रूसी हवाई हमलों से जापोरिज्जिया, खेरसोन और ओडेसा में तबाही, रिहायशी इमारतें और पार्क निशाने पर: जेलेंस्की
सारांश
मुख्य बातें
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने 21 जुलाई को बताया कि रूस ने एक बार फिर युद्ध नियमों का उल्लंघन करते हुए आम नागरिकों की बहुमंजिला रिहायशी इमारतों को निशाना बनाया। जापोरिज्जिया, खेरसोन और ओडेसा में हुए इन हवाई हमलों में कई लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हो गए।
जापोरिज्जिया में बचाव अभियान जारी
जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया, 'जापोरिज्जिया में रूसी हवाई हमलों के बाद बचाव अभियान जारी है। बदकिस्मती से हमले में दो लोगों की मौत हो गई है। मैं उनके परिवारों और प्रियजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूँ। कई लोग घायल भी हुए हैं।'
उन्होंने बताया कि रूस ने एक सामान्य बहुमंजिला रिहायशी इमारत को निशाना बनाया, जिसकी पहली से सातवीं मंजिल तक के फ्लैटों में आग लग गई। मौके पर सभी जरूरी सेवाएँ तैनात हैं और बचाव दल के साथ डॉक्टर भी राहत कार्य में जुटे हैं।
खेरसोन पर गाइडेड बम और ड्रोन हमले
राष्ट्रपति जेलेंस्की के अनुसार, मंगलवार को खेरसोन पर गाइडेड हवाई बमों और विभिन्न प्रकार के ड्रोन — जिनमें एफपीवी ड्रोन भी शामिल हैं — से हमले किए गए। इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो लोग घायल हुए। जेलेंस्की ने मृतक के परिवार के प्रति संवेदना जताई।
ओडेसा के पार्क और रिहायशी इमारत पर मिसाइल हमला
ओडेसा और उसके आसपास के इलाके भी हमलों की चपेट में आए। रूस ने एक सार्वजनिक पार्क पर मिसाइल से हमला किया और शहर पर जेट ड्रोन से भी प्रहार किया। एक चार मंजिला रिहायशी इमारत और कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए, जबकि आसपास के क्षेत्र में तीन आवासीय घर भी टूट-फूट गए। इस हमले में दो लोग घायल हुए।
जेलेंस्की की अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील
जेलेंस्की ने साझेदार देशों से यूक्रेन का समर्थन जारी रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के 21वें प्रतिबंध पैकेज को जल्द मंजूरी मिलनी चाहिए और रक्षा सहायता बिना रुकावट जारी रहनी चाहिए। उन्होंने यह भी माँग की कि सेना और अधिकारियों के साथ जिन हथियारों और उपकरणों पर चर्चा हुई है, उन्हें निर्माता कंपनियाँ जल्द से जल्द उपलब्ध कराएँ।
यह ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन-रूस संघर्ष को तीन वर्ष से अधिक हो चुके हैं और युद्धविराम की कोई ठोस संभावना नज़र नहीं आ रही। गौरतलब है कि नागरिक बस्तियों पर इस तरह के हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन माने जाते हैं।