शौकत अली का दावा: अनिल राजभर हैं मुस्लिम, शक हो तो करा लें डीएनए टेस्ट
सारांश
मुख्य बातें
बहराइच, 13 जून — ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने शनिवार को एक विवादास्पद बयान देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर को 'मुस्लिम' करार दिया और कहा कि यदि उन्हें इस पर संदेह हो तो वे डीएनए टेस्ट करा लें। यह प्रतिक्रिया उस माँग के जवाब में आई जिसमें अनिल राजभर ने बहराइच स्थित सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से सर्वे कराने की माँग की थी।
शौकत अली का विवादास्पद बयान
पत्रकारों से बातचीत में शौकत अली ने कहा, 'मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि अनिल राजभर मुस्लिम हैं। अगर उन्हें यकीन न हो तो वे अपना डीएनए टेस्ट करा लें, उन्हें खुद पता चल जाएगा।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि लोगों का अपना-अपना विश्वास होता है और किसी की आस्था में हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए।
अली ने कहा कि वे कई ऐसे ब्राह्मणों को जानते हैं जो नास्तिक हैं और कई ऐसे मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोगों को भी जानते हैं जो किसी ईश्वर पर विश्वास नहीं करते। उनके अनुसार, 'इन मामलों में हम क्या टिप्पणी कर सकते हैं — लोगों को अपने विश्वास का पालन करने देना चाहिए।'
दिनेश शर्मा पर भी निशाना
शौकत अली ने भाजपा सांसद दिनेश शर्मा की उस टिप्पणी पर भी प्रतिक्रिया दी जो उन्होंने AIMIM प्रमुख की दरगाह पर आगामी यात्रा को लेकर की थी। अली ने कहा कि दिनेश शर्मा को इतिहास का पर्याप्त ज्ञान नहीं है और उन्हें पहले यह बताना चाहिए कि सैयद सालार मसूद गाजी के पिता का नाम क्या था और वे बहराइच कब आए थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेता 'व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी' से प्राप्त जानकारी के आधार पर इतिहास की व्याख्या कर रहे हैं और उनके पास किसी भी विषय की ठोस जानकारी नहीं है।
ऐतिहासिक संदर्भ पर अली का तर्क
शौकत अली ने यह भी तर्क दिया कि जिस काल की बात की जा रही है उस समय पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे देश अखंड भारत का हिस्सा थे। उन्होंने कहा कि यदि यह भी मान लिया जाए कि सैयद सालार मसूद गाजी अफगानिस्तान में पैदा हुए थे, तो भी वह भारत का ही हिस्सा था — इसलिए उन्हें 'बाहरी' नहीं कहा जा सकता।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद उस समय उभरा जब मंत्री अनिल राजभर ने बहराइच की सैयद सालार मसूद गाजी दरगाह का ASI सर्वे कराने की माँग उठाई — जो हाल के वर्षों में देशभर में धार्मिक स्थलों के सर्वे को लेकर चल रही व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा है। गौरतलब है कि ऐसी माँगें अयोध्या, मथुरा और काशी जैसे स्थलों पर उठे विवादों की पृष्ठभूमि में और अधिक राजनीतिक संवेदनशीलता लिए हुए हैं। यह देखना होगा कि AIMIM के इस बयान पर भाजपा और अन्य दल किस प्रकार की प्रतिक्रिया देते हैं और क्या यह मामला विधानसभा या न्यायिक मंच तक पहुँचता है।