14 अगस्त 2026
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सीबीडीसी-आधारित डीबीटी लॉन्च: शिवराज सिंह चौहान ने चंडीगढ़ से की शुरुआत, पूरे देश में लागू होगा मॉडल

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सीबीडीसी-आधारित डीबीटी लॉन्च: शिवराज सिंह चौहान ने चंडीगढ़ से की शुरुआत, पूरे देश में लागू होगा मॉडल

सारांश

चंडीगढ़ का टैगोर थिएटर इस बार महज एक सरकारी कार्यक्रम का मंच नहीं था — यह भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को डिजिटल युग में ले जाने की पहली औपचारिक कोशिश थी। सीबीडीसी-आधारित डीबीटी के ज़रिए राशन वितरण में मध्यस्थता खत्म करने और धन के दुरुपयोग को तकनीक से रोकने का यह मॉडल, सफल रहा तो देशव्यापी बदलाव की नींव बन सकता है।

मुख्य बातें

शिवराज सिंह चौहान ने 14 अगस्त 2026 को चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में सीबीडीसी-आधारित डीबीटी व्यवस्था का शुभारंभ किया।
नई प्रणाली में तकनीकी पाबंदियाँ सुनिश्चित करती हैं कि लाभार्थी राशि केवल खाद्यान्न एवं आवश्यक खाद्य वस्तुओं पर ही खर्च हो सके।
लाभार्थियों को गेहूँ-चावल के अलावा दाल व अन्य खाद्य पदार्थ चुनने की सुविधा मिलेगी।
चंडीगढ़ पायलट की सफलता पर यह मॉडल पूरे देश में लागू किया जाएगा।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 80 करोड़ से अधिक लोगों को निःशुल्क राशन मिल रहा है।
' लखपति दीदी ' कार्यक्रम के तहत 2029 तक 6 करोड़ ग्रामीण महिलाओं को लखपति बनाने का लक्ष्य।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 14 अगस्त 2026 को चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) आधारित डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (डीबीटी) व्यवस्था का औपचारिक शुभारंभ किया। पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में चौहान ने कहा कि यह पहल सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में पारदर्शिता, सुरक्षा और समयबद्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

क्या है सीबीडीसी-आधारित डीबीटी व्यवस्था

नई व्यवस्था के तहत राशन और खाद्यान्न का भुगतान सीधे लाभार्थियों के डिजिटल वॉलेट में पहुँचेगा। चौहान ने बताया कि इस प्रणाली में तकनीकी पाबंदियाँ इस प्रकार डिज़ाइन की गई हैं कि लाभार्थी इस राशि का उपयोग केवल खाद्यान्न एवं अन्य आवश्यक खाद्य वस्तुओं की खरीद के लिए ही कर सके — जिससे धनराशि के दुरुपयोग की संभावना न्यूनतम हो जाती है।

इसके साथ ही लाभार्थियों को चॉइस की सुविधा भी दी जाएगी — वे पारंपरिक गेहूँ-चावल के अलावा दाल या अन्य ज़रूरी खाद्य पदार्थ भी चुन सकेंगे। चौहान ने इसे एक बड़ा नवाचार बताते हुए संबंधित विभागीय टीम और अधिकारियों की प्रशंसा की।

चंडीगढ़ से देशव्यापी विस्तार की योजना

चंडीगढ़ में शुरू किया गया यह पायलट प्रयोग सफल होने पर चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में लागू किया जाएगा। चौहान ने अधिकारियों से स्थानीय बाधाओं को दूर कर व्यवस्था का विस्तार सुनिश्चित करने को कहा, ताकि हर परिवार तक सुविधाएँ पहुँच सकें। उन्होंने चंडीगढ़ की अनुशासन, स्वच्छता और नागरिक चेतना की सराहना करते हुए इसे पायलट के लिए उपयुक्त शहर बताया।

यह ऐसे समय में आया है जब सरकार डीबीटी के माध्यम से मध्यस्थों को हटाकर लाभ की सीधी डिलीवरी सुनिश्चित करने पर ज़ोर दे रही है। चौहान ने स्वीकार किया कि नकद हस्तांतरण में गलत उपयोग का जोखिम रहता है, इसलिए सीबीडीसी-आधारित व्यवस्था में तकनीक को इस तरह तैयार किया गया है कि भुगतान सीधे खाद्य सामग्री पर ही खर्च हो।

खाद्य सुरक्षा और किसान हित पर जोर

कार्यक्रम में चौहान ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की सराहना करते हुए कहा कि 80 करोड़ से अधिक लोगों को निःशुल्क राशन उपलब्ध कराना देश की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में से एक है। उन्होंने कहा कि इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और बचत को बच्चों की शिक्षा व अन्य ज़रूरतों पर लगाया जा सकेगा।

