सबरीमाला तंत्री कंदरारु राजीवरु का पद संभालने से इनकार, बेटे की नियुक्ति का अनुरोध
सारांश
मुख्य बातें
सबरीमाला मंदिर के नामित वंशानुगत मुख्य पुजारी (तंत्री) कंदरारु राजीवरु ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए इस वर्ष तंत्री पद का दायित्व ग्रहण करने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। 11 जुलाई को त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (TDB) को लिखे पत्र में उन्होंने अपने स्थान पर अपने बेटे को नियुक्त करने पर विचार करने की अपील भी की है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब मंडलम-मकरविलक्कु तीर्थयात्रा शुरू होने में केवल कुछ ही महीने शेष हैं।
मुख्य घटनाक्रम
राजीवरु ने शनिवार को TDB को पत्र भेजकर अनुरोध किया कि स्वास्थ्य संबंधी कारणों से इस वर्ष उन्हें तंत्री पद पर नियुक्त न किया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके बेटे इस दायित्व को निभाने में सक्षम हैं और उन्हें इस पद पर नियुक्त किया जाए। TDB अब इस अनुरोध की समीक्षा करेगा और उसके बाद नियुक्ति पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
वंशानुगत परंपरा और थझामोन मडोम परिवार
सबरीमाला मंदिर में तंत्री का पद पूर्णतः वंशानुगत है और यह अधिकार विशेष रूप से थझामोन मडोम परिवार के पास है। कई पीढ़ियों से यही परिवार मंदिर के तांत्रिक अनुष्ठानों का संचालन करता आ रहा है। परंपरा के अनुसार यह जिम्मेदारी परिवार के पात्र सदस्यों के बीच क्रमवार सौंपी जाती है। इस बार राजीवरु इस पद के लिए अगली पंक्ति में थे।
जांच का पृष्ठभूमि
राजीवरु का नाम पहले भी विवादों से जुड़ा रहा है। सबरीमाला मंदिर के स्वर्ण आभूषणों और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के कथित गायब होने तथा गबन के मामले में विशेष जांच दल (SIT) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनसे जांच की थी। जांच के दौरान SIT ने उन्हें गिरफ्तार भी किया था, जबकि ED ने धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) से जुड़े प्रावधानों के तहत उनसे पूछताछ की थी। बाद में उन्हें इन मामलों में जमानत मिल गई और फिलहाल जांच अंतिम चरण में बताई जा रही है।
TDB का रुख और कानूनी स्थिति
सूत्रों के अनुसार, त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड इस मामले में तत्काल कोई निर्णय लेने के पक्ष में नहीं है। बोर्ड SIT की अंतिम चार्जशीट और उच्च न्यायालय में चल रही कानूनी कार्यवाही का इंतजार कर रहा है। गौरतलब है कि यह कानूनी अनिश्चितता तंत्री नियुक्ति की प्रक्रिया को और जटिल बना रही है।
तीर्थयात्रा पर असर और आगे की राह
मंडलम-मकरविलक्कु तीर्थयात्रा इस वर्ष नवंबर से शुरू होनी है और लाखों श्रद्धालु इसमें भाग लेते हैं। मंदिर की प्रमुख धार्मिक रस्मों और अनुष्ठानों के संचालन में तंत्री की केंद्रीय भूमिका होती है, इसलिए समय पर नियुक्ति अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। TDB के अंतिम फैसले पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं।