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राम मंदिर ड्रेस कोड: पुजारियों को पीले वस्त्र, जेबें नहीं — BJP ने सराहा, विपक्ष ने उठाए चढ़ावा चोरी के सवाल

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राम मंदिर ड्रेस कोड: पुजारियों को पीले वस्त्र, जेबें नहीं — BJP ने सराहा, विपक्ष ने उठाए चढ़ावा चोरी के सवाल

सारांश

अयोध्या के राम मंदिर में पुजारियों के लिए पीले वस्त्र और जेबविहीन परिधान का प्रस्ताव सामने आया है। BJP ने इसे अनुशासन और पवित्रता का कदम बताया, जबकि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने सवाल उठाया कि असली मुद्दा जेब नहीं, चढ़ावे की पारदर्शिता है।

मुख्य बातें

अयोध्या राम मंदिर में पुजारियों और कर्मचारियों के लिए पीले (पीत) रंग के वस्त्र अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा गया है।
चढ़ावा चोरी रोकने के लिए कर्मचारियों की वर्दी में जेब न रखने का प्रावधान प्रस्तावित।
भाजपा नेता अशोक वाजपेयी , सांसद प्रवीण खंडेलवाल और मंत्री अनिल राजभर ने प्रस्ताव का समर्थन किया।
समाजवादी पार्टी के आशुतोष वर्मा ने चंपत राय पर चढ़ावा चोरी का आरोप लगाते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा।
कांग्रेस नेता आसिम वकार ने कहा कि जेब हटाने से नहीं, जवाबदेही से चोरी रुकेगी।
प्रस्ताव अभी अंतिम रूप लेना बाकी है; श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का अंतिम निर्णय प्रतीक्षित।

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में पुजारियों और कर्मचारियों के लिए एक विशेष ड्रेस कोड लागू करने का प्रस्ताव सामने आया है, जिसमें सभी पुजारियों और अर्चकों को प्रतिदिन पीले (पीत) रंग के वस्त्र धारण करना अनिवार्य होगा। 24 सितंबर 2026 को सार्वजनिक हुए इस प्रस्ताव की सबसे चर्चित विशेषता यह है कि चढ़ावा चोरी जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से कर्मचारियों के परिधानों में जेब न रखने का प्रावधान भी शामिल किया गया है। इस प्रस्ताव ने राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छेड़ दी है, जहाँ सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएँ दी हैं।

ड्रेस कोड में क्या है प्रस्ताव

प्रस्ताव के अनुसार मंदिर परिसर में कार्यरत सभी पुजारियों और अर्चकों को पीले रंग के वस्त्र पहनना होगा, ताकि आगंतुक उन्हें आसानी से पहचान सकें। इसके अतिरिक्त, कर्मचारियों की वर्दी में किसी प्रकार की जेब न रखने का नियम प्रस्तावित है — यह कदम कथित तौर पर चढ़ावे की राशि और सामग्री की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुझाया गया है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार अन्य कई नियम भी इस प्रस्ताव का हिस्सा हैं, जिनका विवरण अभी सार्वजनिक किया जाना बाकी है।

सत्तापक्ष की प्रतिक्रिया

भाजपा नेता अशोक वाजपेयी ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा, 'यह अच्छी बात है कि कम से कम वहाँ मंदिर के अंदर जो कर्मचारी होंगे, उनका ड्रेस कोड होना चाहिए। ताकि यह मालूम हो सके कि ये मंदिर के कर्मचारी हैं। साथ ही, उनकी पवित्रता भी इससे सुरक्षित रहेगी।'

भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि राम मंदिर में व्यवस्थाएँ देखने का काम वहाँ के न्यास द्वारा किया जाता है। उन्होंने कहा, 'भगवान राम के अच्छे से दर्शन हो जाएँ, उसके लिए जो भी नियम बनाए जाते हैं, हम सबको उसका पालन करना चाहिए।' उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने भी समर्थन जताते हुए कहा, 'यह उनका अधिकार है। अगर वे ड्रेस कोड लागू कर रहे हैं तो इससे किसी को क्या दिक्कत हो सकती है।'

