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शिमला नगर निगम नतीजे पूरे हिमाचल का जनादेश नहीं — नरेश चौहान, पंचायत चुनाव के बाद साफ होगी तस्वीर

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शिमला नगर निगम नतीजे पूरे हिमाचल का जनादेश नहीं — नरेश चौहान, पंचायत चुनाव के बाद साफ होगी तस्वीर

सारांश

शिमला नगर निगम नतीजों को पूरे हिमाचल का जनादेश बताने की BJP की कोशिश पर कांग्रेस का पलटवार — मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा, केवल 15 हज़ार शहरी मतदाताओं और 922 वोट के अंतर से पूरे प्रदेश का मूड नहीं तय होता। असली फैसला पंचायत चुनावों के बाद।

मुख्य बातें

नरेश चौहान ने कहा कि चार नगर निगमों के नतीजे पूरे हिमाचल प्रदेश का जनादेश नहीं माने जा सकते।
नगर निगम चुनावों में केवल लगभग 15 हज़ार शहरी मतदाताओं ने भाग लिया, जबकि एक विधानसभा क्षेत्र में 80-90 हज़ार मतदाता होते हैं।
धर्मशाला और सोलन में मुकाबला करीबी रहा; सोलन में केवल 922 वोटों का अंतर रहा।
पालमपुर में कांग्रेस को स्पष्ट जनसमर्थन मिला, मंडी में BJP को सफलता मिली।
हाल ही में 51 नगर निकायों के चुनावों में कांग्रेस को बहुमत मिला था।
चौहान ने भाजपा से केंद्र द्वारा घोषित ₹1,500 करोड़ की आपदा राशि पर जवाब माँगा।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने 31 मई 2026 को स्पष्ट किया कि शिमला सहित चार नगर निगमों के चुनाव परिणामों को पूरे हिमाचल प्रदेश की जनता का जनादेश बताना तथ्यात्मक रूप से गलत है। उन्होंने कहा कि राज्य की वास्तविक राजनीतिक तस्वीर आगामी पंचायत और जिला परिषद चुनावों के परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उन दावों को खारिज करते हुए, जिनमें नगर निगम नतीजों को प्रदेश का मूड बताया जा रहा है, चौहान ने तर्क दिया कि सीमित शहरी मतदाताओं के आधार पर व्यापक निष्कर्ष निकालना तर्कसंगत नहीं है।

मतदाता संख्या का तर्क

नरेश चौहान ने आँकड़ों के साथ अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि एक विधानसभा क्षेत्र में जहाँ 80 से 90 हज़ार मतदाता होते हैं, वहीं इन नगर निगम चुनावों में केवल लगभग 15 हज़ार शहरी मतदाताओं ने भाग लिया। यह चुनाव केवल चार विधानसभा क्षेत्रों तक सीमित था, इसलिए इसे पूरे राज्य का रुझान बताना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि धर्मशाला और सोलन में मुकाबला बेहद करीबी रहा और केवल 922 वोटों के अंतर को पूरे प्रदेश का जनादेश नहीं कहा जा सकता।

सोलन में कमियों की स्वीकृति

चौहान ने स्वीकार किया कि सोलन में कांग्रेस का प्रदर्शन अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहा और पार्टी स्तर पर इसकी समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय नेताओं, उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं से चर्चा कर यह समझा जाएगा कि कहाँ चूक हुई। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि सोलन में कांग्रेस को थोड़ा और समर्थन मिल जाता, तो एक निर्दलीय उम्मीदवार की उपस्थिति को देखते हुए मुकाबला 8-8 सीटों पर बराबरी का हो सकता था।

कांग्रेस सरकार की उपलब्धियों का हवाला

चौहान ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में कांग्रेस सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, दूध के दाम बढ़ाने, नशे के विरुद्ध अभियान और कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) देने जैसे फैसले लिए हैं। उन्होंने भाजपा को चुनौती दी कि वह बताए इनमें से कौन-सा फैसला गलत है। उनका कहना था कि इन निर्णयों का लाभ अब धीरे-धीरे आम लोगों तक पहुँचना शुरू हुआ है।

भाजपा पर केंद्रीय मदद के मुद्दे पर सवाल

चौहान ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह प्रदेश के असली मुद्दों पर चुप है। उन्होंने कहा कि आपदा के समय केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता और प्रधानमंत्री द्वारा घोषित ₹1,500 करोड़ की राशि जैसे विषयों पर भाजपा को जवाब देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल और हिमाचल प्रदेश की परिस्थितियों की तुलना करना उचित नहीं है, क्योंकि हिमाचल के मतदाता जागरूक हैं और जानते हैं कि प्रदेश के हित में कौन काम कर रहा है।

आगे क्या होगा

चौहान ने याद दिलाया कि हाल ही में 51 नगर निकायों के चुनावों में कांग्रेस को बहुमत मिला था। अब जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनावों में भी कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों को बढ़त मिलने की जानकारी सामने आ रही है। उनका कहना है कि इन चुनावों के परिणाम आने के बाद भाजपा के दावे स्वतः गलत साबित हो जाएंगे और प्रदेश की वास्तविक राजनीतिक तस्वीर सामने आ जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इस पर केवल आँकड़ों की आड़ लेना पर्याप्त नहीं। सोलन में हार की 'समीक्षा' का वादा तब तक खोखला लगता है जब तक पार्टी संगठनात्मक कमज़ोरी की जड़ों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार न करे। असली परीक्षा पंचायत चुनाव होंगे — यदि वहाँ भी शहरी रुझान दोहराया गया, तो 'सीमित नमूना' का तर्क टिकना मुश्किल होगा।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नरेश चौहान ने शिमला नगर निगम नतीजों पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि चार नगर निगमों के चुनाव परिणामों को पूरे हिमाचल प्रदेश का जनादेश बताना गलत है। उन्होंने तर्क दिया कि इन चुनावों में केवल लगभग 15 हज़ार शहरी मतदाताओं ने भाग लिया, जो प्रदेश की वास्तविक राजनीतिक स्थिति को नहीं दर्शाते।
हिमाचल में पंचायत चुनाव कब होंगे और वे क्यों अहम हैं?
पंचायत और जिला परिषद चुनावों की तिथियाँ अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुई हैं, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि इन्हीं नतीजों से प्रदेश की वास्तविक राजनीतिक तस्वीर सामने आएगी। ग्रामीण और पंचायत स्तर पर अधिक मतदाता भाग लेते हैं, इसलिए ये चुनाव शहरी नगर निगम चुनावों से अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण माने जाते हैं।
सोलन नगर निगम चुनाव में क्या हुआ?
सोलन में मुकाबला बेहद करीबी रहा और BJP ने जीत हासिल की। नरेश चौहान ने माना कि कांग्रेस का प्रदर्शन अपेक्षित नहीं रहा और पार्टी स्तर पर समीक्षा की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि एक निर्दलीय उम्मीदवार की उपस्थिति के कारण थोड़े अधिक समर्थन से मुकाबला 8-8 सीटों पर बराबर हो सकता था।
BJP ने हिमाचल नगर निगम नतीजों को लेकर क्या दावा किया?
BJP ने नगर निगम चुनावों के नतीजों को प्रदेश की जनता का मूड बताया और पश्चिम बंगाल की तर्ज पर हिमाचल में भी राजनीतिक बदलाव की बात कही। कांग्रेस ने इस तुलना को खारिज करते हुए कहा कि दोनों राज्यों की परिस्थितियाँ बिल्कुल अलग हैं।
हिमाचल कांग्रेस सरकार की क्या उपलब्धियाँ गिनाई गईं?
नरेश चौहान ने ढाई वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, दूध के दाम बढ़ाने, नशे के विरुद्ध अभियान और कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) देने का उल्लेख किया। उन्होंने भाजपा को चुनौती दी कि वह बताए इनमें से कौन-सा फैसला जनविरोधी है।
राष्ट्र प्रेस
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