संजय निषाद बोले — छात्र सरकार पर रखें भरोसा, सोनम वांगचुक का भूख हड़ताल खत्म करना बुद्धिमानी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद ने 24 जुलाई को लखनऊ में अनेक राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी — जिनमें अनंतनाग आतंकी हमला, छात्रों का विरोध-प्रदर्शन, पेपर लीक विवाद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा भूख हड़ताल समाप्त किए जाने का निर्णय शामिल हैं। उन्होंने विपक्ष से संसद में आतंकवाद-रोधी कठोर कानून बनाने में सहयोग की अपील की और छात्रों से सड़कों के बजाय पढ़ाई पर ध्यान देने का आग्रह किया।
अनंतनाग हमले पर कड़ा रुख
निषाद ने कहा कि अनंतनाग में हुए आतंकी हमले के बाद देशभर के नागरिकों को एकजुट होकर आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आतंकवाद के उन्मूलन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद की जड़ें उन केंद्रों तक फैली हैं जहाँ नफरत की विचारधारा पोषित की जाती है। उनके अनुसार ऐसे केंद्रों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए और वहाँ केवल संविधान व वैज्ञानिक सोच के अनुरूप शिक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का मुद्दा है, इसलिए विपक्ष को भी संसद में इस पर सहयोग देना चाहिए।
पेपर लीक और छात्र आंदोलन पर सरकार का पक्ष
छात्रों के विरोध-प्रदर्शन और पेपर लीक मामलों पर निषाद ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वीडियो संदेश में स्पष्ट किया है कि पीड़ित छात्रों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक व्यवस्था की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने जोर दिया कि परीक्षाएँ समय पर होनी चाहिए ताकि छात्रों का एक वर्ष बर्बाद न हो।
उन्होंने कुछ संगठनों पर आरोप लगाया कि वे युवाओं को गुमराह कर पढ़ाई छोड़ सड़कों पर उतरने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं होगी — यह आश्वासन पहले ही दिया जा चुका है। उन्होंने छात्रों से सरकार पर भरोसा रखने और अपने भविष्य पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की।
विपक्ष पर विदेशी संबंधों का आरोप
समाजवादी पार्टी की ओर से नेपाल जैसे आंदोलन की संभावना जताए जाने और BJP नेताओं को देश छोड़ने संबंधी टिप्पणी पर निषाद ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयान देने वाले लोगों के विदेशी ताकतों से संबंध हैं और समय आने पर यह सामने आएगा कि किन्हें विदेशों से आर्थिक सहायता मिलती रही है।
यह ऐसे समय में आया है जब देश में छात्र आंदोलन और परीक्षा विवाद को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। निषाद ने कहा कि भारत को कमजोर करने की कोशिशें पहले भी होती रही हैं और आज भी विभिन्न माध्यमों से ऐसे प्रयास जारी हैं।
सोनम वांगचुक के फैसले को बताया बुद्धिमानी
जलवायु कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक द्वारा भूख हड़ताल समाप्त करने के निर्णय का स्वागत करते हुए निषाद ने कहा कि यह एक बुद्धिमानी भरा और देशहित में लिया गया फैसला है। उन्होंने कहा कि एक जागरूक व्यक्ति को जीवित रहकर समाज और राष्ट्र के लिए काम करना चाहिए।
निषाद ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल चाहते थे कि वांगचुक अपनी जान जोखिम में डालें, लेकिन उनके निर्णय ने उन प्रयासों को विफल कर दिया। गौरतलब है कि वांगचुक ने लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की माँग को लेकर भूख हड़ताल की थी।
आगे क्या
निषाद ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में सड़कों पर हंगामे के बजाय संसद में चर्चा और कानून बनाना ही सही तरीका है। उन्होंने विपक्ष से पेपर लीक पर कड़े कानून बनाने के लिए सरकार का संसद में साथ देने की अपील दोहराई। प्रधानमंत्री मोदी के किसानों, युवाओं और छात्रों के साथ खड़े होने का भरोसा दिलाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार हर उचित माँग पर संवेदनशील है।