13 जुलाई 2026
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ग्रेटर नोएडा में शेयर ट्रेडिंग के नाम पर ₹48 लाख की साइबर ठगी, इंस्टाग्राम-व्हाट्सएप से बिछाया गया जाल

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ग्रेटर नोएडा में शेयर ट्रेडिंग के नाम पर ₹48 लाख की साइबर ठगी, इंस्टाग्राम-व्हाट्सएप से बिछाया गया जाल

सारांश

इंस्टाग्राम पर दोस्ती, व्हाट्सएप पर 'ट्रेनिंग', और फिर ₹47.90 लाख की चपत — ग्रेटर नोएडा के रूपम गुप्ता का मामला बताता है कि फ़र्जी आईपीओ और सोशल मीडिया के ज़रिए निवेश ठगी का जाल कितना सुनियोजित हो चुका है।

मुख्य बातें

ग्रेटर नोएडा के 56 वर्षीय रूपम गुप्ता से शेयर ट्रेडिंग और फ़र्जी आईपीओ के नाम पर ₹47 लाख 90 हज़ार की ठगी की गई।
ठगों ने इंस्टाग्राम से संपर्क कर व्हाट्सएप ग्रुप ( 244 सदस्य ) के ज़रिए जाल बिछाया; ग्रुप एडमिन ने खुद को राजेश आहिर बताया।
रकम 29 अप्रैल से 18 मई 2026 के बीच कोटक महिंद्रा, इंडसइंड, करूर वैश्य, कैथोलिक सीरियन और स्टेट बैंक ऑफ मॉरीशस के खातों में ट्रांसफर हुई।
पीड़ित ने 19 मई को राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर और 25 मई को साइबर क्राइम थाना सेक्टर-36 में एफआईआर दर्ज कराई।
पुलिस संबंधित बैंक खातों, व्हाट्सएप नंबरों और डिजिटल लेनदेन की जाँच कर रही है।

ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर थाना क्षेत्र की एटीएस डोल्से सोसायटी में रहने वाले 56 वर्षीय रूपम गुप्ता साइबर ठगों के जाल में फँस गए। शेयर ट्रेडिंग और आईपीओ में भारी मुनाफे का लालच देकर ठगों ने उनसे ₹47 लाख 90 हज़ार की धोखाधड़ी की। पीड़ित ने 25 मई को साइबर क्राइम थाना सेक्टर-36 में एफआईआर दर्ज कराई है और पुलिस जाँच में जुट गई है।

कैसे बिछाया गया ठगी का जाल

रूपम गुप्ता के अनुसार, अप्रैल 2026 में इंस्टाग्राम के ज़रिए अज्ञात लोगों ने उनसे संपर्क किया। लगातार चैट कर शेयर मार्केट और क्यूआईबी (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर) ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का भरोसा दिलाया गया। 29 अप्रैल 2026 को उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया, जहाँ कथित रूप से ट्रेडिंग और निवेश की 'ट्रेनिंग' दी जाने लगी।

शिकायत के अनुसार, इस व्हाट्सएप ग्रुप में करीब 244 सदस्य थे। ग्रुप का एडमिन खुद को राजेश आहिर बताता था और उसने विदेशी नंबर के ज़रिए पीड़ित से संपर्क किया। बाद में 'इन्वेस्टमेंट क्लब ट्रेनिंग इंटर्नशिप ग्रुप' नाम से एक दूसरा ग्रुप बनाया गया, जिसमें आईपीओ और शेयर ट्रेडिंग में निवेश कराया जाता था। ठगों ने शुरुआत में कुछ निवेशों पर फ़र्जी मुनाफा दिखाकर पीड़ित का विश्वास जीता।

फ़र्जी आईपीओ और रकम ट्रांसफर

रूपम गुप्ता ने पहले 'बागमाने रेट' नामक आईपीओ में ₹2 लाख 20 हज़ार निवेश किए, जिस पर उन्हें कथित तौर पर लाभ भी दिखाया गया। इसके बाद 'गोल्डलाइन फार्मास्युटिकल्स' नाम के दूसरे आईपीओ में भारी निवेश के लिए दबाव बनाया गया। धीरे-धीरे अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई।

