राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: अदालत में 7,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल, 173 गवाह, 105 घटनाएँ चिह्नित
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बहुचर्चित मामले में 23 सितंबर 2026 को अदालत में करीब 7,000 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की गई। विशेष जांच दल (SIT) की इस अंतिम रिपोर्ट में जांच के दौरान 173 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण के आधार पर काउंटिंग रूम से कथित तौर पर नकदी निकालने या छिपाने की 105 घटनाओं की पहचान की गई।
चार्जशीट में क्या है
जांच में सीसीटीवी फुटेज के साथ-साथ फॉरेंसिक ऑडिट, वित्तीय रिकॉर्ड, बरामदगी और गवाहों के बयानों को आधार बनाया गया है। चार्जशीट में ₹79.85 लाख नकद, एक कार और आभूषणों की बरामदगी का उल्लेख है। यह चार्जशीट उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को दी गई उस प्रतिबद्धता के अनुरूप दाखिल की गई, जिसमें 25 सितंबर से पहले रिपोर्ट सौंपने का वादा किया गया था — यही वह तिथि है जब जांच के लिए निर्धारित 90 दिनों की समय-सीमा समाप्त हो रही थी।
चंपत राय और अनिल मिश्रा की भूमिका
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा को इस मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है। SIT की अंतिम रिपोर्ट में दोनों को गवाह के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। इनके अलावा गोपाल राव और कृष्ण मोहन को भी गवाह बनाया गया है और ये सभी अब अदालत में अपनी गवाही देंगे।
अदालत परिसर में विवाद
चार्जशीट दाखिल होने के तुरंत बाद अदालत परिसर में विवाद उत्पन्न हो गया। स्थानीय वकीलों ने इस पर आपत्ति जताई और मांग की कि अदालत के संज्ञान लेने से पूर्व उनकी आपत्तियाँ सुनी जाएँ। वकील कथित तौर पर इस बात से भी नाराज थे कि ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रमुख लोगों — जिनमें चंपत राय शामिल हैं — को आरोपी नहीं बनाया गया। बाद में जिला न्यायाधीश से बातचीत के उपरांत वकीलों ने कामकाज फिर से शुरू कर दिया।
सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी
गौरतलब है कि इस पूरे प्रकरण पर सर्वोच्च न्यायालय की निगाह रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने शीर्ष अदालत को जांच की प्रगति से अवगत कराया था और 25 सितंबर 2026 से पहले चार्जशीट दाखिल करने का आश्वासन दिया था। समय-सीमा से पहले चार्जशीट दाखिल होना इस दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि यह न्यायालय की निर्धारित समय-सीमा का अनुपालन दर्शाता है।
आगे क्या होगा
अब अदालत चार्जशीट पर संज्ञान लेने के बाद आरोप तय करने की प्रक्रिया शुरू करेगी। 173 गवाहों की गवाही इस मामले की सुनवाई का केंद्र बिंदु होगी। मामले की संवेदनशीलता और सार्वजनिक हित को देखते हुए आने वाली सुनवाइयाँ व्यापक ध्यान आकर्षित करेंगी।