विपक्ष के तीखे सवाल

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने तंज कसते हुए कहा, 'जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का सीईओ बनाया गया है। अब चाहे उन्हें धोती-कुर्ता पहनाएं या कुछ और, बस रामधन की चोरी न हो। चंपत राय जैसे लोग चढ़ावा चोरी कर शान से घूम रहे हैं। ऐसे में भाजपा सरकार को शर्म आनी चाहिए।'

कांग्रेस नेता आसिम वकार ने कहा, 'ऊपर की जेब हटा दी जाए तो क्या हुआ? मन में चोर हो तो लोग कैसे भी चोरी कर सकते हैं। भाजपा ने चढ़ावा चोरी के आरोपियों को छोड़कर साबित कर दिया है कि चोर अभी भी बचे हैं।' दोनों विपक्षी दलों के बयानों में मुख्य धारा एक ही है — ड्रेस कोड से अधिक जरूरी है चढ़ावे की पारदर्शी निगरानी।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के प्रयासों में जुटा है। गौरतलब है कि देश के कई बड़े मंदिरों — जैसे तिरुपति और शिरडी साईंबाबा मंदिर — में भी पुजारियों और कर्मचारियों के लिए निर्धारित वर्दी और आचार संहिता लागू है। अयोध्या का यह प्रस्ताव उसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है, हालाँकि इसकी राजनीतिक पृष्ठभूमि इसे चर्चा का केंद्र बना रही है।

आगे क्या होगा

फिलहाल यह प्रस्ताव के स्तर पर है और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा इसे अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। ट्रस्ट के निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नए नियम कब से और किस रूप में लागू होंगे। राजनीतिक बहस के बीच आम श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया और जमीनी क्रियान्वयन की चुनौतियाँ भी इस प्रस्ताव की सफलता तय करेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन देश के कई प्रमुख मंदिरों में ऑडिट और डिजिटल ट्रैकिंग जैसे ठोस उपायों के बिना ऐसे नियम कागजी रह जाते हैं। विपक्ष का चढ़ावा चोरी पर जोर देना राजनीतिक भी है, लेकिन सवाल वैध है — मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी ट्रस्ट से बचकर नहीं जाती। अयोध्या मंदिर, जो राष्ट्रीय आस्था और राजनीति दोनों का केंद्र बन चुका है, को एक मजबूत और स्वतंत्र ऑडिट व्यवस्था की दरकार है — जो अभी तक सार्वजनिक रूप से स्थापित नहीं हुई है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अयोध्या राम मंदिर ड्रेस कोड में क्या नियम प्रस्तावित हैं?
प्रस्ताव के अनुसार सभी पुजारियों और अर्चकों को प्रतिदिन पीले (पीत) रंग के वस्त्र पहनने होंगे। इसके अलावा चढ़ावा चोरी रोकने के लिए कर्मचारियों की वर्दी में जेब न रखने का प्रावधान भी शामिल किया गया है।
राम मंदिर ड्रेस कोड प्रस्ताव पर BJP का क्या रुख है?
भाजपा नेता अशोक वाजपेयी, सांसद प्रवीण खंडेलवाल और उत्तर प्रदेश के मंत्री अनिल राजभर ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। उनका कहना है कि ड्रेस कोड से मंदिर कर्मचारियों की पहचान स्पष्ट होगी और पवित्रता बनी रहेगी।
विपक्ष ने राम मंदिर ड्रेस कोड पर क्या आपत्ति जताई है?
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने चढ़ावा चोरी के आरोपों का हवाला देते हुए कहा कि असली मुद्दा रामधन की सुरक्षा है। कांग्रेस नेता आसिम वकार ने कहा कि जेब हटाने से नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने से चोरी रुकेगी।
राम मंदिर ड्रेस कोड कब से लागू होगा?
यह अभी प्रस्ताव के स्तर पर है और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है। लागू होने की तिथि अभी घोषित नहीं की गई है।
क्या अन्य बड़े मंदिरों में भी इस तरह के ड्रेस कोड लागू हैं?
हाँ, तिरुपति बालाजी और शिरडी साईंबाबा जैसे प्रमुख मंदिरों में पुजारियों और कर्मचारियों के लिए निर्धारित वर्दी और आचार संहिता पहले से लागू है। अयोध्या का यह प्रस्ताव उसी परंपरा के अनुरूप माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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