10 अगस्त 2026
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मक्का डिफेंस पैक्ट को ईरान ने बताया अमेरिका-विरोधी संकेत, बाघेई बोले — 'सोच में बदलाव आया'

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मक्का डिफेंस पैक्ट को ईरान ने बताया अमेरिका-विरोधी संकेत, बाघेई बोले — 'सोच में बदलाव आया'

सारांश

सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच 'मक्का जॉइंट डिफेंस पैक्ट' पर ईरान की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही — तेहरान ने इसे अमेरिकी सुरक्षा गारंटी से मोहभंग का प्रतीक बताया। यह बदलाव क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन में एक नई धुरी की संभावना की ओर इशारा करता है।

मुख्य बातें

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने 10 अगस्त को 'मक्का जॉइंट डिफेंस पैक्ट' को अमेरिका-विरोधी सोच का संकेत बताया।
सऊदी अरब , तुर्की और पाकिस्तान ने शुक्रवार को इस पैक्ट पर हस्ताक्षर किए; इसमें संयुक्त सैन्य अभ्यास , खुफिया साझेदारी और रणनीतिक तालमेल शामिल हैं।
बाघेई ने कहा कि ईरान को इस समझौते से घबराहट नहीं — तीनों देशों के साथ धार्मिक, ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंध गहरे हैं।
ईरानी नेताओं के पाकिस्तान दौरे के न्योते पर बाघेई ने कहा — 'सही समय पर दौरा होगा।' बाघेई के अनुसार, क्षेत्र के देश अब अमेरिकी सुरक्षा दावों पर भरोसा नहीं कर रहे और स्वतंत्र रास्ता अपना रहे हैं।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने सोमवार, 10 अगस्त को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुआ 'मक्का जॉइंट डिफेंस पैक्ट' अमेरिका-विरोधी सोच का प्रतिबिंब है। उन्होंने इसे क्षेत्रीय देशों की 'सोच में बदलाव का संकेत' बताया और कहा कि ईरान को इस समझौते से किसी प्रकार की घबराहट नहीं है।

बाघेई का बयान: अमेरिका पर भरोसा नहीं

बाघेई ने कहा, 'यह डेवलपमेंट इस बात का एक संकेत है कि इस इलाके के देश इस नतीजे पर पहुँच गए हैं कि वे यूनाइटेड स्टेट्स और इलाके के बाहर के कुछ दूसरे देशों की ओर से दिए गए सिक्योरिटी के दावे पर भरोसा नहीं कर सकते, और वे अपनी काबिलियत और नज़रिए पर भरोसा करके दूसरा तरीका आज़माने की कोशिश कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि पिछले दो-तीन वर्षों में जो परिस्थितियाँ बनी हैं, उनमें क्षेत्र के देशों को यह स्पष्ट हो गया है कि सुरक्षा किसी 'फर्जी मध्यस्थ' के ज़रिए हासिल नहीं की जा सकती।

मक्का जॉइंट डिफेंस पैक्ट: मुख्य प्रावधान

शुक्रवार को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने 'मक्का जॉइंट डिफेंस पैक्ट' पर हस्ताक्षर किए। तीनों देशों ने माना कि यह समझौता केवल रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि सैन्य और रणनीतिक गठजोड़ को नए स्तर पर ले जाने की कोशिश है।

समझौते के अंतर्गत तीनों देश संयुक्त सैन्य अभ्यास करेंगे, खुफिया जानकारी साझा करेंगे, सुरक्षा तालमेल बढ़ाएँगे और क्षेत्रीय चुनौतियों से मिलकर निपटने की रणनीति तैयार करेंगे।

ईरान को घबराहट नहीं — धार्मिक और सभ्यतागत संबंधों का हवाला

बाघेई ने स्पष्ट किया कि ईरान को इस समझौते से कोई खतरा महसूस नहीं होता, क्योंकि उसके इन तीनों देशों के साथ धार्मिक, ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंध गहरे हैं। उन्होंने कहा कि 'कोई भी योजना जो इस इलाके की भू-राजनीतिक और क्षेत्र की ऐतिहासिक वास्तविकताओं पर आधारित हो, वो व्यापक और समावेशी है।' यह बयान इस बात का संकेत है कि तेहरान इस गठजोड़ को अपने विरुद्ध नहीं, बल्कि पश्चिमी प्रभाव के विरुद्ध मानता है।

पाकिस्तान दौरे पर ईरानी नेताओं का रुख

प्रेस ब्रीफिंग में जब पत्रकारों ने पाकिस्तान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची के पाकिस्तान दौरे के न्योते के बारे में पूछा, तो बाघेई ने कहा कि 'जब सही समय आएगा तो यह दौरा होगा।' इस टिप्पणी को कूटनीतिक संयम के रूप में देखा जा रहा है।

क्षेत्रीय समीकरण और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में अमेरिकी प्रभाव को लेकर कई देश अपनी स्वतंत्र रक्षा नीतियाँ बना रहे हैं। गौरतलब है कि यह तीन-देशीय समझौता इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) के ढाँचे से परे एक स्वतंत्र सैन्य धुरी की दिशा में पहला ठोस कदम माना जा रहा है। आने वाले महीनों में इस पैक्ट के क्रियान्वयन की दिशा और ईरान की भूमिका पर सबकी नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पश्चिमी प्रभाव को कमज़ोर करने वाला मानता है। हालाँकि, सऊदी-ईरान संबंधों में हालिया सुधार के बावजूद सुन्नी-बहुल इस त्रिपक्षीय गठजोड़ में शिया-बहुल ईरान की अनुपस्थिति एक महत्वपूर्ण तथ्य है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। असली सवाल यह है कि क्या यह पैक्ट एक स्वायत्त क्षेत्रीय सुरक्षा ढाँचे की नींव है, या केवल घरेलू राजनीतिक संदेश देने का माध्यम।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मक्का जॉइंट डिफेंस पैक्ट क्या है?
मक्का जॉइंट डिफेंस पैक्ट सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुआ एक त्रिपक्षीय रक्षा समझौता है, जिस पर शुक्रवार को हस्ताक्षर हुए। इसके तहत तीनों देश संयुक्त सैन्य अभ्यास करेंगे, खुफिया जानकारी साझा करेंगे और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से मिलकर निपटेंगे।
ईरान ने इस समझौते को अमेरिका-विरोधी क्यों बताया?
ईरान के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि क्षेत्र के देश अब अमेरिकी सुरक्षा गारंटी पर भरोसा नहीं कर रहे और स्वतंत्र रक्षा नीति की ओर बढ़ रहे हैं। उनके अनुसार यह 'सोच में बदलाव का संकेत' है।
क्या ईरान इस पैक्ट को अपने लिए खतरा मानता है?
नहीं। बाघेई ने स्पष्ट कहा कि ईरान को इस समझौते से घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है। उन्होंने इसकी वजह सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के साथ ईरान के धार्मिक, ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों को बताया।
इस पैक्ट से क्षेत्रीय समीकरण कैसे बदलेंगे?
विश्लेषकों के अनुसार यह समझौता मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में एक स्वतंत्र सैन्य धुरी की दिशा में पहला ठोस कदम है। यह इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) के ढाँचे से परे जाकर त्रिपक्षीय सैन्य सहयोग स्थापित करने की कोशिश है।
ईरानी नेताओं के पाकिस्तान दौरे पर क्या स्थिति है?
बाघेई ने कहा कि संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची को पाकिस्तान का न्योता मिला है, और 'सही समय पर दौरा होगा।' इस टिप्पणी से कोई ठोस तारीख स्पष्ट नहीं होती।
राष्ट्र प्रेस
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