9 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आरआरयू और पश्चिम बंगाल पुलिस के बीच एमओयू: आंतरिक सुरक्षा प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को मिलेगी नई दिशा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आरआरयू और पश्चिम बंगाल पुलिस के बीच एमओयू: आंतरिक सुरक्षा प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को मिलेगी नई दिशा

सारांश

राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय और पश्चिम बंगाल पुलिस के बीच हुआ यह एमओयू महज एक औपचारिकता नहीं — यह देश के 27 राज्यों तक फैले आरआरयू के पुलिस-सहयोग नेटवर्क की अगली कड़ी है। आतंकवाद, साइबर खतरों और आपदा प्रबंधन जैसे अग्रिम मोर्चों पर संस्थागत प्रशिक्षण की यह पहल 'विकसित भारत 2047' के सुरक्षा ढाँचे को ज़मीनी आकार देने की कोशिश है।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) और पश्चिम बंगाल पुलिस ने 18 जून 2026 को कोलकाता में एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
समझौते में आतंकवाद निरोधक रणनीति , साइबर अपराध , आपदा प्रबंधन और जाँच प्रक्रिया पर विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल शामिल हैं।
आरआरयू देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस इकाइयों के साथ सहयोग स्थापित कर चुका है और 60 से अधिक शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित करता है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और डीजीपी सिद्ध नाथ गुप्ता की उपस्थिति में समझौते को औपचारिक रूप दिया गया।
यह पहल 'मिशन कर्मयोगी' और 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय विज़न से जुड़ी है।

राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) और पश्चिम बंगाल पुलिस ने 18 जून 2026 को कोलकाता में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में पेशेवर प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और परिचालन दक्षता को सुदृढ़ करना है। यह साझेदारी बदलती सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनज़र पुलिसकर्मियों के कौशल उन्नयन और पुनः कौशल विकास के लिए संस्थागत ढाँचा तैयार करेगी।

समझौते का औपचारिक आयोजन

कोलकाता में आयोजित इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, आरआरयू के प्रो-वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) कल्पेश वांद्रा, आरआरयू की डीन (अकादमिक) डॉ. जसबीर कौर ठडानी और पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सिद्ध नाथ गुप्ता की गरिमामयी उपस्थिति में इस समझौते को औपचारिक रूप दिया गया। पुलिस विभाग और विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि पुलिस व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए निरंतर पेशेवर विकास और संस्थागत सहयोग बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आंतरिक सुरक्षा खतरों की बदलती प्रकृति को देखते हुए क्षमता निर्माण के लिए एक सुव्यवस्थित और दूरदर्शी रणनीति अपनाने की जरूरत है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस साझेदारी से पुलिसकर्मियों को उन्नत शैक्षणिक संसाधनों, विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल और संस्थागत ढाँचे का लाभ मिलेगा, तथा तकनीक आधारित पुलिसिंग को बढ़ावा देकर कार्यकुशलता, जवाबदेही और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार होगा।

आरआरयू की भूमिका और विस्तार

प्रो. (डॉ.) कल्पेश वांद्रा ने बताया कि राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में आरआरयू पुलिसिंग, आंतरिक सुरक्षा और आपराधिक न्याय व्यवस्था के क्षेत्र में कार्यरत है और अब तक देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस इकाइयों के साथ सहयोग स्थापित कर चुका है। उन्होंने विश्वविद्यालय के ट्री+सीआई फ्रेमवर्क (प्रशिक्षण, अनुसंधान, शिक्षा, विस्तार, परामर्श और नवाचार) का उल्लेख करते हुए इसे संस्था की शैक्षणिक और पेशेवर गतिविधियों की आधारशिला बताया।

गौरतलब है कि आरआरयू देशभर में 11 विशेष स्कूलों और 8 परिसरों के माध्यम से डिप्लोमा, स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी सहित 60 से अधिक शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित करता है। ये कार्यक्रम आधुनिक पुलिसिंग की बहुआयामी जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।

