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राजसमंद में बकाया वेतन के लिए अनोखा विरोध: भाई ने मुंडवाया सिर, ₹1.56 लाख 6 साल से लंबित

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राजसमंद में बकाया वेतन के लिए अनोखा विरोध: भाई ने मुंडवाया सिर, ₹1.56 लाख 6 साल से लंबित

सारांश

राजसमंद में एक चपरासी को 6 साल से ₹1.56 लाख वेतन नहीं मिला — तो उसके भाई ने पंचायत भवन के बाहर सिर मुंडवाकर विरोध जताया। पंचायत और परिवार के बीच कार्यकाल को लेकर विवाद जारी है, लेकिन 2-3 दिन में भुगतान का आश्वासन मिला है।

मुख्य बातें

प्रकाश प्रजापत ने 6 जून को राजसमंद की बामन टुकड़ा ग्राम पंचायत के बाहर सिर मुंडवाकर विरोध दर्ज कराया।
उनके भाई रतनलाल प्रजापत 15 वर्षों से पंचायत में चपरासी हैं; करीब 6.5 साल का ₹1.56 लाख वेतन बकाया है।
मासिक वेतन ₹2,000 निर्धारित; परिवार ने पंचायत, जिला परिषद और मुख्यमंत्री पोर्टल पर बार-बार शिकायत की।
पंचायत प्रशासक लहरीलाल दवे के अनुसार रतनलाल केवल 2.5-3 साल नियमित रहे; पंचायत पहले ही ₹30,000 खाते में जमा कर चुकी है।
पंचायत ने 2-3 दिनों में शेष बकाया चुकाने का आश्वासन दिया है।

राजसमंद जिले की बामन टुकड़ा ग्राम पंचायत में 6 जून को एक असाधारण विरोध प्रदर्शन देखने को मिला, जब प्रकाश प्रजापत ने अपने भाई का ₹1.56 लाख बकाया वेतन दिलाने की माँग को लेकर पंचायत भवन के बाहर धरना देते हुए अपना सिर मुंडवा लिया। यह मामला स्थानीय स्तर पर तीखी चर्चा का विषय बन गया है, जो पंचायत स्तर पर वेतन भुगतान की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

मामले की पृष्ठभूमि

रतनलाल प्रजापत पिछले 15 वर्षों से बामन टुकड़ा ग्राम पंचायत में चपरासी के पद पर कार्यरत हैं। उनके भाई प्रकाश के अनुसार, पिछले करीब 6 वर्षों से रतनलाल को ₹2,000 मासिक वेतन का भुगतान नहीं किया गया, जिससे कुल ₹1.56 लाख की राशि बकाया हो गई है। परिवार ने पंचायत, जिला परिषद और मुख्यमंत्री पोर्टल पर बार-बार शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में सामने आया है जब राजस्थान में पंचायत-स्तरीय कर्मचारियों के वेतन विवाद नई बात नहीं हैं, और ऐसे मामलों में शिकायत तंत्र की सीमाएँ बार-बार उजागर होती रही हैं।

पीड़ित का बयान

रतनलाल प्रजापत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'चपरासी का काम करते हुए मुझे 15 साल हो गए। 2000 रुपए महीने के हिसाब से 6.5 साल का वेतन नहीं मिला। कुल 1.56 लाख रुपए बकाया है। पहले कहा गया कि यहाँ कोई काम नहीं करता, बाद में उन्होंने मान लिया। अब कहा गया है कि 2-3 दिन में पूरा पैसा दे देंगे।'

उनके भाई प्रकाश प्रजापत ने कहा, 'पिछले 6 वर्षों से भाई चपरासी के पद पर था। कितनी बार शिकायत की, सरपंच और सचिव को बताया, लेकिन बकाया वेतन नहीं मिला। मुंडन करवाकर हमने अपना विरोध दर्ज कराया है।'

पंचायत प्रशासन का पक्ष

बामन टुकड़ा पंचायत के प्रशासक लहरीलाल दवे ने अपना अलग पक्ष रखा। उनके अनुसार, रतनलाल केवल 2.5 से 3 वर्ष तक ही नियमित रूप से पंचायत में आते थे, उसके बाद न तो उपस्थिति रही और न ही कार्य किया। दवे ने कहा कि पंचायत प्रारंभिक 2.5-3 साल का वेतन देने को तैयार है। उन्होंने यह भी बताया कि पंचायत पहले ही ₹30,000 रतनलाल के खाते में जमा करा चुकी है। प्रशासक का आरोप है कि तयशुदा राशि से अधिक भुगतान की माँग की जा रही है।

