पश्चिम बंगाल पुलिस का राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय से MOU, साइबर अपराध और AI प्रशिक्षण पर फोकस
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल पुलिस ने 18 जून 2025 को केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य राज्य पुलिस बल को आधुनिक प्रशिक्षण और तकनीकी क्षमताओं से लैस करना है। यह समझौता कोलकाता स्थित राज्य सचिवालय नबन्ना में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
समझौते में क्या शामिल है
इस MOU के तहत राज्य के सभी स्तरों के पुलिस अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण का केंद्र साइबर अपराध, डार्क वेब, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग, मानव तस्करी, फॉरेंसिक साइंस और बॉर्डर इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक और संवेदनशील क्षेत्र होंगे।
यह समझौता ऐसे समय में आया है जब डिजिटल अपराधों की संख्या राष्ट्रीय स्तर पर तेज़ी से बढ़ रही है और सीमावर्ती राज्य होने के नाते पश्चिम बंगाल के लिए सीमा-सुरक्षा संबंधी खुफिया क्षमता विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस अवसर पर कहा कि राज्य पुलिस की क्षमता पहले अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप थी, लेकिन पूर्ववर्ती सरकार ने इस क्षमता का जनता के हित में उपयोग नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यक आधुनिक उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए और कर्मियों की कमी के कारण पुलिस जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर सकी।
अधिकारी ने कहा, 'भर्ती में पारदर्शिता लाने और अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती की व्यवस्था की जा रही है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मुख्य लक्ष्य राज्य पुलिस को इतना सक्षम बनाना है कि गंभीर कानून-व्यवस्था के मामलों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) पर निर्भरता कम की जा सके।
राष्ट्रीय संदर्भ में पश्चिम बंगाल
इस समझौते के साथ पश्चिम बंगाल उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है जिन्होंने राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के साथ इस प्रकार का MOU किया है। इससे पहले उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड और असम जैसे राज्य यह कदम उठा चुके हैं। गौरतलब है कि यह विश्वविद्यालय केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और पुलिस व सुरक्षा बलों के लिए विशेष अकादमिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करता है।
आम जनता पर असर
मुख्यमंत्री ने पदभार संभालने के बाद से 'कानून का शासन' स्थापित करने पर जोर देने की बात कही है, न कि 'शासक का शासन'। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से राज्य पुलिस की जवाबदेही और व्यावसायिकता में सुधार की उम्मीद है, जिसका सीधा असर आम नागरिकों की सुरक्षा और न्याय तक पहुँच पर पड़ेगा।
आगे की राह
MOU के क्रियान्वयन की समय-सीमा और प्रशिक्षण बैचों की संख्या अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। राज्य पुलिस के आधुनिकीकरण की यह पहल भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और कर्मियों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ आगे बढ़ेगी, ऐसा मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है।