रांची हत्याकांड: भाजपा ने हेमंत सरकार को दिया 7 दिन का अल्टीमेटम, नहीं हुआ खुलासा तो होगा उग्र आंदोलन
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड की राजधानी रांची में राजस्व कर्मचारी लक्ष्मीकांत मुंडा की हत्या के मामले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 28 अक्टूबर 2026 को राज्य पुलिस को सात दिनों के भीतर हत्याकांड का खुलासा करने का अल्टीमेटम दिया है। पार्टी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि निर्धारित समयसीमा में मामले का पर्दाफाश न हुआ तो वह उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाएगी। भाजपा के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को घटनास्थल का दौरा कर मृतक के परिजनों को न्याय दिलाने का भरोसा दिया।
प्रतिनिधिमंडल का दौरा और निरीक्षण
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के निर्देश पर गठित इस प्रतिनिधिमंडल में पूर्व सांसद समीर उरांव, रामकुमार पाहन, अशोक बड़ाईक, आरती कुजूर और विनय महतो धीरज शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने नामकुम के जोरार स्थित तेतरी टोली में घटनास्थल का जायज़ा लिया और आसपास के निवासियों से घटना की जानकारी जुटाई।
इसके बाद भाजपा नेता बुंडू के दलकीडीह गांव पहुँचे और लक्ष्मीकांत मुंडा के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। नेताओं ने परिजनों को आश्वासन दिया कि पार्टी इस संकट की घड़ी में उनके साथ खड़ी है और जब तक न्याय नहीं मिलता, संघर्ष जारी रहेगा।
पुलिस से मिले और जाँच में तेज़ी की माँग
घटनास्थल और परिजनों से मुलाकात के बाद प्रतिनिधिमंडल नामकुम थाना पहुँचा, जहाँ थाना प्रभारी से भेंट कर मामले की जाँच में तत्काल तेज़ी लाने की माँग की गई। नेताओं ने कहा कि आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार किया जाए और उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
हेमंत सरकार पर कानून-व्यवस्था विफलता का आरोप
प्रतिनिधिमंडल के संयोजक और पूर्व सांसद समीर उरांव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार पर कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर पूरी तरह विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राजधानी रांची में दिनदहाड़े किसी के घर में घुसकर एक सरकारी कर्मचारी की हत्या कर दी जाए — यह अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है।
उरांव ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में आदिवासी समुदाय सुरक्षित नहीं है और अपराधियों का मनोबल लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दोहराई कि सात दिनों में कार्रवाई नहीं हुई तो भाजपा आंदोलन का रास्ता अख़्तियार करेगी।
मौके पर मौजूद रहे पदाधिकारी और कार्यकर्ता
इस दौरान भाजपा जिला उपाध्यक्ष प्रमोद सिंह, लोवाडीह मंडल अध्यक्ष अशोक गोप, पूर्व मंडल अध्यक्ष अशोक मुंडा सहित पार्टी के अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीण उपस्थित थे। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष पहले से ही सरकार को घेरता रहा है।
गौरतलब है कि यह मामला राज्य की राजधानी में एक सरकारी कर्मचारी की हत्या से जुड़ा होने के कारण राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। अब सबकी निगाहें पुलिस की जाँच की गति और राज्य सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।