लक्ष्मीकांत मुंडा हत्याकांड: झारखंड में राजस्व कर्मियों की एकदिवसीय कलमबंद हड़ताल, सभी अंचल कार्यालय ठप
सारांश
मुख्य बातें
रांची के अरगोड़ा अंचल में तैनात राजस्व उप निरीक्षक लक्ष्मीकांत मुंडा की निर्मम हत्या के विरोध में 29 अक्टूबर 2026 को झारखंड के सभी जिलों के राजस्व कर्मी एकदिवसीय कलमबंद (पेन डाउन) हड़ताल पर उतर आए। हत्यारों की तत्काल गिरफ्तारी और सरकारी कर्मचारियों के लिए पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की माँग इस आंदोलन के केंद्र में है।
हड़ताल का स्वरूप और व्यापकता
राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन के चलते प्रदेश के तमाम अंचल कार्यालयों, भूमि सुधार उप-समाहर्ता कार्यालयों और जिला राजस्व शाखाओं में म्यूटेशन, भूमि मापी तथा प्रमाण पत्र निर्गमन जैसे ज़रूरी कामकाज पूरी तरह ठप हो गए। दूर-दराज के क्षेत्रों से जरूरी दस्तावेज़ों के लिए आए आम नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
झारखंड राज्य राजस्व उपनिरीक्षक संघ के मुख्य संरक्षक भारत सिन्हा और महामंत्री दुर्गेश मुंडा ने संयुक्त बयान में बताया कि इस आंदोलन में राजस्व निरीक्षक, राजस्व उप निरीक्षक और अंचल अमीन सहित राजस्व विभाग के तमाम मैदानी कर्मी एकजुट होकर शामिल हुए।
संघ की चेतावनी और आगे की रणनीति
संघ के शीर्ष पदाधिकारियों ने प्रदेश सरकार को कड़ी चेतावनी दी है कि जब तक लक्ष्मीकांत मुंडा के हत्यारों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता और राजस्व कर्मियों के लिए ठोस सुरक्षा व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि पुलिस-प्रशासन ने शीघ्र एवं कठोर कार्रवाई नहीं की, तो राज्यभर के राजस्व कर्मी अनिश्चितकालीन पूर्ण हड़ताल पर जाने के लिए बाध्य होंगे।
गुरुवार की शाम कलमबंद हड़ताल समाप्त होने के बाद संघ की एक उच्चस्तरीय आपात बैठक बुलाई गई, जिसमें आगे के आंदोलन की रूपरेखा और रणनीति को अंतिम रूप दिया जाना था।
हत्याकांड की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि लक्ष्मीकांत मुंडा की हत्या 24 अक्टूबर को रांची के नामकुम स्थित उनके आवास पर की गई थी। घटनास्थल से जाँच एजेंसियों को उनके सिर पर चोट के निशान मिले और घर से सीसीटीवी कैमरे का डीवीआर तथा उनका मोबाइल फोन गायब पाया गया। इस हत्याकांड में अब तक किसी भी संदिग्ध की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है, जो कर्मचारी संगठनों के आक्रोश का मुख्य कारण बना हुआ है।
आम जनता पर असर
यह हड़ताल ऐसे समय में आई है जब झारखंड में भूमि अभिलेख और राजस्व संबंधी कार्यों की माँग पहले से अधिक है। हड़ताल के कारण किसानों से लेकर संपत्ति खरीदारों तक, हर वर्ग के नागरिकों को अपने जरूरी दस्तावेज़ों के लिए इंतज़ार करना पड़ा। यदि अनिश्चितकालीन हड़ताल की नौबत आई, तो इसका असर राजस्व प्रशासन पर और गहरा पड़ सकता है।
क्या होगा आगे
संघ की आपात बैठक के नतीजे तय करेंगे कि आंदोलन का अगला कदम क्या होगा। सरकार और पुलिस प्रशासन पर जाँच में तेज़ी लाने और हत्यारों को गिरफ्तार करने का दबाव बढ़ता जा रहा है। राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जो इस मामले को और संवेदनशील बना देता है।