विरोध का तरीका और सामाजिक संदर्भ

सिर मुंडवाकर विरोध जताना भारत में सामाजिक आंदोलनों की एक पुरानी परंपरा रही है, जो पीड़ित की गहरी हताशा और व्यवस्था में आस्था खोने का प्रतीक माना जाता है। यह ऐसी पहली घटना नहीं है जब किसी सरकारी कर्मचारी को अपना बकाया पाने के लिए असाधारण कदम उठाना पड़ा हो। निचले स्तर के सरकारी कर्मचारियों, विशेषकर ग्रामीण पंचायतों में, वेतन विलंब की समस्या व्यापक रूप से दर्ज की जाती रही है।

आगे क्या होगा

रतनलाल प्रजापत के अनुसार, पंचायत ने 2-3 दिनों में पूरा बकाया चुकाने का मौखिक आश्वासन दिया है। हालाँकि, दोनों पक्षों के बीच कार्यकाल की अवधि और देय राशि को लेकर विवाद अभी भी बना हुआ है। यदि भुगतान नहीं हुआ, तो परिवार आगे की कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता अपना सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह स्पष्ट है कि शिकायत निवारण तंत्र — चाहे वह सरपंच हो, जिला परिषद हो या मुख्यमंत्री पोर्टल — निचले स्तर के कर्मचारियों के लिए व्यावहारिक रूप से निष्प्रभावी है। दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी दावे — जहाँ एक ओर 6.5 साल की सेवा का दावा है, वहीं दूसरी ओर केवल 2.5-3 साल की — यह भी दर्शाते हैं कि पंचायतों में उपस्थिति और सेवा अभिलेखों का रखरखाव कितना लचर है। बिना पारदर्शी सेवा अभिलेखों और समयबद्ध भुगतान तंत्र के, ऐसे विवाद बार-बार दोहराए जाते रहेंगे।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजसमंद पंचायत वेतन विवाद क्या है?
राजसमंद की बामन टुकड़ा ग्राम पंचायत में चपरासी रतनलाल प्रजापत को कथित तौर पर करीब 6.5 साल से ₹2,000 मासिक वेतन नहीं मिला, जिससे कुल ₹1.56 लाख बकाया हो गया। इस बकाये को दिलाने की माँग को लेकर उनके भाई प्रकाश प्रजापत ने 6 जून को पंचायत भवन के बाहर सिर मुंडवाकर विरोध प्रदर्शन किया।
पंचायत प्रशासन का इस मामले में क्या कहना है?
पंचायत प्रशासक लहरीलाल दवे के अनुसार, रतनलाल केवल 2.5 से 3 साल तक नियमित रूप से काम पर आते थे, उसके बाद उपस्थिति और कार्य दोनों बंद हो गए। पंचायत उसी अवधि का वेतन देने को तैयार है और पहले ही ₹30,000 खाते में जमा करा चुकी है।
परिवार ने पहले क्या-क्या शिकायतें कीं?
परिवार ने पंचायत, जिला परिषद और मुख्यमंत्री पोर्टल — तीनों स्तरों पर बार-बार शिकायत दर्ज कराई, लेकिन किसी भी स्तर से कोई ठोस समाधान नहीं मिला, जिसके बाद यह असाधारण विरोध का रास्ता चुना गया।
अब आगे क्या होने की उम्मीद है?
रतनलाल प्रजापत के अनुसार, पंचायत ने 2-3 दिनों में पूरा बकाया चुकाने का आश्वासन दिया है। हालाँकि, देय राशि को लेकर दोनों पक्षों में अभी भी मतभेद है और यदि भुगतान नहीं हुआ तो आगे की कार्रवाई की संभावना बनी रहेगी।
क्या पंचायत कर्मचारियों के वेतन विलंब की यह अकेली घटना है?
नहीं, राजस्थान सहित पूरे भारत में ग्राम पंचायत स्तर के कर्मचारियों — विशेषकर चपरासी, सफाईकर्मी जैसे निम्न श्रेणी के पदों पर — वेतन विलंब की शिकायतें लंबे समय से दर्ज होती रही हैं। यह मामला उस व्यापक समस्या को एक बार फिर सामने लाता है।
राष्ट्र प्रेस
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