सत्य निकेतन इमारत हादसा: दिल्ली पुलिस ने छह आरोपियों के खिलाफ पटियाला हाउस कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस ने 5 नवंबर 2026 को पटियाला हाउस कोर्ट में सत्य निकेतन इमारत ढहने के मामले में छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। 6 सितंबर को हुई इस दुर्घटना में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई थी और एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए थे। पाँच मंजिला पीजी हॉस्टल की यह इमारत दक्षिण दिल्ली के पॉश इलाके में धराशायी हुई थी, जिसमें कई छात्र मलबे के नीचे दब गए थे।
हादसे की पृष्ठभूमि
रविवार को हुई इस घटना के समय इमारत के बेसमेंट में कुछ निर्माण कार्य चल रहा था और बारिश के बाद ग्राउंड फ्लोर की मरम्मत की जा रही थी। किराए पर रहने वाले कई छात्र मलबे में फँस गए, जिन्हें एनडीआरएफ, दिल्ली पुलिस और अन्य बचाव दलों ने मिलकर सुरक्षित निकाला। उस दिन हॉस्टल के कई कमरे खाली थे, क्योंकि छुट्टी होने के कारण बड़ी संख्या में छात्र अपने घर गए हुए थे।
चार्जशीट में नामजद आरोपी
दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में हरि राम गुप्ता, उर्मिला गुप्ता, महेश गुप्ता, सनोज कुमार, सुधांशु लवनीश कुमार और शुभम त्यागी के नाम दर्ज किए गए हैं। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपों में लापरवाही से मानव जीवन को खतरे में डालना, गैर-इरादतन हत्या, निर्माण या मरम्मत कार्य के दौरान बरती गई लापरवाही, चोट पहुँचाना और संपत्ति को नुकसान पहुँचाना शामिल हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
हादसे के तुरंत बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का दौरा किया और राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। घटना के कुछ ही घंटों के भीतर नगर निगम (एमसीडी) के डिप्टी कमिश्नर और चार इंजीनियरों को लापरवाही और कर्तव्यपालन में कोताही के आरोप में निलंबित कर दिया गया।
एफआईआर से चार्जशीट तक
हादसे के बाद साउथ कैंपस पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने जाँच के दौरान निर्माण कार्य में बरती गई कथित लापरवाही, अवैध निर्माण और संरचनात्मक खामियों की जाँच की। गौरतलब है कि यह मामला केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि राजधानी के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में अनियमित पीजी हॉस्टल के निर्माण और रखरखाव पर सवाल उठाता है।
क्या होगा आगे
चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामला पटियाला हाउस कोर्ट में आगे बढ़ेगा और आरोपियों के खिलाफ सुनवाई की प्रक्रिया शुरू होगी। पीड़ित परिवारों को अब न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के हादसों को रोकने के लिए एमसीडी की निर्माण अनुमति प्रक्रिया और नियमित संरचनात्मक ऑडिट को और कड़ा करना होगा।