पीड़ित ने बताया कि उन्होंने 29 अप्रैल से 18 मई के बीच अपने आईसीआईसीआई बैंक खाते से ₹47 लाख 90 हज़ार विभिन्न खातों में भेजे। इनमें कोटक महिंद्रा बैंक, इंडसइंड बैंक, करूर वैश्य बैंक, कैथोलिक सीरियन बैंक और स्टेट बैंक ऑफ मॉरीशस के खाते शामिल थे।

ठगी का एहसास और शिकायत

जब रूपम गुप्ता ने अपने निवेश और मुनाफे की रकम निकालने की कोशिश की, तो ठगों ने टैक्स, पेंडिंग पेमेंट और अतिरिक्त शेयर अलॉटमेंट के नाम पर और पैसे जमा कराने की माँग शुरू कर दी। पीड़ित को तब ठगी का एहसास हुआ जब कंपनी द्वारा बार-बार नए शेयर जारी करने की बात कही जा रही थी — जो सामान्य आईपीओ प्रक्रिया में संभव नहीं होता।

पीड़ित ने 19 मई को राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई और 25 मई को साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज की गई। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया के ज़रिए निवेश धोखाधड़ी के मामले देशभर में तेज़ी से बढ़ रहे हैं।

पुलिस जाँच और साइबर विशेषज्ञों की चेतावनी

पुलिस ने संबंधित बैंक खातों, व्हाट्सएप नंबरों और डिजिटल लेनदेन की पड़ताल शुरू कर दी है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप के ज़रिए निवेश संबंधी ठगी की घटनाएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। आम नागरिकों को सलाह दी जाती है कि बिना सत्यापन के किसी भी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, आईपीओ स्कीम या विदेशी नंबर से आने वाले निवेश प्रस्तावों पर विश्वास न करें। जाँच जारी है और आगे गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें विदेशी बैंक खाते, फ़र्जी कॉर्पोरेट नाम और बहुस्तरीय व्हाट्सएप ग्रुप शामिल हैं। चिंताजनक यह है कि पीड़ित ने शुरुआती 'मुनाफा' देखकर और अधिक निवेश किया — यह 'पिग बचरिंग' स्कैम की क्लासिक रणनीति है जो भारत में तेज़ी से फैल रही है। साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत और एफआईआर के बीच छह दिन का अंतर यह भी दर्शाता है कि डिजिटल शिकायत तंत्र और वास्तविक कार्रवाई के बीच की खाई अभी भी पाटी नहीं गई है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रेटर नोएडा साइबर ठगी मामले में क्या हुआ?
ग्रेटर नोएडा के रूपम गुप्ता से शेयर ट्रेडिंग और फ़र्जी आईपीओ में निवेश का लालच देकर ₹47 लाख 90 हज़ार की ठगी की गई। ठगों ने इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप के ज़रिए जाल बिछाया और 29 अप्रैल से 18 मई 2026 के बीच रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराई।
ठगों ने किस तरह भरोसा जीता?
ठगों ने पहले 'बागमाने रेट' आईपीओ में ₹2 लाख 20 हज़ार के निवेश पर फ़र्जी मुनाफा दिखाकर पीड़ित का विश्वास जीता। इसके बाद 'गोल्डलाइन फार्मास्युटिकल्स' नामक दूसरे आईपीओ में भारी निवेश के लिए दबाव बनाया गया।
पीड़ित को ठगी का एहसास कब हुआ?
जब रूपम गुप्ता ने अपनी रकम निकालने की कोशिश की, तो ठगों ने टैक्स और पेंडिंग पेमेंट के नाम पर और पैसे माँगे। पीड़ित को तब संदेह हुआ जब कंपनी बार-बार नए शेयर जारी करने की बात कर रही थी, जो सामान्य आईपीओ प्रक्रिया में संभव नहीं होता।
इस तरह की साइबर ठगी से कैसे बचें?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, बिना सत्यापन के किसी भी सोशल मीडिया पर मिले ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, अनजान व्हाट्सएप ग्रुप या विदेशी नंबर से आए निवेश प्रस्तावों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। किसी भी आईपीओ या ट्रेडिंग स्कीम में निवेश से पहले सेबी (SEBI) की आधिकारिक वेबसाइट पर उसकी वैधता जाँचें।
पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
25 मई 2026 को साइबर क्राइम थाना सेक्टर-36 में एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने संबंधित बैंक खातों, व्हाट्सएप नंबरों और डिजिटल लेनदेन की जाँच शुरू कर दी है। मामले की जाँच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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