राम मंदिर ट्रस्ट के फैसले सर्वमान्य, केसरिया वस्त्र सभी सेवकों के लिए अनिवार्य: दिनेन्द्र दास
सारांश
मुख्य बातें
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य दिनेन्द्र दास ने 1 अक्टूबर 2026 को अयोध्या में स्पष्ट किया कि ट्रस्ट द्वारा लिए गए समस्त निर्णयों को रामलला से जुड़े सभी पक्षों की सहमति प्राप्त है। उन्होंने यह भी बताया कि मंदिर में चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मचारियों सहित सभी सेवकों के लिए केसरिया रंग के परंपरागत वस्त्र पहनना अनिवार्य होगा।
ट्रस्ट के निर्णयों पर सर्वसम्मति
दिनेन्द्र दास ने कहा, 'ट्रस्ट जो भी फैसला लेगा, वह रामलला से जुड़े सभी लोगों को मंजूर होगा। रामलला के समय से चली आ रही परंपरा को बनाए रखना सही है। सभी संतुष्ट हैं और वे उसी के अनुसार काम करेंगे।' उनके इस बयान को मंदिर प्रशासन की आंतरिक एकता और अनुशासन की पुष्टि के रूप में देखा जा रहा है।
केसरिया वेशभूषा का नियम
ट्रस्ट सदस्य ने विशेष रूप से मंदिर में पूजा-अर्चना और दैनिक अनुष्ठानों में शामिल पुजारियों व अन्य सेवकों की वेशभूषा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक केसरिया वस्त्रों का पालन न केवल पुजारियों, बल्कि दान-प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों के लिए भी बाध्यकारी होगा। जब उनसे पूछा गया कि गणना कार्य करने वाले कर्मियों की वेशभूषा कैसी होगी, तो उन्होंने स्पष्ट किया, 'उसी ढंग से उन लोगों को बुलाया जाएगा। जिस ढंग से पुजारी लोग वस्त्र पहनते हैं, उसी तरह वे भी नजर आएंगे।'
पारदर्शिता के लिए बायोडाटा प्रक्रिया
ट्रस्ट द्वारा कर्मचारियों से बायोडाटा मांगे जाने की प्रक्रिया पर दास ने बताया कि यह व्यवस्था पहले से लागू थी और इसे जारी रखा जाएगा। उन्होंने कहा, 'इससे यह पता चलता रहेगा कि कौन कहां से आ रहा है और हमेशा पारदर्शिता बनी रहेगी।' यह कदम मंदिर प्रशासन में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
समग्र व्यवस्था पर संतोष
मंदिर की अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं और दान-प्रबंधन को लेकर दिनेन्द्र दास ने संतोष जताया। उन्होंने कहा, 'रामलला के यहां पूजा-पाठ सही ढंग से चल रहा है तो अपने आप सब ठीक हो जाएगा, सब ठीक ही रहेगा।' गौरतलब है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट लगातार मंदिर की शताब्दी पुरानी परंपराओं को संरक्षित करने और प्रशासनिक ढाँचे को अधिक पारदर्शी बनाने पर कार्यरत है।
आगे की राह
ट्रस्ट के इस रुख से स्पष्ट होता है कि अयोध्या में राम मंदिर की दैनिक व्यवस्थाओं को एक समन्वित और मानकीकृत ढाँचे के अंतर्गत संचालित करने की दिशा में कदम आगे बढ़ रहे हैं। वेशभूषा से लेकर कर्मचारी चयन तक की प्रक्रियाएँ अब अधिक संस्थागत रूप लेती दिख रही हैं।