18 सितंबर 2026
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भाजपा छोड़ने पर शहजाद पूनावाला का खुलासा: 2024 चुनावों के बाद राजनीति छोड़ने की थी योजना

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भाजपा छोड़ने पर शहजाद पूनावाला का खुलासा: 2024 चुनावों के बाद राजनीति छोड़ने की थी योजना

सारांश

शहजाद पूनावाला का भाजपा छोड़ना अचानक नहीं था — यह एक योजनाबद्ध विदाई थी जो 2024 में होनी थी, पर 240 सीटों के झटके ने रोक दी। बंगाल चुनावों के बाद उन्होंने वही किया जो 2021 से तय था — राजनीति से प्राइवेट सेक्टर की वापसी।

मुख्य बातें

शहजाद पूनावाला ने 18 सितंबर 2026 को भाजपा से इस्तीफे की वजह सार्वजनिक की।
2021 में भाजपा प्रवक्ता बनने से पहले वे मीडिया में थे; 2024 के बाद प्राइवेट सेक्टर में लौटने की योजना पहले से थी।
2024 लोकसभा चुनावों में भाजपा को 240 सीटें मिलने के बाद उन्होंने इस्तीफा टाल दिया।
बंगाल चुनावों के बाद अंततः पार्टी छोड़ने का फैसला किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य कभी सांसद या विधायक बनना नहीं था।
पूर्व JNU छात्र उमर खालिद पर डॉक्यूमेंट्री और स्वरा भास्कर के बयानों की भी आलोचना की।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने 18 सितंबर 2026 को पार्टी से इस्तीफे के पीछे की वजह सार्वजनिक की। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद प्राइवेट सेक्टर में लौटने का फैसला पहले से तय था, लेकिन तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों ने उन्हें पार्टी के साथ कुछ और समय बिताने पर मजबूर किया।

राजनीति में आने और जाने की कहानी

पूनावाला ने बताया कि 2021 में जब वे भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने, उससे पहले वे मीडिया से जुड़े थे और उन्हें नियमित वेतन मिलता था। उन्होंने कहा, 'जब मैं 2021 में राजनीति में आया और 24/7 इसमें लग गया, तो मैंने हिसाब लगाया कि मेरे पास कितनी बचत है और मैं कितने सालों तक इस तरह काम कर पाऊंगा।' उनके अनुसार, जब उन्हें एहसास हुआ कि किसी राजनीतिक पार्टी में सक्रिय रहना केवल 2024 के आखिर तक ही व्यावहारिक होगा, तब उन्होंने मन बना लिया था।

उन्होंने स्पष्ट किया, 'अगर आप मेरे पुराने वीडियो और बयान देखें, तो मेरा इरादा हमेशा से यही था कि 2024 के चुनावों के बाद राजनीति छोड़ दूंगा और प्राइवेट सेक्टर में वापस चला जाऊंगा।'

240 सीटों के बाद बदला निर्णय

पूनावाला ने बताया कि 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को मिली 240 सीटें और उसके बाद के राजनीतिक घटनाक्रम ने उन्हें रुकने पर मजबूर किया। उन्होंने कहा, '240 सीटें मिलने के बाद उस अहम मोड़ पर पार्टी छोड़ना सही नहीं लगा। राज्यों के महत्वपूर्ण चुनाव भी सामने थे।' उनके अनुसार, आखिरकार बंगाल चुनावों के बाद उन्होंने तय किया कि अब प्राइवेट सेक्टर में जाने का समय आ गया है।

पद नहीं, मिशन के लिए काम

पूनावाला ने जोर देकर कहा कि राजनीति में उनका लक्ष्य कभी भी कोई निर्वाचित पद हासिल करना नहीं रहा। उनके शब्दों में, 'मेरा लक्ष्य कभी भी सांसद या विधायक बनना नहीं रहा है। मैं पदों के लिए काम नहीं करता, मैं एक मिशन और विजन के लिए काम करता हूं। मैं टाइटल या पदों के पीछे नहीं भागता; मैं अपना कद और पहचान बनाने में विश्वास रखता हूं।'