प्रशिक्षण के प्रमुख क्षेत्र

एमओयू के अंतर्गत दोनों संस्थान संयुक्त रूप से पुलिस की परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप क्षमता निर्माण कार्यक्रम तैयार करेंगे और उनका संचालन करेंगे। प्रशिक्षण में शामिल विषयों में आतंकवाद निरोधक रणनीति, साइबर अपराध और साइबर खतरों से निपटना, आपदा प्रबंधन, जाँच प्रक्रिया और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रमुख हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में साइबर अपराध और संगठित अपराध की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है।

इसके अतिरिक्त, दोनों संस्थान ज्ञान के आदान-प्रदान, संयुक्त शोध परियोजनाओं और नीतिगत अध्ययनों को भी प्रोत्साहित करेंगे, जिससे साक्ष्य-आधारित पुलिसिंग और कानून प्रवर्तन की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को अपनाने में मदद मिलेगी।

राष्ट्रीय विज़न से जुड़ाव

अधिकारियों के अनुसार, यह सहयोग स्मार्ट पुलिसिंग (सख्त, आधुनिक, जवाबदेह, संवेदनशील और तकनीक-सक्षम) की अवधारणा को आगे बढ़ाने के साथ-साथ 'मिशन कर्मयोगी' और 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय विज़न को भी मजबूती देगा। इस पहल का दीर्घकालिक उद्देश्य पुलिस बल की संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ करना और भविष्य की जटिल सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की तैयारी को और बेहतर बनाना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन एमओयू के बाद वास्तव में कितने पुलिसकर्मी प्रशिक्षित होते हैं और उनकी परिचालन दक्षता में मापनीय सुधार आता है या नहीं। पश्चिम बंगाल में साइबर अपराध और कानून-व्यवस्था की चुनौतियाँ लगातार बढ़ रही हैं, ऐसे में संस्थागत प्रशिक्षण की यह पहल सही दिशा में है — बशर्ते यह कागजी समझौते से आगे बढ़कर नियमित, सत्यापन-योग्य प्रशिक्षण चक्रों में तब्दील हो। 'स्मार्ट पुलिसिंग' और 'मिशन कर्मयोगी' जैसे राष्ट्रीय विज़न से जुड़ाव सराहनीय है, लेकिन इनकी सफलता जमीनी क्रियान्वयन और स्वतंत्र मूल्यांकन पर निर्भर करेगी।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरआरयू और पश्चिम बंगाल पुलिस के बीच एमओयू क्या है?
यह 18 जून 2026 को कोलकाता में हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन है, जिसके तहत राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) और पश्चिम बंगाल पुलिस संयुक्त रूप से आंतरिक सुरक्षा प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देंगे। इसमें आतंकवाद निरोधक, साइबर अपराध, आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल शामिल हैं।
इस समझौते से पश्चिम बंगाल पुलिस को क्या फायदा होगा?
इस साझेदारी से पुलिसकर्मियों को आरआरयू के उन्नत शैक्षणिक संसाधनों, विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल और संस्थागत ढाँचे का लाभ मिलेगा। तकनीक आधारित पुलिसिंग को बढ़ावा मिलने से कार्यकुशलता, जवाबदेही और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार अपेक्षित है।
राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) कितने राज्यों के साथ काम करता है?
आरआरयू अब तक देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस इकाइयों के साथ सहयोग स्थापित कर चुका है। विश्वविद्यालय 11 विशेष स्कूलों और 8 परिसरों के माध्यम से 60 से अधिक शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित करता है।
प्रशिक्षण कार्यक्रमों में कौन-कौन से विषय शामिल होंगे?
प्रशिक्षण में आतंकवाद निरोधक रणनीति, साइबर अपराध और साइबर खतरों से निपटना, आपदा प्रबंधन, जाँच प्रक्रिया और कानून-व्यवस्था बनाए रखना जैसे विषय शामिल होंगे। नए आपराधिक कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।
यह एमओयू किस राष्ट्रीय विज़न से जुड़ा है?
यह सहयोग 'मिशन कर्मयोगी' और 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय विज़न से जुड़ा है। साथ ही यह स्मार्ट पुलिसिंग — यानी सख्त, आधुनिक, जवाबदेह, संवेदनशील और तकनीक-सक्षम पुलिसिंग — की अवधारणा को आगे बढ़ाने का प्रयास है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले