31 जुलाई 2026
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पुणे में सैन्य विस्फोटक सुरक्षा पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार रहे मुख्य अतिथि

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पुणे में सैन्य विस्फोटक सुरक्षा पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार रहे मुख्य अतिथि

सारांश

पुणे में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ने सैन्य विस्फोटक और प्रणोदक क्षेत्र में सुरक्षा, अनुपालन और नवाचार पर सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत को एक मंच पर लाया। संयुक्त कार्य समूह के प्रस्ताव के साथ यह आयोजन भारत के रक्षा विनिर्माण में सुरक्षा-संस्कृति को संस्थागत बनाने की दिशा में एक ठोस पहल है।

मुख्य बातें

DGQA के अधीन गुणवत्ता आश्वासन नियंत्रक (सैन्य विस्फोटक) ने 31 जुलाई को पुणे में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया।
रक्षा उत्पादन विभाग के सचिव संजीव कुमार मुख्य अतिथि और महानिदेशक एन.
मनोहरन ने स्वागत भाषण दिया।
विस्फोटकों के संपूर्ण जीवन चक्र — निर्माण से परिचालन उपयोग तक — को कवर करने वाले व्यापक सुरक्षा ढाँचे पर विशेष बल दिया गया।
सरकार, उद्योग, DRDO और शिक्षा जगत को मिलाकर एक संयुक्त कार्य समूह गठित करने का प्रस्ताव रखा गया।
संगोष्ठी का लक्ष्य भारतीय सशस्त्र बलों के लिए सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण गोला-बारूद की उपलब्धता और घरेलू रक्षा उद्योग में नवाचार सुनिश्चित करना था।

रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग के अंतर्गत गुणवत्ता आश्वासन महानिदेशालय (DGQA) के अधीन कार्यरत गुणवत्ता आश्वासन नियंत्रक (सैन्य विस्फोटक), पुणे ने 31 जुलाई को पुणे में 'सैन्य विस्फोटक और प्रणोदक: सुरक्षा और अनुपालन' विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। इस महत्त्वपूर्ण आयोजन में नीति निर्माताओं, वरिष्ठ अधिकारियों, वैज्ञानिकों और उद्योग विशेषज्ञों ने एकजुट होकर सैन्य विस्फोटक क्षेत्र में सुरक्षा ढाँचे को मज़बूत करने पर विचार-विमर्श किया।

संगोष्ठी का नेतृत्व और प्रमुख उपस्थिति

रक्षा उत्पादन विभाग के सचिव संजीव कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। स्वागत भाषण गुणवत्ता आश्वासन महानिदेशक एन. मनोहरन ने दिया। विशिष्ट प्रतिनिधियों में डॉ. गरिमा भगत, संयुक्त सचिव (भूमि प्रणाली); प्रकाश राजपुरोहित, संयुक्त सचिव (डीआईपी); तथा मुनिशन्स इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक शामिल रहे। इसके अतिरिक्त रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के वैज्ञानिक, विस्फोटक उद्योग के प्रतिनिधि और प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञ भी मौजूद थे।

चर्चा के मुख्य विषय

संगोष्ठी ने सैन्य विस्फोटक और प्रणोदकों के संपूर्ण जीवन चक्र — डिज़ाइन एवं विकास से लेकर निर्माण, परीक्षण, परिवहन, भंडारण और परिचालन उपयोग तक — को कवर करने वाले एक व्यापक सुरक्षा ढाँचे की स्थापना पर विशेष बल दिया। विचार-विमर्श में प्रक्रिया सुरक्षा को सुदृढ़ करने, विस्फोटक निर्माण संयंत्रों में दुर्घटनाओं को न्यूनतम करने, स्वचालन को प्रोत्साहन देने और उन्नत सुरक्षा प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

संयुक्त कार्य समूह का प्रस्ताव

संगोष्ठी में एक संयुक्त कार्य समूह की स्थापना पर गहन विचार-विमर्श हुआ, जिसमें सरकार, रक्षा प्रतिष्ठानों, सार्वजनिक एवं निजी उद्योग, अनुसंधान संगठनों और शिक्षा जगत के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस प्रस्तावित समूह का उद्देश्य समन्वित कार्रवाई को सुगम बनाना, सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करना, साझा सुरक्षा प्रोटोकॉल विकसित करना और दुर्घटना निवारण उपायों में निरंतर सुधार सुनिश्चित करना है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का संकल्प

