चल रहा है, वह बंद होना चाहिए। उनके अनुसार, 'पासी समाज के लिए हमारा तन, मन और प्राण तक समर्पित है — यदि एक भी व्यक्ति वहाँ नमाज पढ़ने गया तो हम अपने प्राणों की बाज़ी लगा देंगे, लेकिन पासी समाज को अपमानित नहीं होने देंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि वहाँ महादेव की पूजा होगी और संत समाज दर्शन के लिए जाएगा।

ज्योतिषाचार्य राकेश त्रिपाठी का पक्ष

ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश त्रिपाठी ने कहा कि लखनऊ ऐतिहासिक रूप से पासी समाज की भूमि रही है, क्योंकि यहाँ अनेक पासी राजाओं का शासन रहा है। किले के अवशेष आज भी इस विरासत के प्रमाण हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी की व्यक्तिगत संपत्ति पर न नमाज हो सकती है, न कथा और न ही पूजा — यदि वह संपत्ति पासी समाज की है, तो वहाँ कोई और धार्मिक गतिविधि उचित नहीं है।

साकेत भवन मंदिर के महंत का संदेश

साकेत भवन मंदिर, अयोध्या के महंत सीताराम दास ने मलिहाबाद की इस घटना को पासी समाज की 'चैतन्यता का प्रतीक' बताया। उन्होंने कहा कि अपनी विरासत, संस्कृति और राष्ट्रीय धरोहर की रक्षा के लिए संपूर्ण हिंदू समाज को जागरूक होना आवश्यक है। उनके अनुसार, पिछली सरकारों की नीतियों और सामाजिक विसंगतियों के कारण जो जागरूकता नहीं आ पाई थी, आज वह स्पष्ट दिख रही है।

महंत सीताराम दास ने भगवद्गीता का हवाला देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को यही उपदेश दिया था कि अपनी संस्कृति, राष्ट्र और अस्तित्व के लिए कर्म करना चाहिए। उन्होंने कहा, 'मुझे विश्वास है कि वह स्थान भगवान शिव का है — यह पासी समाज के अस्तित्व की लड़ाई है।'

विवाद की पृष्ठभूमि

यह विवाद लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र में स्थित उस किले को लेकर है जिसे पासी समाज राजा कंसा पासी की ऐतिहासिक धरोहर मानता है। पासी समाज का दावा है कि इस किले पर उनका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अधिकार है, जबकि वहाँ नमाज अदा किए जाने को लेकर तनाव बना हुआ है। मामले को लेकर सीएम योगी को पत्र भी लिखा जा चुका है।

आगे क्या होगा

संत समाज के इस मुखर समर्थन के बाद यह विवाद राज्य सरकार के लिए एक संवेदनशील मामला बन गया है। परमहंस आचार्य के बयान के बाद उत्तर प्रदेश सरकार पर पासी समाज की माँगों पर ठोस कार्रवाई का दबाव बढ़ सकता है। गौरतलब है कि यह मामला केवल एक स्थानीय संपत्ति विवाद नहीं रहा — यह दलित-पिछड़े समाज की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक दावेदारी का व्यापक प्रश्न बन चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी जड़ें उत्तर प्रदेश की उस जटिल राजनीति में हैं जहाँ दलित-पिछड़े समाज की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक दावेदारी तेज़ी से चुनावी और सामाजिक विमर्श का हिस्सा बन रही है। संत समाज का इस तरह खुलकर सामने आना दर्शाता है कि पासी समाज को हिंदुत्व की व्यापक छतरी के नीचे लाने की कोशिश हो रही है — जो BJP की दलित-एकीकरण रणनीति से मेल खाती है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि ऐसे विवादों में धार्मिक भावनाओं को भड़काने से सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुँच सकता है। असली सवाल यह है कि राज्य सरकार इस मामले को कानूनी और प्रशासनिक ढाँचे में कैसे सुलझाती है — बिना किसी समुदाय को और अधिक हाशिये पर धकेले।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजा कंसा पासी किला विवाद क्या है?
यह विवाद लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र में स्थित उस किले को लेकर है जिसे पासी समाज राजा कंसा पासी की ऐतिहासिक धरोहर मानता है। पासी समाज का दावा है कि इस किले पर उनका ऐतिहासिक अधिकार है और वहाँ नमाज अदा किए जाने को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ है।
परमहंस आचार्य ने पासी किला विवाद पर क्या कहा?
जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि पासी समाज की माँग पूरे देश की माँग है और संत समाज उनके साथ खड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किले में नमाज पढ़ी गई तो वे अपने प्राण तक बलिदान कर देंगे, लेकिन पासी समाज को अपमानित नहीं होने देंगे।
इस विवाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की क्या भूमिका है?
परमहंस आचार्य सहित संत समाज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भरोसा जताते हुए उनसे पासी समाज की माँगें मानने का आग्रह किया है। पासी समाज की ओर से सीएम को पत्र भी लिखा जा चुका है।
पासी समाज का इस किले पर क्या दावा है?
पासी समाज का कहना है कि लखनऊ में ऐतिहासिक रूप से अनेक पासी राजाओं का शासन रहा है और यह किला उनकी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा है। ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश त्रिपाठी के अनुसार किले के अवशेष आज भी इस दावे के साक्ष्य हैं।
इस विवाद का व्यापक सामाजिक महत्व क्या है?
महंत सीताराम दास के अनुसार यह मामला पासी समाज की 'चैतन्यता का प्रतीक' है और संपूर्ण हिंदू समाज को अपनी विरासत की रक्षा के लिए जागरूक होना चाहिए। यह विवाद दलित-पिछड़े समाज की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक दावेदारी के व्यापक प्रश्न को उठाता है।
राष्ट्र प्रेस
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