21 जुलाई 2026
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रांची डीजे हत्याकांड: मुख्य आरोपी अभिषेक सिंह समेत 10 दोषी करार, 21 जुलाई को सजा पर फैसला

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रांची डीजे हत्याकांड: मुख्य आरोपी अभिषेक सिंह समेत 10 दोषी करार, 21 जुलाई को सजा पर फैसला

सारांश

रांची सिविल कोर्ट ने एक्सट्रीम बार डीजे हत्याकांड में मुख्य आरोपी अभिषेक सिंह उर्फ विक्की सहित 10 आरोपियों को दोषी ठहराया। 26 मई 2024 की रात हुई इस वारदात में सीसीटीवी साक्ष्य निर्णायक रहे। अब 21 जुलाई को सजा पर सुनवाई होगी।

मुख्य बातें

रांची सिविल कोर्ट के अपर न्याययुक्त शैलेंद्र कुमार ने 20 जुलाई को 10 आरोपियों को दोषी करार दिया।
मुख्य आरोपी अभिषेक सिंह उर्फ विक्की ने 26 मई 2024 की रात राइफल से डीजे संदीप प्रमाणिक की हत्या की थी।
दोषियों में मुख्य आरोपी के पिता अशोक कुमार सिंह सहित 9 अन्य आरोपी शामिल हैं।
पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई, जो अभियोजन का मुख्य साक्ष्य बनी।
सजा पर अगली सुनवाई 21 जुलाई को निर्धारित की गई है।

रांची सिविल कोर्ट ने 20 जुलाई 2026 को एक्सट्रीम बार के डीजे संदीप प्रमाणिक हत्याकांड में मुख्य आरोपी अभिषेक सिंह उर्फ विक्की सहित 10 आरोपियों को दोषी ठहराया। अपर न्याययुक्त शैलेंद्र कुमार की अदालत ने यह निर्णय सोमवार को सुनाया और सजा के बिंदुओं पर अगली सुनवाई 21 जुलाई को निर्धारित की है।

मुख्य घटनाक्रम

यह सनसनीखेज वारदात 26 मई 2024 की देर रात रांची के एक्सट्रीम बार में हुई थी। बार बंद होने के समय चार-पाँच युवक वहाँ पहुँचे और बार कर्मचारियों से तीखी बहस के बाद मारपीट हो गई। इसके बाद मुख्य आरोपी अभिषेक सिंह सेल सिटी स्थित अपने किराए के फ्लैट से एक राइफल उठाकर बार में वापस लौटा और डीजे संदीप प्रमाणिक की छाती में बेहद करीब से गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।

संदीप प्रमाणिक मूल रूप से पश्चिम बंगाल के निवासी थे और एक्सट्रीम बार में डीजे के रूप में कार्यरत थे। वारदात के बाद आरोपी ने बार के पार्किंग क्षेत्र में भी कई राउंड फायरिंग की और अपनी कार से फरार हो गया।

दोषी ठहराए गए आरोपी

अदालत ने जिन 10 आरोपियों को दोषी करार दिया, उनमें मुख्य आरोपी के पिता अशोक कुमार सिंह, मोहम्मद शामिरुद्दीन, प्रतीक, मृत्युंजय कुमार, प्रकाश कुमार, दिवाकर उपाध्याय, आलोक दीवा, पंकज कुमार और सुमित कुमार शामिल हैं। गौरतलब है कि पुलिस ने शुरुआती जाँच में कुल 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

जाँच और साक्ष्य

हत्या की पूरी वारदात बार में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई थी, जो अभियोजन पक्ष का सबसे मज़बूत साक्ष्य बनी। घटना की सूचना मिलते ही रांची के एसएसपी और सिटी डीएसपी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे और वैज्ञानिक जाँच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज और पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा।

आगे क्या होगा

अदालत अब 21 जुलाई को सजा के बिंदुओं पर सुनवाई करेगी, जिसमें यह तय होगा कि दोषियों को किस धारा के तहत कितनी सज़ा दी जाए। यह मामला रांची में बार संस्कृति से जुड़ी हिंसा और त्वरित न्याय प्रक्रिया की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह मामला रांची जैसे शहरों में रात्रिकालीन मनोरंजन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को भी उजागर करता है। 14 में से केवल 10 को दोषी ठहराया जाना यह सवाल उठाता है कि शेष चार आरोपियों के मामले में अभियोजन पक्ष कहाँ चूका। 21 जुलाई को सुनाई जाने वाली सजा यह तय करेगी कि न्याय व्यवस्था इस तरह की सुनियोजित हिंसा को कितनी गंभीरता से लेती है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रांची डीजे हत्याकांड क्या है?
यह रांची के एक्सट्रीम बार में 26 मई 2024 की रात हुई वह घटना है, जिसमें मुख्य आरोपी अभिषेक सिंह उर्फ विक्की ने राइफल से डीजे संदीप प्रमाणिक की छाती में गोली मारकर हत्या कर दी थी। संदीप पश्चिम बंगाल के मूल निवासी थे और उस बार में कार्यरत थे।
अदालत ने किन-किन आरोपियों को दोषी ठहराया?
रांची सिविल कोर्ट ने मुख्य आरोपी अभिषेक सिंह उर्फ विक्की, उनके पिता अशोक कुमार सिंह, मोहम्मद शामिरुद्दीन, प्रतीक, मृत्युंजय कुमार, प्रकाश कुमार, दिवाकर उपाध्याय, आलोक दीवा, पंकज कुमार और सुमित कुमार — कुल 10 आरोपियों को दोषी ठहराया।
सजा का फैसला कब सुनाया जाएगा?
अदालत ने सजा के बिंदुओं पर सुनवाई 21 जुलाई को निर्धारित की है। इसी दिन तय होगा कि दोषियों को किस धारा के तहत कितनी सज़ा दी जाएगी।
इस मामले में पुलिस ने क्या कार्रवाई की थी?
घटना के बाद रांची के एसएसपी और सिटी डीएसपी मौके पर पहुँचे और वैज्ञानिक जाँच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने कुल 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
इस मामले में सीसीटीवी साक्ष्य कितना महत्त्वपूर्ण रहा?
हत्या की पूरी वारदात बार के सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई थी, जो अभियोजन पक्ष का निर्णायक साक्ष्य बनी। इसी फुटेज के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और अदालत में दोषसिद्धि संभव हुई।
राष्ट्र प्रेस
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