फिल्म 'सतलुज' OTT से हटी: SAD उपाध्यक्ष रोमाना बोले — हर गाँव में होगी स्पेशल स्क्रीनिंग
सारांश
मुख्य बातें
शिरोमणि अकाली दल (SAD) के उपाध्यक्ष परमबंस सिंह रोमाना ने 9 जुलाई 2026 को फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने घोषणा की कि SAD के कार्यकर्ता और नेता इस फिल्म को पंजाब के हर गाँव तक पहुँचाएंगे और विशेष स्क्रीनिंग आयोजित करेंगे।
SAD का रुख और घोषणा
रोमाना ने कहा, 'शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने पहले ही दिन इस फिल्म को ओटीटी से हटाए जाने की निंदा की थी। इसी कड़ी में बादल ने घोषणा की है कि SAD के कार्यकर्ता और नेता इस फिल्म को हर गाँव तक ले जाएंगे और स्पेशल स्क्रीनिंग करेंगे, ताकि पंजाब के युवाओं को इतिहास में हुई घटनाओं की सच्चाई पता चल सके।'
फिल्म में क्या दिखाया गया है
रोमाना के अनुसार, फिल्म 'सतलुज' 1984 में दरबार साहिब पर हुए हमले और उसके बाद दिल्ली तथा अन्य शहरों में हुए सिख-विरोधी दंगों के दौर को चित्रित करती है। फिल्म में आरोप लगाया गया है कि इन घटनाओं के लिए कांग्रेस पार्टी जिम्मेदार थी। इसके अलावा, फिल्म में यह भी दिखाया गया है कि कथित तौर पर उन घटनाओं का विरोध करने वाले युवाओं को पुलिस ने हिरासत में लिया, प्रताड़ित किया, कथित फर्जी मुठभेड़ों में मारा और उनके शवों को पंजाब की नदियों में फेंक दिया।
मानवाधिकार कार्यकर्ता की राय
वरिष्ठ अधिवक्ता और मानवाधिकार कार्यकर्ता राजविंदर बैंस ने इस मामले पर कहा कि मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा ने तथ्य सामने रखे थे कि श्मशान घाटों के रिकॉर्ड में युवाओं के नाम दर्ज हैं और अधिकारी इससे इनकार नहीं कर सके। बैंस ने बताया कि 'फरवरी से सितंबर तक का समय एक खींचतान का दौर था — वे प्रेस कॉन्फ्रेंस करते थे और पुलिस उनका जवाब देती थी।'
कांग्रेस नेता का पक्ष
कांग्रेस नेता परगट सिंह ने भी इस विषय पर बुधवार को अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, 'असली कहानियों पर बनी फिल्में लोगों को इतिहास समझने में मदद करती हैं और उन घटनाओं को सामने लाती हैं जहाँ सत्ता का दुरुपयोग हो सकता है। आज की पीढ़ी को ऐसी घटनाओं के बारे में जानना चाहिए — मेरी राय में यह फिल्म दिखाई जानी चाहिए।' गौरतलब है कि कांग्रेस के एक नेता का यह बयान उनकी पार्टी पर लगे आरोपों के संदर्भ में उल्लेखनीय है।
आगे क्या होगा
SAD के इस ऐलान के बाद अब यह देखना होगा कि पंजाब में इन स्क्रीनिंग्स को प्रशासनिक स्तर पर कोई चुनौती मिलती है या नहीं। फिल्म के ओटीटी से हटाए जाने के कारण अभी तक आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं किए गए हैं।