13 जुलाई 2026
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राजनाथ सिंह का KGMU दीक्षांत समारोह में संबोधन: इलाज नहीं, रोकथाम है असली लक्ष्य; UP में मेडिकल कॉलेज 17 से बढ़कर 81

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राजनाथ सिंह का KGMU दीक्षांत समारोह में संबोधन: इलाज नहीं, रोकथाम है असली लक्ष्य; UP में मेडिकल कॉलेज 17 से बढ़कर 81

सारांश

KGMU के दीक्षांत मंच से राजनाथ सिंह ने भारत की स्वास्थ्य क्रांति का खाका खींचा — UP में मेडिकल कॉलेज 17 से 81, दुनिया की सबसे सस्ती CAR-T थेरेपी, पहली स्वदेशी MRI और नई एंटीबायोटिक 'नैफिथ्रोमाइसिन'। इलाज से आगे रोकथाम की नीति अब सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ स्थित KGMU के दीक्षांत समारोह में कहा कि सरकार की नीति इलाज के साथ-साथ रोकथाम पर भी केंद्रित है।
उत्तर प्रदेश में 2017 से पहले केवल 17 मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढ़कर 81 हो गए हैं; 2 AIIMS भी संचालित हैं।
भारत ने CAR-T सेल चिकित्सा का विश्व का सबसे सस्ता स्वरूप विकसित किया है तथा 2023 में पहली स्वदेशी MRI मशीन बनाई।
तीन दशक बाद 2024 में पेनिसिलिन-जी का घरेलू उत्पादन पुनः शुरू; पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक 'नैफिथ्रोमाइसिन' विकसित।
देशभर में 19,000 से अधिक जन औषधि केंद्र ; आयुष्मान भारत योजना के तहत करोड़ों को निशुल्क इलाज।
पुणे के वैज्ञानिकों ने स्तन कैंसर के लिए नैनो औषधि विकसित; हीमोफीलिया हेतु स्वदेशी जीन चिकित्सा का सफल परीक्षण।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 14 जुलाई 2025 को लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के दीक्षांत समारोह में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की स्वास्थ्य नीति का केंद्र बिंदु अब केवल बीमारियों का उपचार नहीं, बल्कि उनकी रोकथाम भी है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था आत्मनिर्भर, सुलभ, किफायती और जन-केंद्रित बनी है तथा चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की गई है।

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य ढाँचे का कायाकल्प

राजनाथ सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक बदलाव आया है। 2017 से पहले प्रदेश में केवल 17 मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढ़कर 81 हो गए हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश में दो अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) भी संचालित हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब 'हर जिले में मेडिकल कॉलेज' की अवधारणा से भी आगे निकल चुका है।

स्वदेशी चिकित्सा नवाचार: वैश्विक चुनौतियों का भारतीय समाधान

रक्षा मंत्री ने बताया कि भारत आज जीन चिकित्सा, परमाणु चिकित्सा और अन्य अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी वैश्विक चुनौतियों के स्वदेशी समाधान विकसित कर रहा है। कैंसर के उपचार में उपयोगी CAR-T सेल चिकित्सा का दुनिया का सबसे सस्ता स्वरूप भारत ने विकसित किया है, जिससे यह उपचार आम लोगों की पहुँच में आ रहा है।

हीमोफीलिया के उपचार के लिए स्वदेशी जीन चिकित्सा का सफल परीक्षण किया जा चुका है। पुणे के वैज्ञानिकों ने स्तन कैंसर के इलाज के लिए अत्याधुनिक नैनो औषधि विकसित की है। तीन दशक बाद वर्ष 2024 में देश में पेनिसिलिन-जी का उत्पादन फिर से शुरू हुआ है। इसी वर्ष देश की पहली स्वदेशी मैक्रोलाइड एंटीबायोटिक 'नैफिथ्रोमाइसिन' विकसित की गई है, जो जीवाणुजनित निमोनिया के इलाज में कारगर होगी।

