15 सितंबर 2026
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संतकबीरनगर: थाना बखिरा के थानाध्यक्ष समेत तीन पुलिसकर्मी निलंबित, महिला अपराधों में लापरवाही का आरोप

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संतकबीरनगर: थाना बखिरा के थानाध्यक्ष समेत तीन पुलिसकर्मी निलंबित, महिला अपराधों में लापरवाही का आरोप

सारांश

संतकबीरनगर में एसपी संदीप कुमार मीना ने थाना बखिरा के थानाध्यक्ष समेत तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित किया — महिला अपराधों में लापरवाही, बीट प्रणाली में उदासीनता और जनता से अमर्यादित व्यवहार के आरोप में। यूपी पुलिस में जवाबदेही का कड़ा संदेश।

मुख्य बातें

पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने 15 सितंबर 2026 को तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया।
निलंबित अधिकारियों में थानाध्यक्ष उमाशंकर तिवारी , उपनिरीक्षक सुरेश यादव और मुख्य आरक्षी कोमल प्रसाद शामिल हैं, सभी थाना बखिरा से।
थानाध्यक्ष पर महिला संबंधी अपराधों में त्वरित कार्यवाही न करने और मिशन शक्ति जैसे अभियानों में उदासीनता का आरोप है।
तीनों को नियम-17 (1) (क), नियमावली 1991 के तहत निलंबित किया गया; निलंबन अवधि में पुलिस लाइन, संतकबीरनगर से संबद्ध रहेंगे।
एसपी ने चेतावनी दी कि कर्तव्य में लापरवाही पर आगे भी कठोर विभागीय कार्रवाई होगी।

उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने 15 सितंबर 2026 को कर्तव्य में घोर लापरवाही और पदीय दायित्वों के प्रति उदासीनता के आरोप में थाना बखिरा के थानाध्यक्ष सहित तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई महिला संबंधी अपराधों में त्वरित कार्यवाही न करने और उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी के आरोपों पर आधारित है।

कौन-कौन हुए निलंबित

निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में उपनिरीक्षक उमाशंकर तिवारी (थानाध्यक्ष, बखिरा), उपनिरीक्षक सुरेश यादव (थाना बखिरा) और मुख्य आरक्षी कोमल प्रसाद (थाना बखिरा) शामिल हैं। तीनों को उत्तर प्रदेश अधीनस्थ श्रेणी के पुलिस अधिकारियों की (दंड एवं अपील) नियमावली, 1991 के नियम-17 (1) (क) के तहत निलंबित किया गया है।

थानाध्यक्ष पर लगे आरोप

उपनिरीक्षक उमाशंकर तिवारी पर महिला संबंधी अपराधों में तत्परता और संवेदनशीलता के साथ त्वरित कानूनी कार्रवाई न करने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा उन पर एचएस सत्यापन, 60 और 90 दिवसीय विवेचनाओं के निस्तारण में लापरवाही, गुमशुदा व्यक्तियों की तलाश में शिथिलता और यक्ष ऐप पर आपराधिक सत्यापन में रुचि न लेने के आरोप भी हैं।

गौरतलब है कि तिवारी पर मिशन शक्ति के तहत आयोजित बहू-बेटी सम्मेलन, साइबर अपराध रोकथाम जागरूकता कार्यक्रमों और उच्चाधिकारियों द्वारा चलाए गए अभियानों में सक्रिय भागीदारी न करने का भी आरोप है।

अन्य दो पुलिसकर्मियों पर आरोप

उपनिरीक्षक सुरेश यादव और मुख्य आरक्षी कोमल प्रसाद पर जनसुनवाई में रुचि न लेने, जनता के साथ अमर्यादित व्यवहार करने और अपने क्षेत्र में घटित छोटी-बड़ी घटनाओं की सूचना समय पर उच्चाधिकारियों को न देने के आरोप लगाए गए हैं। इसके साथ ही बीट प्रणाली और निरोधात्मक कार्रवाई में उदासीनता भी उनके विरुद्ध दर्ज की गई है।

निलंबन अवधि की शर्तें

निलंबन आदेश के अनुसार, तीनों पुलिसकर्मी पुलिस लाइन, संतकबीरनगर से संबद्ध रहेंगे और सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। निलंबन अवधि में उन्हें नियमों के अनुसार ही परिलब्धियाँ मिलेंगी।

एसपी की चेतावनी

पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने स्पष्ट किया है कि अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था के मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पुलिस अधिकारी अपने क्षेत्र में अपराधियों की निगरानी और बीट व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखे। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश पुलिस में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक स्पष्ट संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्रियान्वयन नीचे अटक जाता है। निलंबन एक जरूरी कदम है, लेकिन असली सवाल यह है कि थानाध्यक्ष इतने समय तक जवाबदेही से परे कैसे रहे। विभागीय निगरानी तंत्र की कमज़ोरी तब उजागर होती है जब कार्रवाई शिकायत के बाद होती है, नियमित मूल्यांकन के आधार पर नहीं। बिना संरचनात्मक सुधार के केवल निलंबन, अगले थानाध्यक्ष की कार्यशैली नहीं बदलेगा।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संतकबीरनगर में कौन-कौन से पुलिसकर्मी निलंबित हुए हैं?
थाना बखिरा के थानाध्यक्ष उपनिरीक्षक उमाशंकर तिवारी, उपनिरीक्षक सुरेश यादव और मुख्य आरक्षी कोमल प्रसाद को 15 सितंबर 2026 को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के आदेश पर हुई है।
इन पुलिसकर्मियों को निलंबित क्यों किया गया?
इन तीनों पर पदीय दायित्वों में उदासीनता, महिला संबंधी अपराधों में त्वरित कार्रवाई न करने, बीट प्रणाली में लापरवाही और जनता के साथ अमर्यादित व्यवहार के आरोप हैं। थानाध्यक्ष पर मिशन शक्ति और साइबर जागरूकता अभियानों में रुचि न लेने का भी आरोप है।
निलंबन के बाद इन पुलिसकर्मियों की क्या स्थिति होगी?
निलंबन अवधि में तीनों पुलिसकर्मी पुलिस लाइन, संतकबीरनगर से संबद्ध रहेंगे और सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। उनके विरुद्ध नियमावली 1991 के नियम-17 (1) (क) के तहत विभागीय कार्यवाही जारी रहेगी।
मिशन शक्ति क्या है और इसमें लापरवाही क्यों गंभीर मानी गई?
मिशन शक्ति उत्तर प्रदेश सरकार का महिला सुरक्षा और सम्मान के लिए चलाया जाने वाला प्रमुख अभियान है, जिसमें बहू-बेटी सम्मेलन जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। इसमें पुलिस की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य मानी जाती है, इसलिए इसमें उदासीनता को अनुशासनात्मक कार्रवाई का आधार बनाया गया।
एसपी संदीप कुमार मीना ने अन्य पुलिसकर्मियों को क्या संदेश दिया?
एसपी ने स्पष्ट किया कि अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने क्षेत्र में अपराधियों की निगरानी और बीट व्यवस्था को प्रभावी ढंग से बनाए रखें।
राष्ट्र प्रेस
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