संगोष्ठी का अंतिम लक्ष्य भारतीय सशस्त्र बलों के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण हथियारों एवं गोला-बारूद की उपलब्धता सुनिश्चित करना था। साथ ही घरेलू रक्षा उद्योग में नवाचार, तकनीकी उन्नति और ज़िम्मेदार विकास को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की गई। यह आयोजन आत्मनिर्भर भारत के रक्षा क्षेत्र में सुरक्षा-संस्कृति को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

धन्यवाद प्रस्ताव डॉ. टीके वरदराजन, नियंत्रक, गुणवत्ता आश्वासन नियंत्रक कार्यालय (सैन्य विस्फोटक), पुणे और इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजक ने प्रस्तुत किया। आगामी चरण में प्रस्तावित कार्य समूह की संरचना और कार्य-योजना पर निर्णय अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इस संगोष्ठी का आयोजन उस चिंता की स्वीकृति है। संयुक्त कार्य समूह का प्रस्ताव सही दिशा में है, लेकिन असली परीक्षा इसके गठन की समयसीमा और अधिकार-क्षेत्र में होगी — अतीत में ऐसी समितियाँ सिफारिशें देकर ठंडे बस्ते में चली गई हैं। स्वचालन और उन्नत सुरक्षा प्रौद्योगिकी पर जोर सराहनीय है, परंतु निजी उद्योग की भागीदारी तब तक सीमित रहेगी जब तक नियामक ढाँचा स्पष्ट और पूर्वानुमानित नहीं होगा। आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को तभी बल मिलेगा जब सुरक्षा अनुपालन को बोझ नहीं, प्रतिस्पर्धात्मक लाभ के रूप में देखा जाए।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे में आयोजित सैन्य विस्फोटक संगोष्ठी का उद्देश्य क्या था?
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्देश्य सैन्य विस्फोटक और प्रणोदक क्षेत्र में सुरक्षा ढाँचे को सुदृढ़ करना और अनुपालन नीतियों पर विचार-विमर्श के लिए एक साझा मंच प्रदान करना था। इसमें विस्फोटकों के पूरे जीवन चक्र — निर्माण से लेकर परिचालन उपयोग तक — को कवर करने वाली व्यापक सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा हुई।
संगोष्ठी में किसने भाग लिया?
संगोष्ठी में रक्षा उत्पादन विभाग के सचिव संजीव कुमार, महानिदेशक एन. मनोहरन, संयुक्त सचिव डॉ. गरिमा भगत और प्रकाश राजपुरोहित, मुनिशन्स इंडिया लिमिटेड के CMD, DRDO वैज्ञानिक, विस्फोटक उद्योग के प्रतिनिधि और प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए।
संयुक्त कार्य समूह का प्रस्ताव क्या है और इसका काम क्या होगा?
संगोष्ठी में एक संयुक्त कार्य समूह गठित करने का प्रस्ताव रखा गया, जिसमें सरकार, रक्षा प्रतिष्ठान, सार्वजनिक एवं निजी उद्योग, DRDO और शिक्षा जगत के प्रतिनिधि होंगे। यह समूह साझा सुरक्षा प्रोटोकॉल विकसित करने, सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करने और दुर्घटना निवारण उपायों में सुधार सुनिश्चित करेगा।
इस संगोष्ठी का भारतीय सशस्त्र बलों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
संगोष्ठी का मुख्य लक्ष्य भारतीय सशस्त्र बलों के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण हथियारों एवं गोला-बारूद की आपूर्ति सुनिश्चित करना है। घरेलू रक्षा उद्योग में नवाचार और तकनीकी उन्नति को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भरता की दिशा में यह एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
DGQA (गुणवत्ता आश्वासन महानिदेशालय) की इस संगोष्ठी में क्या भूमिका रही?
DGQA के अधीन गुणवत्ता आश्वासन नियंत्रक (सैन्य विस्फोटक), पुणे ने इस संगोष्ठी का आयोजन किया। नियंत्रक डॉ. टीके वरदराजन ने आयोजक की भूमिका निभाई और धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जबकि महानिदेशक एन. मनोहरन ने स्वागत भाषण दिया।
राष्ट्र प्रेस
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