बेंगलुरु विकास पर बड़ा कदम: शिवकुमार ने राजनाथ सिंह से मांगा ऊंचाई प्रतिबंध हटाने का समाधान
सारांश
Key Takeaways
- उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 24 अप्रैल को नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की।
- बेंगलुरु में HAL एयरपोर्ट और येलहंका एयरबेस के पास ऊंचाई प्रतिबंध शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को बाधित कर रहे हैं।
- NOC जारी करते समय लागू ऊंचाई नियंत्रण से मेट्रो विस्तार, हाई-राइज़ बिल्डिंग और फ्लाईओवर प्रोजेक्ट प्रभावित हो रहे हैं।
- शिवकुमार ने बेंगलुरु को वैश्विक टेक्नोलॉजी हब बताते हुए विमानन सुरक्षा और शहरी विकास के बीच संतुलित नीति की मांग की।
- शिवकुमार ने तमिलनाडु, केरल और असम के चुनाव प्रचार की रिपोर्ट कांग्रेस नेतृत्व के साथ भी साझा की।
- केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक निर्णय नहीं आया है, लेकिन शिवकुमार ने जल्द समाधान की उम्मीद जताई।
नई दिल्ली, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शुक्रवार, 24 अप्रैल को नई दिल्ली में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से अहम मुलाकात की। इस बैठक में बेंगलुरु स्थित रक्षा हवाईअड्डों — HAL एयरपोर्ट और येलहंका एयरबेस — के आसपास निर्माण कार्यों पर लागू ऊंचाई प्रतिबंधों को शहर के विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा बताते हुए केंद्र से व्यावहारिक समाधान की मांग की गई।
बैठक का मुख्य एजेंडा: क्या है ऊंचाई प्रतिबंध विवाद?
शिवकुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर बताया कि यह बैठक पूरी तरह रचनात्मक रही। उन्होंने कहा कि HAL एयरपोर्ट और येलहंका एयरबेस के आसपास नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी करते समय लगाए जाने वाले ऊंचाई नियंत्रण नियम शहर के बड़े हिस्सों में इमारतों की ऊंचाई सीमित कर देते हैं।
इन प्रतिबंधों के कारण बेंगलुरु के कोर एरिया में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, शहरी विस्तार और दीर्घकालिक मोबिलिटी योजनाएं — जैसे मेट्रो विस्तार, फ्लाईओवर और हाई-राइज़ कॉम्प्लेक्स — बाधित हो रही हैं।
बेंगलुरु के वैश्विक महत्व का हवाला
उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने जोर देकर कहा कि बेंगलुरु आज भारत का प्रमुख वैश्विक टेक्नोलॉजी हब है, जहां देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनियां, स्टार्टअप इकोसिस्टम और अंतरराष्ट्रीय निवेश केंद्रित हैं। ऐसे में पुराने नियमों की कठोर व्याख्या के चलते शहरी विकास को अनावश्यक रूप से सीमित करना न तो व्यावहारिक है और न ही राष्ट्रीय हित में।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे विमानन सुरक्षा से कोई समझौता नहीं चाहते, लेकिन सुरक्षा मानकों और शहरी विकास आवश्यकताओं के बीच एक संतुलित नीति बनाने की जरूरत है।
ऐतिहासिक संदर्भ: क्यों यह मुद्दा पुराना और जटिल है
गौरतलब है कि बेंगलुरु में HAL एयरपोर्ट दशकों पुराना है और शहर के मूल में स्थित है। जब केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे का निर्माण हुआ, तब यह उम्मीद थी कि HAL के आसपास के प्रतिबंध शिथिल होंगे — लेकिन रक्षा मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आने के कारण यह प्रक्रिया जटिल बनी रही। येलहंका एयरबेस — जहां एयरो इंडिया जैसे बड़े रक्षा शो आयोजित होते हैं — के आसपास भी यही समस्या है।
यह ऐसे समय में और अधिक प्रासंगिक हो गया है जब बेंगलुरु की जनसंख्या 1.4 करोड़ से अधिक हो चुकी है और शहर की मेट्रो फेज-3 तथा अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाएं इन्हीं प्रतिबंधित क्षेत्रों से गुजरती हैं।
दिल्ली दौरे का राजनीतिक पहलू
इससे पहले शिवकुमार ने अपने दिल्ली प्रवास के दौरान कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं से भी मुलाकात की। हालांकि उन्होंने इन बैठकों का विवरण साझा नहीं किया।
उन्होंने बताया कि वे तमिलनाडु, केरल और असम में चुनाव प्रचार के अनुभव और रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व के साथ साझा करने भी आए हैं। शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि उनका यह दौरा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि बेंगलुरु के विकास से जुड़े ठोस मुद्दों को केंद्र के समक्ष रखने का भी अवसर है।
आगे क्या होगा?
शिवकुमार ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर जल्द व्यावहारिक नीति तैयार करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि वे बेंगलुरु के हितों से जुड़े विषयों पर केंद्रीय मंत्रियों के साथ समन्वय जारी रखेंगे।
यदि रक्षा मंत्रालय इन प्रतिबंधों में संशोधन या छूट देने पर सहमत होता है, तो यह बेंगलुरु के लिए एक ऐतिहासिक नीतिगत बदलाव होगा — जिससे अरबों रुपये की रुकी हुई परियोजनाओं को गति मिल सकती है।