राजनाथ सिंह का KGMU दीक्षांत समारोह में संबोधन: इलाज नहीं, रोकथाम है असली लक्ष्य; UP में मेडिकल कॉलेज 17 से बढ़कर 81
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 14 जुलाई 2025 को लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के दीक्षांत समारोह में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की स्वास्थ्य नीति का केंद्र बिंदु अब केवल बीमारियों का उपचार नहीं, बल्कि उनकी रोकथाम भी है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था आत्मनिर्भर, सुलभ, किफायती और जन-केंद्रित बनी है तथा चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की गई है।
उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य ढाँचे का कायाकल्प
राजनाथ सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक बदलाव आया है। 2017 से पहले प्रदेश में केवल 17 मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढ़कर 81 हो गए हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश में दो अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) भी संचालित हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब 'हर जिले में मेडिकल कॉलेज' की अवधारणा से भी आगे निकल चुका है।
स्वदेशी चिकित्सा नवाचार: वैश्विक चुनौतियों का भारतीय समाधान
रक्षा मंत्री ने बताया कि भारत आज जीन चिकित्सा, परमाणु चिकित्सा और अन्य अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी वैश्विक चुनौतियों के स्वदेशी समाधान विकसित कर रहा है। कैंसर के उपचार में उपयोगी CAR-T सेल चिकित्सा का दुनिया का सबसे सस्ता स्वरूप भारत ने विकसित किया है, जिससे यह उपचार आम लोगों की पहुँच में आ रहा है।
हीमोफीलिया के उपचार के लिए स्वदेशी जीन चिकित्सा का सफल परीक्षण किया जा चुका है। पुणे के वैज्ञानिकों ने स्तन कैंसर के इलाज के लिए अत्याधुनिक नैनो औषधि विकसित की है। तीन दशक बाद वर्ष 2024 में देश में पेनिसिलिन-जी का उत्पादन फिर से शुरू हुआ है। इसी वर्ष देश की पहली स्वदेशी मैक्रोलाइड एंटीबायोटिक 'नैफिथ्रोमाइसिन' विकसित की गई है, जो जीवाणुजनित निमोनिया के इलाज में कारगर होगी।
आत्मनिर्भर स्वास्थ्य क्षेत्र की ओर ठोस कदम
राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्ष 2023 में भारत ने पहली स्वदेशी MRI मशीन विकसित कर स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। देशभर में 19,000 से अधिक जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयाँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत करोड़ों नागरिकों को निशुल्क इलाज की सुविधा मिल रही है। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के माध्यम से चिकित्सा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण को भी नई गति मिली है।
अंगदान और चिकित्सकों की सामाजिक भूमिका
रक्षा मंत्री ने अंगदान को मानवता का सबसे बड़ा उपहार बताया और कहा कि किसी व्यक्ति के अंग दूसरे को नया जीवन दे सकते हैं। उन्होंने डॉक्टरों से आग्रह किया कि वे समाज में अंगदान को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने में अग्रणी भूमिका निभाएँ, क्योंकि उनकी संवेदनशील सलाह कई परिवारों को इस दिशा में प्रेरित कर सकती है।
नई पीढ़ी के डॉक्टरों से अपेक्षाएँ
राजनाथ सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), जीन संपादन और सटीक चिकित्सा जैसी नई तकनीकें चिकित्सा क्षेत्र में तेज़ बदलाव ला रही हैं, इसलिए डॉक्टरों को निरंतर स्वयं को अद्यतन रखना होगा। उन्होंने नवस्नातक विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल डिग्री नहीं, बल्कि चिकित्सा सेवा की गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बन रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि चिकित्सकों को अत्यंत तनावपूर्ण परिस्थितियों में काम करना पड़ता है, लेकिन उन्हें अपने स्वयं के स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। जीवन बचाना सबसे बड़ा धर्म है और इसके लिए संवेदनशीलता, सेवाभाव और दृढ़ संकल्प सबसे आवश्यक हैं।