सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा: हरि राम गुप्ता की जमानत याचिका पटियाला हाउस कोर्ट ने खारिज की
सारांश
मुख्य बातें
पटियाला हाउस कोर्ट ने 22 सितंबर 2026 को सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के मुख्य आरोपी और बिल्डिंग मालिक हरि राम गुप्ता की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जाँच अभी प्रारंभिक चरण में है, चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है और इस स्तर पर ज़मानत देना न्यायसंगत नहीं होगा।
कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियाँ
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि हरि राम गुप्ता स्वयं को बिल्डिंग के संचालन से अलग बता रहे हैं, जबकि रिकॉर्ड इससे भिन्न तस्वीर पेश करते हैं। कोर्ट ने रेखांकित किया कि बिल्डिंग का बिजली कनेक्शन आज भी हरि राम गुप्ता के नाम पर दर्ज है। इसके अतिरिक्त, पूछताछ के दौरान कई गवाहों ने बिल्डिंग के निर्माण कार्य और उसमें चल रही गतिविधियों में उनकी सक्रिय भूमिका का उल्लेख किया।
अदालत ने यह भी उजागर किया कि इस इमारत से प्रतिमाह एक लाख रुपये से अधिक का किराया प्राप्त होता था। कोर्ट ने कहा कि इतनी बड़ी किराया आय के बावजूद बिल्डिंग की मरम्मत और रखरखाव पर खर्च का विश्लेषण जाँच का अनिवार्य हिस्सा है, जो लापरवाही की प्रकृति को स्थापित करने के लिए ज़रूरी है।
उम्र और स्वास्थ्य की दलीलें नकारी
आरोपी के अधिवक्ता ने दलील दी कि हरि राम गुप्ता बुजुर्ग हैं और अनेक बीमारियों से पीड़ित हैं, अतः उन्हें ज़मानत दी जाए। कोर्ट ने इन दलीलों को महत्वपूर्ण मानते हुए भी स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि फिलहाल ऐसी कोई चिकित्सीय आपात स्थिति प्रमाणित नहीं हुई है जिससे यह निष्कर्ष निकले कि उनकी देखभाल न्यायिक हिरासत में संभव नहीं। साथ ही, कोर्ट ने जेल अधीक्षक को निर्देश दिया कि आरोपी को समय पर सभी निर्धारित दवाएँ उपलब्ध कराई जाएँ।
हादसे की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 12 सितंबर 2026 को दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक जर्जर पुरानी इमारत का हिस्सा अचानक ढह गया था। इस दर्दनाक हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें 5 छात्र और 2 मज़दूर शामिल थे। कई अन्य लोग घायल हुए। प्रारंभिक जाँच में सामने आया था कि भवन में अवैध निर्माण भी किया गया था।
गिरफ्तारी और आरोप
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में 7 सितंबर को तीन लोगों को गिरफ्तार किया था — बिल्डिंग मालिक हरि राम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता और बेटे महेश गुप्ता। तीनों पर गैर इरादतन हत्या और आपराधिक लापरवाही की धाराओं के तहत मामला दर्ज है।
आगे की राह
अदालत के इस आदेश के बाद तीनों आरोपी न्यायिक हिरासत में बने रहेंगे। चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले में अगले कानूनी कदम तय होंगे। पीड़ित परिवारों और इलाके के निवासियों की नज़रें जाँच की प्रगति और जवाबदेही तय होने पर टिकी हैं।