आत्मनिर्भर स्वास्थ्य क्षेत्र की ओर ठोस कदम

राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्ष 2023 में भारत ने पहली स्वदेशी MRI मशीन विकसित कर स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। देशभर में 19,000 से अधिक जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयाँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत करोड़ों नागरिकों को निशुल्क इलाज की सुविधा मिल रही है। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के माध्यम से चिकित्सा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण को भी नई गति मिली है।

अंगदान और चिकित्सकों की सामाजिक भूमिका

रक्षा मंत्री ने अंगदान को मानवता का सबसे बड़ा उपहार बताया और कहा कि किसी व्यक्ति के अंग दूसरे को नया जीवन दे सकते हैं। उन्होंने डॉक्टरों से आग्रह किया कि वे समाज में अंगदान को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने में अग्रणी भूमिका निभाएँ, क्योंकि उनकी संवेदनशील सलाह कई परिवारों को इस दिशा में प्रेरित कर सकती है।

नई पीढ़ी के डॉक्टरों से अपेक्षाएँ

राजनाथ सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), जीन संपादन और सटीक चिकित्सा जैसी नई तकनीकें चिकित्सा क्षेत्र में तेज़ बदलाव ला रही हैं, इसलिए डॉक्टरों को निरंतर स्वयं को अद्यतन रखना होगा। उन्होंने नवस्नातक विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल डिग्री नहीं, बल्कि चिकित्सा सेवा की गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बन रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि चिकित्सकों को अत्यंत तनावपूर्ण परिस्थितियों में काम करना पड़ता है, लेकिन उन्हें अपने स्वयं के स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। जीवन बचाना सबसे बड़ा धर्म है और इसके लिए संवेदनशीलता, सेवाभाव और दृढ़ संकल्प सबसे आवश्यक हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ चिकित्सक-जनसंख्या अनुपात अभी भी WHO मानकों से काफी पीछे है। 19,000 जन औषधि केंद्र और आयुष्मान भारत जैसी योजनाएँ आपूर्ति पक्ष को मज़बूत करती हैं, परंतु सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय अभी भी GDP के 2.5% के लक्ष्य से नीचे बना हुआ है। रोकथाम-केंद्रित नीति की घोषणा तब तक अधूरी रहेगी, जब तक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की क्षमता और जवाबदेही का ठोस ढाँचा नहीं बनता।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजनाथ सिंह ने KGMU दीक्षांत समारोह में क्या मुख्य बातें कहीं?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल बीमारियों का इलाज नहीं, बल्कि उनकी रोकथाम भी है। उन्होंने भारत की स्वास्थ्य आत्मनिर्भरता, UP में मेडिकल कॉलेजों की वृद्धि और CAR-T सेल चिकित्सा जैसे स्वदेशी नवाचारों का उल्लेख किया।
उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या कितनी बढ़ी है?
2017 से पहले उत्तर प्रदेश में केवल 17 मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढ़कर 81 हो गए हैं। इसके अलावा प्रदेश में दो AIIMS भी संचालित हैं।
भारत में CAR-T सेल चिकित्सा क्यों महत्वपूर्ण है?
कैंसर के उपचार में उपयोगी CAR-T सेल चिकित्सा का दुनिया का सबसे सस्ता स्वरूप भारत ने विकसित किया है। इससे यह उन्नत उपचार अब आम लोगों की आर्थिक पहुँच में भी आ रहा है।
नैफिथ्रोमाइसिन क्या है और यह क्यों खास है?
'नैफिथ्रोमाइसिन' भारत की पहली स्वदेशी मैक्रोलाइड एंटीबायोटिक है, जो जीवाणुजनित निमोनिया के इलाज में उपयोगी होगी। यह स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
जन औषधि केंद्र और आयुष्मान भारत योजना से आम जनता को क्या फायदा है?
देशभर में 19,000 से अधिक जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयाँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत करोड़ों नागरिकों को निशुल्क इलाज की सुविधा मिल रही है।
राष्ट्र प्रेस
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