28 अगस्त 2026
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बच्चों संग मनाया रक्षाबंधन, बोलीं — 'राखी का धागा भाई-बहन से परे, प्रकृति से भी जोड़ता है'

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बच्चों संग मनाया रक्षाबंधन, बोलीं — 'राखी का धागा भाई-बहन से परे, प्रकृति से भी जोड़ता है'

सारांश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रक्षाबंधन को सिर्फ भाई-बहन का नहीं, बल्कि इंसान और प्रकृति के बीच प्रेम के बंधन का प्रतीक बताया। राष्ट्रपति भवन में बच्चों के साथ मनाए इस पर्व में उनका संदेश — 'पेड़ों पर भी राखी बाँधो' — परंपरा को पर्यावरण चेतना से जोड़ता है।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 28 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में बच्चों के साथ रक्षाबंधन मनाया।
उन्होंने कहा कि राखी का धागा परिवार, दोस्तों और पेड़ों पर भी बाँधा जा सकता है — यह प्रेम और देखभाल का प्रतीक है।
राष्ट्रपति ने बच्चों से पर्यावरण संरक्षण और पेड़-पौधों की देखभाल का आग्रह किया।
उन्होंने प्राचीन मंत्र 'रक्षै, मा चल, मा चल' का उल्लेख करते हुए रक्षाबंधन की सांस्कृतिक जड़ों को रेखांकित किया।
राष्ट्रपति ने नागरिकों से विकसित भारत के निर्माण और देश की रक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 28 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र, नई दिल्ली में विभिन्न स्कूलों और संगठनों के बच्चों के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया। इस विशेष समारोह में उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन का महत्व केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं है — यह प्रेम, देखभाल और उत्तरदायित्व का वह सूत्र है जो परिवार, मित्रों और प्रकृति को भी एकजुट करता है।

समारोह का विवरण

राष्ट्रपति मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों के साथ रक्षाबंधन की झलकियाँ साझा कीं। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'रक्षाबंधन का महत्व भाई-बहन के रिश्ते से कहीं बढ़कर है। राखी का पवित्र धागा परिवार के सदस्यों, दोस्तों और यहाँ तक कि पेड़ों पर भी बाँधा जा सकता है, जो प्यार और देखभाल के बंधन का प्रतीक है।'

पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए राष्ट्रपति ने बच्चों से पेड़-पौधों की देखभाल करने का भी आग्रह किया — यह संदेश उनकी पर्यावरण-चेतना की पहचान बन चुका है।

राष्ट्रपति का राष्ट्रीय संदेश

समारोह से पूर्व राष्ट्रपति मुर्मु ने समस्त देशवासियों के नाम एक संदेश जारी किया। उन्होंने कहा, 'रक्षा-बंधन की पावन परंपरा, प्राचीन काल से, हमारी उपासना और संस्कृति का अंग रही है। श्रद्धापूर्वक हाथ पर बाँधे गए धागे को, रक्षा हेतु पवित्र सूत्र-बंधन, यानी रक्षा-बंधन माना गया है। अनेक श्लोकों और मंत्रों में, 'रक्षै, मा चल, मा चल' इन शब्दों में अनुरोध किया जाता है कि 'हे रक्षा रूपी बंधन, तुम सदैव अचल रहो।''

उन्होंने यह भी कहा, 'समय के साथ, रक्षा-बंधन, बहन की रक्षा के लिए भाई के हाथ पर राखी बाँधने के भावपूर्ण सामाजिक पर्व के रूप में लोकप्रिय हुआ। यह पर्व भाई-बहनों, मित्रों तथा परिवार और समाज के विभिन्न सदस्यों के बीच आत्मीयता, सम्मान और एक-दूसरे के प्रति उत्तरदायित्व के भाव को सुदृढ़ करता है।'

सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ

राष्ट्रपति ने रेखांकित किया कि यह पर्व हमें स्मरण कराता है कि जीवन के हर रिश्ते की नींव विश्वास, संवेदनशीलता और परस्पर सहयोग पर टिकी होती है। गौरतलब है कि राष्ट्रपति मुर्मु ने इससे पहले भी आदिवासी और सांस्कृतिक परंपराओं को राष्ट्रीय मंच पर उजागर करने की पहल की है — रक्षाबंधन को प्रकृति से जोड़ने का यह संदेश उसी कड़ी का विस्तार है।

यह ऐसे समय में आया है जब देश में पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण अभियानों को जन-आंदोलन का रूप देने की कोशिशें तेज़ हो रही हैं।

राष्ट्र-निर्माण का आह्वान

राष्ट्रपति मुर्मु ने नागरिकों से आह्वान किया कि रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर समाज और देश की रक्षा का संकल्प लें और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ते रहें। उनका यह संदेश पर्व को व्यक्तिगत रिश्तों से उठाकर राष्ट्रीय कर्तव्यबोध से जोड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी गहराई में एक सुविचारित सांस्कृतिक पुनर्कथन है — आदिवासी परंपराओं में प्रकृति-पूजा और रक्षा-बंधन का यह संयोजन उनकी अपनी पहचान से जुड़ा है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी वृक्षारोपण अभियानों की विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहे हैं। राष्ट्रपति के पद की प्रतीकात्मक शक्ति का उपयोग पर्यावरण संदेश के लिए करना प्रभावशाली है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि यह भावना नीतिगत कार्रवाई में कितनी तब्दील होती है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रक्षाबंधन कहाँ और किसके साथ मनाया?
राष्ट्रपति मुर्मु ने 28 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र, नई दिल्ली में विभिन्न स्कूलों और संगठनों के बच्चों के साथ रक्षाबंधन मनाया। यह एक विशेष समारोह था जिसमें पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।
राष्ट्रपति मुर्मु ने राखी के बारे में क्या संदेश दिया?
उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन का महत्व भाई-बहन के रिश्ते से कहीं बढ़कर है। राखी का पवित्र धागा परिवार, दोस्तों और यहाँ तक कि पेड़ों पर भी बाँधा जा सकता है, जो प्यार और देखभाल के बंधन का प्रतीक है।
रक्षाबंधन पर राष्ट्रपति ने पर्यावरण का ज़िक्र क्यों किया?
राष्ट्रपति मुर्मु ने बच्चों से पेड़-पौधों की देखभाल का आग्रह किया और राखी को प्रकृति से जोड़ा। यह उनकी आदिवासी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
रक्षाबंधन की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जड़ें क्या हैं?
राष्ट्रपति मुर्मु के अनुसार, रक्षा-बंधन की परंपरा प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति का हिस्सा रही है। प्राचीन मंत्रों में 'रक्षै, मा चल, मा चल' — अर्थात 'हे रक्षा रूपी बंधन, तुम सदैव अचल रहो' — का उल्लेख मिलता है।
राष्ट्रपति ने रक्षाबंधन पर देशवासियों से क्या संकल्प लेने को कहा?
राष्ट्रपति मुर्मु ने आह्वान किया कि नागरिक इस पर्व पर समाज और देश की रक्षा का संकल्प लें और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ते रहें।
राष्ट्र प्रेस
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