कृषि नीतियों पर बोलते हुए चौहान ने कहा कि किसानों के हित से कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने देश के गेहूँ-धान के मजबूत भंडारों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अब अपनी आवश्यकताएँ स्वयं पूरी करने में सक्षम है और ज़रूरत पड़ने पर निर्यात भी करता है। किसान सम्मान निधि की पारदर्शी डिलीवरी जारी रखने का संकल्प भी दोहराया गया।

संसद में व्यवधान पर तीखी प्रतिक्रिया

कार्यक्रम में चौहान ने संसद में हो रहे व्यवधानों पर विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में बहस आवश्यक है, लेकिन व्यवधान संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अपमान है। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि समझौतों सहित सभी नीतिगत निर्णय राष्ट्रहित, किसानहित और जनताहित को सर्वोपरि रखकर लिए गए हैं।

आगे की राह: 'लखपति दीदी' और बड़े लक्ष्य

चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस संकल्प को दोहराया कि 'सरकार फाइल में नहीं, जनता की लाइफ में दिखनी चाहिए।' उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में और भी बड़े लक्ष्य हासिल किए जाएंगे, जिनमें 'लखपति दीदी' कार्यक्रम प्रमुख है — इसके तहत 2029 तक 6 करोड़ ग्रामीण महिलाओं को लखपति बनाने का संकल्प है। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी और केंद्रीय राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभणिया विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। चौहान ने स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हुए नागरिकों से 'हर घर तिरंगा' की अपील की और पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने का आह्वान किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों स्वागत योग्य हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या डिजिटल साक्षरता और स्मार्टफोन पहुँच से वंचित ग्रामीण परिवार इस प्रणाली का उपयोग उतनी ही सहजता से कर पाएंगे जितनी सहजता से शहरी उपभोक्ता। चंडीगढ़ जैसे उच्च-साक्षरता और सुनियोजित शहर में पायलट की सफलता को ग्रामीण भारत की वास्तविकता से सीधे नहीं जोड़ा जा सकता। बिना व्यापक डिजिटल बुनियादी ढाँचे और ज़मीनी प्रशिक्षण के, यह नवाचार उन्हीं तक पहुँचेगा जिन्हें इसकी सबसे कम ज़रूरत है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीडीसी-आधारित डीबीटी क्या है और यह पुरानी व्यवस्था से कैसे अलग है?
सीबीडीसी-आधारित डीबीटी में भारतीय रिज़र्व बैंक की डिजिटल करेंसी के ज़रिए राशन सब्सिडी सीधे लाभार्थी के वॉलेट में भेजी जाती है, जिसे केवल खाद्यान्न खरीदने पर ही खर्च किया जा सकता है। पुरानी व्यवस्था में नकद या राशन कार्ड के माध्यम से वितरण होता था, जिसमें मध्यस्थों द्वारा हेराफेरी की संभावना अधिक थी।
यह पायलट चंडीगढ़ से पूरे देश में कब तक लागू होगा?
सरकार ने चंडीगढ़ पायलट की सफलता के बाद चरणबद्ध राष्ट्रव्यापी विस्तार की योजना बनाई है, लेकिन कोई निश्चित समयसीमा अभी तक घोषित नहीं की गई है। अधिकारियों को स्थानीय बाधाएँ दूर कर विस्तार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सीबीडीसी-डीबीटी से लाभार्थियों को क्या विकल्प मिलेंगे?
लाभार्थी पारंपरिक गेहूँ और चावल के अलावा दाल या अन्य आवश्यक खाद्य पदार्थ भी चुन सकेंगे। हालाँकि, यह राशि केवल खाद्य सामग्री पर ही खर्च की जा सकेगी — अन्य किसी उपयोग के लिए तकनीकी पाबंदी लगाई गई है।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना कितने लोगों को लाभ देती है?
इस योजना के तहत देश में 80 करोड़ से अधिक लोगों को निःशुल्क राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। शिवराज सिंह चौहान ने इसे देश की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा पहलों में से एक बताया।
'लखपति दीदी' योजना क्या है और इसका लक्ष्य क्या है?
'लखपति दीदी' कार्यक्रम के तहत सरकार का लक्ष्य 2029 तक 6 करोड़ ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर उनकी वार्षिक आय कम से कम एक लाख रुपये तक पहुँचाना है। चौहान ने इसे आने वाले बड़े लक्ष्यों में शामिल बताया।
राष्ट्र प्रेस
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