उमर खालिद डॉक्यूमेंट्री और स्वरा भास्कर पर तीखा हमला

पूनावाला ने पूर्व जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) छात्र उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिक्रिया देते हुए उन लोगों की आलोचना की जो खालिद को नायक की तरह प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा, 'उन्हें डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम या उस्ताद बिस्मिल्लाह खान में कभी कोई हीरो नहीं दिखता, लेकिन उमर खालिद में दिखता है।'

अभिनेत्री स्वरा भास्कर द्वारा राम जन्मभूमि फैसले पर जताई गई असहमति पर भी पूनावाला ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'राम मंदिर पर फैसला सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया था — और ये लोग संविधान बचाने की बात करते हैं।' गौरतलब है कि भास्कर ने हाल ही में बताया था कि वे फैसले के बाद सुपरस्टार शाहरुख खान, सलमान खान और आमिर खान समेत अपनी जान-पहचान के मुसलमानों से मिलकर असहमति जताई थी।

राहुल गांधी और 2029 के चुनाव पर बयान

पूनावाला ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे भारत में नहीं, बल्कि किसी और देश के प्रधानमंत्री बन सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि 2029 में नरेंद्र मोदी और भी बड़े अंतर से दोबारा प्रधानमंत्री चुने जाएंगे, और 2027 में योगी आदित्यनाथ भी बड़े बहुमत से सत्ता में वापस लौटेंगे। ये पूनावाला के निजी राजनीतिक अनुमान हैं, जिनका सत्यापन संभव नहीं है। पार्टी से जाने के बावजूद, वे भाजपा के मिशन और विजन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बरकरार बताते हैं, और प्राइवेट सेक्टर से भी वैचारिक योगदान जारी रखने का संकेत देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

या केवल वैचारिक प्रतिबद्धता पर निर्भर रहती हैं। दूसरी ओर, राहुल गांधी और स्वरा भास्कर पर उनके तीखे हमले यह भी संकेत देते हैं कि पार्टी छोड़ने के बाद भी वे वैचारिक रूप से भाजपा के साथ खड़े हैं — जो 'स्वतंत्र निकास' की थीसिस को कुछ हद तक कमज़ोर करता है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूकती है वह यह है कि यह एकमात्र मामला नहीं है — कई प्रवक्ता और दूसरी पंक्ति के नेता इसी आर्थिक दबाव में पार्टी संरचनाओं से बाहर निकल जाते हैं, लेकिन यह बात खुलकर कभी नहीं कही जाती।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शहजाद पूनावाला ने भाजपा क्यों छोड़ी?
पूनावाला के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद प्राइवेट सेक्टर में लौटने की योजना पहले से थी। भाजपा को 240 सीटें मिलने के बाद उन्होंने इस्तीफा टाल दिया, और बंगाल चुनावों के बाद अंततः पार्टी छोड़ने का फैसला किया।
शहजाद पूनावाला ने राजनीति से पहले क्या किया था?
पूनावाला 2021 में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता बनने से पहले मीडिया से जुड़े थे और नियमित वेतन पाते थे। उन्होंने खुद बताया कि पूर्णकालिक राजनीति आर्थिक रूप से दीर्घकाल तक टिकाऊ नहीं थी।
पूनावाला ने उमर खालिद डॉक्यूमेंट्री पर क्या कहा?
पूनावाला ने उन लोगों की आलोचना की जो उमर खालिद को नायक की तरह पेश करते हैं लेकिन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसी हस्तियों में हीरो नहीं देखते। उन्होंने इसे दोहरे मानदंड करार दिया।
स्वरा भास्कर के राम जन्मभूमि बयान पर पूनावाला की प्रतिक्रिया क्या थी?
पूनावाला ने स्वरा भास्कर की आलोचना करते हुए कहा कि राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सम्मान योग्य है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग संविधान बचाने की बात करते हैं, वही शीर्ष अदालत के फैसले पर सवाल उठाते हैं।
क्या पूनावाला भविष्य में चुनाव लड़ने की योजना रखते हैं?
पूनावाला ने स्पष्ट किया है कि उनका लक्ष्य कभी सांसद या विधायक बनना नहीं रहा। वे पद के बजाय मिशन और विजन के लिए काम करने में विश्वास रखते हैं, और प्राइवेट सेक्टर में रहते हुए भाजपा के विचारों के साथ खड़े रहने का संकेत दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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