राजस्थान में मानसून कमजोर, अगले 7 दिन शुष्क मौसम; 20 जुलाई के बाद बारिश लौटने की उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान में दक्षिण-पश्चिम मानसून फिलहाल थम गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 14 जुलाई 2026 से अगले एक सप्ताह तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम मुख्यतः शुष्क बना रहेगा और कहीं भी उल्लेखनीय वर्षा की संभावना नहीं है। जयपुर मौसम विज्ञान केंद्र ने पुष्टि की है कि बीते 24 घंटों में राज्य के अधिकतर इलाकों में बारिश नहीं हुई, हालाँकि कुछ स्थानों पर तेज़ हवाएँ ज़रूर चलीं।
तापमान का हाल
फलोदी में राज्य का सर्वाधिक अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, अजमेर में न्यूनतम तापमान 24.9 डिग्री सेल्सियस रहा, जो राज्य में सबसे कम रहा। पश्चिमी राजस्थान में धूप और उमस ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है।
किन इलाकों में कब हल्की बारिश संभव
IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, जोधपुर और बीकानेर संभाग के अधिकांश जिलों में अगले सात दिनों तक मौसम शुष्क रहेगा। पूर्वी राजस्थान में भी पाँच से छह दिनों तक बारिश की कोई विशेष संभावना नहीं है।
हालाँकि 14 और 15 जुलाई को बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और चूरू जिलों में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। 16 और 17 जुलाई को उदयपुर संभाग के कुछ क्षेत्रों में भी हल्की वर्षा के आसार हैं। इसके अलावा, अगले दो से तीन दिनों में जोधपुर और बीकानेर डिवीजनों में 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से धूल भरी आँधियाँ चलने की संभावना है।
मानसून के कमज़ोर पड़ने की वजह
IMD के अनुसार, मौजूदा शुष्क दौर मानसूनी हवाओं के कमज़ोर प्रवाह और ऊपरी वायुमंडल में किसी सक्रिय मौसम प्रणाली की अनुपस्थिति का परिणाम है। गौरतलब है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून ने राजस्थान को ढक तो लिया है, लेकिन व्यापक वर्षा के लिए आवश्यक वायुमंडलीय परिस्थितियाँ अभी नहीं बनी हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब मानसून पहले ही देरी से पहुँचा था। दक्षिण-पश्चिम मानसून 2 जुलाई 2026 को राजस्थान पहुँचा, जो सामान्य आगमन से सात दिन बाद था। पिछले 27 वर्षों में यह आठवीं बार है जब मानसून जुलाई में राज्य में दाखिल हुआ है। इससे पहले मानसून 2 जुलाई 2019 को पूरे राजस्थान में सक्रिय हुआ था।
20 जुलाई के बाद राहत की उम्मीद
जयपुर मौसम विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 20 जुलाई के आसपास बंगाल की खाड़ी में एक नया कम दबाव का क्षेत्र बन सकता है। यदि यह प्रणाली मज़बूत होकर अंदरूनी इलाकों की ओर बढ़ती है, तो राजस्थान में मानसून फिर से सक्रिय हो सकता है।
बारिश की वापसी से न केवल लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिलेगी, बल्कि खरीफ फसलों को भी इसका सीधा लाभ होगा, जो इस समय पानी की दरकार में हैं।
राजस्थान मानसून का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
IMD के 1901 से 2025 तक के आँकड़ों के अनुसार, राजस्थान में सर्वाधिक वर्षा 1917 के मानसून में दर्ज की गई थी, जब 844.2 मिलीमीटर बारिश हुई थी — जो सामान्य से करीब 94 प्रतिशत अधिक थी। वर्ष 2025 का मानसून सीजन राज्य के इतिहास का दूसरा सबसे अधिक वर्षा वाला सीजन रहा, जिसमें 715.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। राजस्थान में मानसून के दौरान औसतन 435.6 मिलीमीटर वर्षा होती है। आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी में बनने वाली मौसम प्रणाली पर सभी की नज़रें टिकी हैं।