8 अगस्त 2026
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राजपाल यादव पर शाहजहांपुर में कोठी कब्जे का आरोप, सिटी मजिस्ट्रेट से जांच की मांग

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राजपाल यादव पर शाहजहांपुर में कोठी कब्जे का आरोप, सिटी मजिस्ट्रेट से जांच की मांग

सारांश

राजपाल यादव की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रहीं — चेक बाउंस और बैंक नीलामी नोटिस के बाद अब शाहजहांपुर में कोठी कब्जे का आरोप। विक्रम कुशवाहा का दावा है कि 1982 की वसीयत के आधार पर यह संपत्ति उनकी है, और नगर निकाय रिकॉर्ड में आज भी स्वतंत्रता सेनानी प्रेम कृष्ण खन्ना का नाम दर्ज है।

मुख्य बातें

विक्रम कुशवाहा ने 8 अगस्त को शाहजहांपुर सिटी मजिस्ट्रेट को प्रार्थना पत्र देकर अभिनेता राजपाल यादव पर कोठी कब्जे का आरोप लगाया।
शिकायतकर्ता का दावा है कि संपत्ति स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रेम कृष्ण खन्ना की थी, जो 1982 की वसीयत के आधार पर उनके नाम हुई।
नगर निगम/नगर पालिका रिकॉर्ड में संपत्ति आज भी प्रेम कृष्ण खन्ना के नाम दर्ज होने का दावा।
मामला शाहजहांपुर अदालत से उच्च न्यायालय तक न्यायिक प्रक्रिया में है।
राजपाल यादव पहले से चेक बाउंस मामले में उलझे हैं; सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने उनकी संपत्तियों पर नीलामी नोटिस चस्पा किए हैं।
आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं; राजपाल यादव की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

फिल्म अभिनेता राजपाल यादव की बढ़ती कानूनी मुश्किलों के बीच शाहजहांपुर से एक नया विवाद सामने आया है। विक्रम कुशवाहा नामक एक व्यक्ति ने 8 अगस्त को सिटी मजिस्ट्रेट को प्रार्थना पत्र सौंपकर आरोप लगाया है कि राजपाल यादव ने दबंगई और रसूख के बल पर उनकी कोठी पर कब्जा कर लिया है। शिकायतकर्ता ने संपत्ति को कब्जामुक्त कराने और पूरे मामले की प्रशासनिक जांच की माँग की है।

संपत्ति विवाद की पृष्ठभूमि

विक्रम कुशवाहा के अनुसार, विवादित कोठी मूल रूप से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रेम कृष्ण खन्ना की संपत्ति थी, जिन्होंने यह कोठी राधा रमण सेठ से खरीदी थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि खन्ना की कोई संतान नहीं थी और उन्होंने बचपन से उनकी सेवा की, जिसके चलते खन्ना ने उन्हें गोद लिया था — जिसका एक गोदनामा भी उनके पास मौजूद है।

वर्ष 1982 में प्रेम कृष्ण खन्ना ने वसीयत के माध्यम से अपनी समस्त चल-अचल संपत्ति विक्रम कुशवाहा के नाम कर दी थी। इसी वसीयत के आधार पर वे खुद को संपत्ति का वैध वारिस बता रहे हैं।

दस्तावेज़ी दावे और रिकॉर्ड

विक्रम कुशवाहा का दावा है कि नगर निगम/नगर पालिका के रिकॉर्ड में आज भी वह संपत्ति प्रेम कृष्ण खन्ना के नाम दर्ज है। उन्होंने प्रशासन से संपत्ति से जुड़े पुराने दस्तावेज़, नगर निकाय के अभिलेख और अन्य सरकारी रिकॉर्ड की जांच कराने की माँग की है। शिकायतकर्ता के अनुसार, अन्य दस्तावेज़ों में भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी खन्ना का नाम दर्ज होने का दावा है।

न्यायिक प्रक्रिया और व्यापक कानूनी संदर्भ

यह संपत्ति विवाद केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं है — शिकायतकर्ता के मुताबिक, मामला शाहजहांपुर की अदालत से लेकर उच्च न्यायालय तक न्यायिक प्रक्रिया में है। यह विवाद ऐसे समय उभरा है जब राजपाल यादव पहले से ही चेक बाउंस के एक मामले में उलझे हुए हैं। इसके अतिरिक्त, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की ओर से उनकी कुछ संपत्तियों पर नीलामी संबंधी नोटिस चस्पा किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

राजपाल यादव की प्रतिक्रिया और स्वतंत्र पुष्टि

उल्लेखनीय है कि विक्रम कुशवाहा की ओर से लगाए गए आरोपों की अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। राजपाल यादव की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब प्रशासनिक जांच और अदालत में जारी कार्यवाही के दौरान सामने आने वाले दस्तावेज़ों से संपत्ति के स्वामित्व और कब्जे की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बैंक नीलामी नोटिस और अब कब्जे का आरोप — तीनों एक साथ सक्रिय हैं, जो वित्तीय दबाव की गंभीरता का संकेत देते हैं। हालांकि, आरोप अभी एकपक्षीय हैं और अदालत में स्वामित्व का निर्धारण होना बाकी है; मीडिया को सावधानी बरतनी चाहिए कि शिकायत को दोष-सिद्धि न माना जाए।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजपाल यादव पर शाहजहांपुर में क्या आरोप लगा है?
विक्रम कुशवाहा ने आरोप लगाया है कि राजपाल यादव ने दबंगई के बल पर शाहजहांपुर स्थित उनकी कोठी पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट को प्रार्थना पत्र देकर जांच और संपत्ति मुक्त कराने की माँग की है।
विक्रम कुशवाहा खुद को इस संपत्ति का मालिक क्यों मान रहे हैं?
उनका दावा है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रेम कृष्ण खन्ना ने उन्हें गोद लिया था और 1982 में वसीयत के ज़रिए अपनी समस्त संपत्ति उनके नाम कर दी थी। नगर निकाय के रिकॉर्ड में भी संपत्ति आज भी खन्ना के नाम दर्ज होने का दावा है।
क्या यह मामला अदालत में है?
हाँ, शिकायतकर्ता के अनुसार संपत्ति विवाद शाहजहांपुर की अदालत से लेकर उच्च न्यायालय तक न्यायिक प्रक्रिया में चल रहा है। प्रशासनिक जांच और अदालती कार्यवाही से स्वामित्व की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
राजपाल यादव की अन्य कानूनी मुश्किलें क्या हैं?
राजपाल यादव पहले से एक चेक बाउंस मामले में उलझे हुए हैं। इसके अलावा, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की ओर से उनकी कुछ संपत्तियों पर नीलामी संबंधी नोटिस चस्पा किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
क्या राजपाल यादव ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक राजपाल यादव की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विक्रम कुशवाहा के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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