नेपाल बाढ़ त्रासदी: शशि थरूर बोले — भारत को पड़ोसी की भूमिका निभाते हुए हर ज़रूरी मदद देनी चाहिए
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 27 अगस्त 2026 को कहा कि नेपाल में आई विनाशकारी अचानक बाढ़ के मद्देनज़र भारत को तत्काल और व्यापक सहायता प्रदान करनी चाहिए — और यह सहायता नेपाल की अपनी ज़रूरतों के आधार पर तय होनी चाहिए, न कि भारत की इच्छा के अनुसार। रासुवा क्षेत्र में आई इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 177 लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, जबकि हज़ारों लोग अभी भी लापता हैं।
मुख्य घटनाक्रम
थरूर ने कहा, 'मुझे लगता है कि यह बहुत ज़रूरी है कि भारत इस त्रासदी पर तुरंत प्रतिक्रिया दे। हमारे प्रधानमंत्री ने अपने समकक्ष से बात की, हमने तुरंत राहत सामग्री उपलब्ध कराई और हमें उम्मीद है कि और मदद भी आएगी।' उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इन परिस्थितियों में यह मायने नहीं रखता कि भारत क्या भेजना चाहता है, बल्कि यह मायने रखता है कि नेपाल को क्या चाहिए।
तबाही का पैमाना
थरूर ने बाढ़ से हुई तबाही का विस्तृत ब्यौरा देते हुए कहा कि 18 पुल बह गए हैं, 8 जलविद्युत स्टेशन क्षतिग्रस्त हुए हैं और कई राजमार्ग प्रभावित हुए हैं। उन्होंने आगाह किया कि मरने वालों की संख्या चार अंकों तक पहुँच सकती है क्योंकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने काठमांडू में एक सम्मेलन के दौरान बताया कि कम से कम 300 भारतीय नागरिक — जिनमें अधिकांश कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री थे — लापता बताए जा रहे हैं।
भारतीय नागरिकों की स्थिति
थरूर ने राहत व्यक्त की कि 20 भारतीय पर्यटक मिल गए हैं। उन्होंने कहा कि बाकी लापता लोगों की तलाश जारी रहनी चाहिए और उन परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है। खनाल ने बताया कि 'कुछ ही घंटों में एक के बाद एक कई शहर तबाह हो गए' और हज़ारों परिवार अभी भी लापता हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-नेपाल संबंध कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं। गौरतलब है कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान त्वरित मानवीय सहायता दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक रूप से द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करती रही है। थरूर ने ज़ोर दिया कि तकनीकी सहायता हो, राहत सामग्री हो या अन्य कोई संसाधन — भारत को नेपाल की माँग के अनुसार हर स्तर पर सहयोग के लिए तैयार रहना चाहिए।
आगे क्या
अधिकारी आपदा के पूरे पैमाने का आकलन करने में जुटे हैं। लापता लोगों की तलाश अभियान जारी है और मृतकों की संख्या में और वृद्धि की आशंका बनी हुई है। भारत सरकार की ओर से राहत सामग्री पहले ही भेजी जा चुकी है और आगे की सहायता पर निर्णय नेपाल की ज़रूरतों के आधार पर लिया जाएगा।