आरजीपीवी से राजीव गांधी का नाम हटाना भाजपा की ओछी मानसिकता: कमलनाथ का मोहन सरकार पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 2 सितंबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की मोहन सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) के विभाजन और उसके नाम से स्व. पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम हटाए जाने को भाजपा की 'ओछी मानसिकता' का प्रतीक बताया। भोपाल स्थित इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय को तीन क्षेत्रीय इकाइयों में बाँटने का निर्णय मोहन कैबिनेट की बैठक में लिया गया था।
मोहन कैबिनेट का फैसला: तीन नए विश्वविद्यालय
मोहन कैबिनेट की बैठक में राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का पुनर्गठन कर भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में तीन नए प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया। इन तीनों विश्वविद्यालयों का नामकरण क्षेत्रीय आधार पर किया गया है, जिसके चलते मूल संस्था के नाम से राजीव गांधी का नाम स्वतः हट गया।
राज्य सरकार ने इस कदम को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में क्षेत्रीय संतुलन और गुणवत्ता विस्तार की दिशा में 'ऐतिहासिक कदम' बताया है। सरकार का तर्क है कि विकेंद्रीकरण से सुदूर क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर तकनीकी शिक्षा सुलभ होगी।
कमलनाथ की कड़ी प्रतिक्रिया
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि आरजीपीवी को तीन हिस्सों में बाँटकर उसके नाम से स्व. पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम हटाना भाजपा सरकार की ओछी मानसिकता का प्रतीक है।
उन्होंने राजीव गांधी की विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि 'सारा संसार इस बात का गवाह है कि स्व. राजीव गांधी के कार्यकाल में देश ने आधुनिक तकनीक की दुनिया में प्रवेश किया था। सूचना क्रांति और कंप्यूटर के युग का सूत्रपात भी राजीव गांधी ने किया था।'
भाजपा पर 'नाम बदलने की राजनीति' का आरोप
कमलनाथ ने भाजपा पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि 'भाजपा खुद तो कोई नया काम कर नहीं पाती, बस कांग्रेस के जमाने के कार्यों की नाम पट्टिकाएं बदलने में लगी रहती है।' उन्होंने भाजपा सरकार को 'नाकारा और शिक्षा विरोधी' बताते हुए माँग की कि विश्वविद्यालय से राजीव गांधी का नाम न हटाया जाए।
गौरतलब है कि नाम परिवर्तन की यह राजनीति मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है — देश के कई राज्यों में कांग्रेस के नेताओं के नाम पर रखी गई संस्थाओं और सड़कों के नाम बदले जाने को लेकर विवाद उठते रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भाजपा और कांग्रेस के बीच विरासत की राजनीति तेज़ हो रही है।
कमलनाथ की चेतावनी
पूर्व मुख्यमंत्री ने चेतावनी भरे अंदाज़ में कहा, 'यह भी याद दिलाना चाहता हूँ कि कल के बाद परसों आता है। अच्छे और बुरे हर काम का हिसाब होता है। हम भी हिसाब करेंगे। आप नाम बदलकर इतिहास नहीं बदल सकते।'
आलोचकों का कहना है कि इस विवाद ने राज्य में शिक्षा सुधार की बहस को राजनीतिक रंग दे दिया है, जबकि असली सवाल तीन नए विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता और संसाधन आवंटन को लेकर होने चाहिए थे। आने वाले दिनों में कांग्रेस इस मुद्दे को और आगे बढ़ा सकती है।