31 अगस्त 2026
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राजस्थान में कच्चे तेल का उत्पादन 80,000 बैरल प्रतिदिन करने की तैयारी, ASP और CSS तकनीक होगी इस्तेमाल

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राजस्थान में कच्चे तेल का उत्पादन 80,000 बैरल प्रतिदिन करने की तैयारी, ASP और CSS तकनीक होगी इस्तेमाल

सारांश

राजस्थान सरकार ने कच्चे तेल का उत्पादन 80,000 बैरल प्रतिदिन तक ले जाने का रोडमैप तैयार किया है — ASP और CSS जैसी उन्नत तकनीकों के दम पर। देश में तेल उत्पादन में तीसरे और गैस में दूसरे स्थान पर खड़ा राजस्थान अब घरेलू ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा दांव लगा रहा है।

मुख्य बातें

राजस्थान सरकार कच्चे तेल का उत्पादन मौजूदा 51,000-52,000 बैरल से बढ़ाकर 80,000 बैरल प्रतिदिन करने की तैयारी में है।
बाड़मेर-सांचौर और जैसलमेर बेसिन में ASP तकनीक और बीकानेर-नागौर बेसिन में CSS तकनीक अपनाई जाएगी।
राज्य में 12 पेट्रोलियम लीज और 12 अन्वेषण लाइसेंस सक्रिय; प्राकृतिक गैस उत्पादन में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर।
HRRL राजस्थान रिफाइनरी की क्षमता 9 एमएमटीपीए ; राज्य में निकले तेल को राज्य में ही रिफाइन करने पर जोर।
चालू वित्त वर्ष में 60 CNG स्टेशन का लक्ष्य; 23 स्टेशन पहले ही चालू, शेष दिसंबर तक पूरे करने के निर्देश।

राजस्थान सरकार ने चरणबद्ध तरीके से राज्य में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) का उत्पादन बढ़ाकर 80,000 बैरल प्रतिदिन करने का लक्ष्य तय किया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (खान एवं पेट्रोलियम) अपर्णा अरोड़ा ने सोमवार, 31 अगस्त को जयपुर सचिवालय में आयोजित पेट्रोलियम और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) क्षेत्र की समीक्षा बैठक में यह जानकारी दी। फिलहाल राज्य में प्रतिदिन 51,000 से 52,000 बैरल कच्चे तेल का उत्पादन हो रहा है।

किन तकनीकों का होगा उपयोग

उत्पादन में यह उल्लेखनीय वृद्धि हासिल करने के लिए तेल कंपनियाँ दो उन्नत तकनीकों का सहारा लेंगी। बाड़मेर-सांचौर और जैसलमेर बेसिन में अल्कली सर्फेक्टेंट पॉलिमर (ASP) तकनीक अपनाई जाएगी, जबकि बीकानेर-नागौर बेसिन में साइक्लिक स्टीम स्टिमुलेशन (CSS) तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। ये दोनों तकनीकें एन्हांस्ड ऑयल रिकवरी (EOR) श्रेणी में आती हैं और पुराने या कम दबाव वाले तेल क्षेत्रों से अधिकतम उत्पादन निकालने में कारगर मानी जाती हैं।

राजस्थान की पेट्रोलियम क्षेत्र में मौजूदा स्थिति

अरोड़ा ने बताया कि राज्य में इस समय 12 पेट्रोलियम लीज और 12 पेट्रोलियम अन्वेषण लाइसेंस सक्रिय हैं। प्राकृतिक गैस का उत्पादन 2.6 से 2.8 एमएमएससीएमडी (मिलियन मेट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन) के स्तर पर है। उन्होंने रेखांकित किया कि प्राकृतिक गैस उत्पादन में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर और कच्चे तेल उत्पादन में तीसरे स्थान पर है — एक ऐसी स्थिति जो राज्य को ऊर्जा नीति की दृष्टि से राष्ट्रीय मानचित्र पर महत्वपूर्ण बनाती है।

HRRL राजस्थान रिफाइनरी की भूमिका

HRRL राजस्थान रिफाइनरी की शोधन क्षमता 9 एमएमटीपीए (मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष) होगी। अरोड़ा ने जोर दिया कि यह रिफाइनरी राज्य में उत्पादित लगभग 15 लाख टन कच्चे तेल को स्थानीय स्तर पर प्रसंस्कृत कर सकेगी। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राजस्थान में निकाले गए कच्चे तेल को राज्य के भीतर ही रिफाइन किया जाए, जिससे मूल्य संवर्धन और रोज़गार का लाभ राज्य को मिले।

सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन और CNG विस्तार

बैठक में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। चालू वित्त वर्ष में 60 CNG स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य है, जिनमें से 23 स्टेशन पहले ही चालू हो चुके हैं। अरोड़ा ने अधिकारियों को दिसंबर तक शेष लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही बहुमंजिला आवासीय इमारतों में घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन बढ़ाने में तेज़ी लाने पर भी बल दिया गया।

बैठक में कौन-कौन रहे शामिल

बैठक में पेट्रोलियम निदेशक अवधेश सिंह ने बताया कि केयर्न वेदांता, ऑयल इंडिया, ओएनजीसी और फोकस एनर्जी राजस्थान में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की खोज एवं उत्पादन में सक्रिय हैं। आरएसजीएल के प्रबंध निदेशक विनय पाटनी ने CGD परियोजनाओं की प्रगति प्रस्तुत की। इसके अलावा खान विभाग की विशेष सचिव नम्रता वृश्णि, उप सचिव राकेश कुमार, ओएसडी अनुज सक्सेना और संयुक्त निदेशक (पेट्रोलियम) दिलीप राज शर्मा भी उपस्थित रहे। यह समीक्षा बैठक ऐसे समय में हुई है जब केंद्र सरकार भी घरेलू ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने को प्राथमिकता दे रही है और आयात निर्भरता घटाने पर ज़ोर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 बैरल प्रतिदिन का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, लेकिन असली सवाल यह है कि ASP और CSS जैसी एन्हांस्ड रिकवरी तकनीकें पुराने बाड़मेर क्षेत्रों में किस हद तक कारगर साबित होंगी — जहाँ उत्पादन में गिरावट की प्रवृत्ति पहले से दर्ज है। राज्य के भीतर रिफाइनिंग की नीति दिशा सही है, लेकिन HRRL रिफाइनरी की अपनी क्रियान्वयन चुनौतियाँ रही हैं। CNG और PNG विस्तार की रफ्तार भी तब तक अधूरी रहेगी जब तक बहुमंजिला इमारतों में अंतिम-छोर कनेक्टिविटी सुनिश्चित नहीं होती — जो अभी तक सबसे कमज़ोर कड़ी है।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान में कच्चे तेल का उत्पादन अभी कितना है और लक्ष्य क्या है?
वर्तमान में राजस्थान में प्रतिदिन लगभग 51,000 से 52,000 बैरल कच्चे तेल का उत्पादन हो रहा है। सरकार ने चरणबद्ध तरीके से इसे 80,000 बैरल प्रतिदिन तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है।
उत्पादन बढ़ाने के लिए कौन-सी तकनीकें अपनाई जाएंगी?
बाड़मेर-सांचौर और जैसलमेर बेसिन में अल्कली सर्फेक्टेंट पॉलिमर (ASP) तकनीक और बीकानेर-नागौर बेसिन में साइक्लिक स्टीम स्टिमुलेशन (CSS) तकनीक का उपयोग किया जाएगा। ये दोनों एन्हांस्ड ऑयल रिकवरी (EOR) विधियाँ हैं।
HRRL राजस्थान रिफाइनरी की क्षमता कितनी होगी?
HRRL राजस्थान रिफाइनरी की शोधन क्षमता 9 एमएमटीपीए (मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष) होगी। यह रिफाइनरी राज्य में उत्पादित लगभग 15 लाख टन कच्चे तेल को स्थानीय स्तर पर प्रसंस्कृत कर सकेगी।
राजस्थान में CNG स्टेशनों का विस्तार कब तक होगा?
चालू वित्त वर्ष में 60 CNG स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य है, जिनमें से 23 पहले ही शुरू हो चुके हैं। अधिकारियों को दिसंबर तक शेष लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्थान में कच्चे तेल और गैस उत्पादन में कौन-सी कंपनियाँ काम कर रही हैं?
केयर्न वेदांता, ऑयल इंडिया, ओएनजीसी और फोकस एनर्जी राजस्थान में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की खोज एवं उत्पादन कार्य में सक्रिय हैं। राज्य में 12 पेट्रोलियम लीज और 12 अन्वेषण लाइसेंस वर्तमान में सक्रिय हैं।
राष्ट्र प्रेस
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