राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बेंगलुरु से नई दिल्ली रवाना, राज्यपाल गहलोत और सीएम शिवकुमार ने HAL एयरपोर्ट पर दी विदाई
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बुधवार, 1 जुलाई को बेंगलुरु के HAL एयरपोर्ट से भारतीय वायुसेना के विशेष विमान द्वारा नई दिल्ली के लिए रवाना हुईं। उनकी विदाई के अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार एयरपोर्ट पर उपस्थित रहे।
दौरे का पृष्ठभूमि
राष्ट्रपति मुर्मू इससे पहले आंध्र प्रदेश के विजयनगरम (विशाखापत्तनम के समीप) में केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुई थीं। इस ऐतिहासिक समारोह के बाद वे बेंगलुरु पहुँचीं और वहाँ से नई दिल्ली के लिए उड़ान भरी। यह विश्वविद्यालय का पहला दीक्षांत समारोह था, जो जनजातीय शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति का संदेश
विजयनगरम में आयोजित दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति मुर्मू ने छात्रों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से समाज और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आग्रह किया। गौरतलब है कि राष्ट्रपति मुर्मू स्वयं आदिवासी समुदाय से आती हैं, जिससे उनका यह संदेश विशेष रूप से प्रासंगिक और प्रेरणादायक रहा।
HAL एयरपोर्ट पर विदाई समारोह
HAL एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति को विदाई देने के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक और सैन्य अधिकारियों की उपस्थिति रही। इनमें कर्नाटक के परिवहन मंत्री भैरती सुरेश, राज्य के पुलिस महानिदेशक डॉ. एमए सलीम, एयर वाइस मार्शल डीएस डांगी, मेजर जनरल मोहित महेंद्रू, बेंगलुरु पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह और बेंगलुरु के उपायुक्त कांताराजू पी.एस. शामिल थे। सभी औपचारिकताएँ पूर्ण होने के बाद राष्ट्रपति विशेष वायुसेना विमान से नई दिल्ली रवाना हुईं।
सीएम शिवकुमार की एक्स पर पोस्ट
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राष्ट्रपति को विदाई देने की जानकारी साझा की। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि उन्होंने राज्यपाल थावरचंद गहलोत के साथ मिलकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सम्मानपूर्वक और गर्मजोशी के साथ विदाई दी।
सुरक्षा व्यवस्था
राष्ट्रपति की यात्रा और विदाई के दौरान HAL एयरपोर्ट पर सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे। वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में सभी प्रोटोकॉल का पालन किया गया। राष्ट्रपति मुर्मू का यह दौरा आंध्र प्रदेश और कर्नाटक — दोनों राज्यों के साथ संवैधानिक शिष्टाचार की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण रहा।