राजस्थान राज्यसभा चुनाव 2025: भाजपा उम्मीदवार सतीश पूनिया और अलका सिंह गुर्जर ने दाखिल किया नामांकन
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता सतीश पूनिया और डॉ. अलका सिंह गुर्जर ने सोमवार, 8 जून 2026 को जयपुर में राजस्थान से राज्यसभा की दो सीटों के लिए अपने नामांकन पत्र दाखिल किए। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा समेत पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति में संपन्न हुई इस नामांकन प्रक्रिया ने 18 जून को होने वाले मतदान की औपचारिक शुरुआत कर दी है।
नामांकन से पहले मंदिर में आस्था
नामांकन दाखिल करने से पूर्व सतीश पूनिया ने जयपुर के प्रसिद्ध श्री गोविंद देव जी मंदिर में पूजा-अर्चना की और पिंक सिटी के आराध्य देव का आशीर्वाद लिया। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि श्री गोविंद देव जी महाराज के दरबार में पूजा-अर्चना करने के बाद उन्होंने उनका आशीर्वाद लिया।
मुख्य घटनाक्रम: कौन-कौन रहे मौजूद
सतीश पूनिया के नामांकन के अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी, उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा, राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ और पार्टी के अनेक वरिष्ठ नेता व जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
डॉ. अलका सिंह गुर्जर के नामांकन में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने शिरकत की। दोनों उम्मीदवारों ने नामांकन से पहले भाजपा प्रदेश मुख्यालय में मुख्यमंत्री से भेंट की।
सीएम भजनलाल शर्मा की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पर लिखा कि भाजपा राज्यसभा प्रत्याशी सतीश पूनिया और अलका सिंह गुर्जर के नामांकन कार्यक्रम में शामिल होकर उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के मार्गदर्शन में दोनों उम्मीदवार राज्यसभा में राजस्थान की आकांक्षाओं, जनभावनाओं और प्रदेश के विकास संबंधी मुद्दों का प्रभावी एवं सशक्त प्रतिनिधित्व करेंगे।
जातीय समीकरण और राजनीतिक रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पूनिया (प्रमुख जाट नेता) और गुर्जर (गुर्जर समुदाय का प्रभावशाली चेहरा) के चयन के पीछे राजस्थान में चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण इन दो समुदायों के बीच पार्टी की पकड़ को और मजबूत करने की सुविचारित रणनीति है। जाट और गुर्जर समुदाय कई विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं, और यह कदम इन समूहों में कांग्रेस के प्रभावशाली नेताओं का मुकाबला करने की दिशा में उठाया गया है।
यह सामाजिक संतुलन 2028 के राजस्थान विधानसभा चुनावों की दीर्घकालिक तैयारियों से भी जुड़ा बताया जा रहा है। गौरतलब है कि राजस्थान विधानसभा में भाजपा के पास मजबूत बहुमत है, जिससे दोनों उम्मीदवारों की जीत लगभग सुनिश्चित मानी जा रही है।
चुनावी पृष्ठभूमि और आगे की राह
केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, भाजपा सांसद राजेंद्र गहलोत और कांग्रेस सांसद नीरज डांगी का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है। राजस्थान की तीन राज्यसभा सीटों के लिए मतदान 18 जून को होगा। विधानसभा में सदस्य-संख्या के आधार पर भाजपा का दो सीटें जीतना तय माना जा रहा है, जबकि तीसरी सीट पर कांग्रेस की दावेदारी है। यह चुनाव राजस्थान की राजनीति में जातीय गणित और दलीय रणनीति दोनों की एक महत्वपूर्ण परीक्षा होगी।