सिद्धिविनायक मंदिर परिसर में ₹500 करोड़ का पुनर्विकास: पहले चरण में 120 वाहनों की अंडरग्राउंड पार्किंग
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई के प्रतिष्ठित सिद्धिविनायक मंदिर परिसर के कायाकल्प को नई गति मिली है — ₹500 करोड़ की पुनर्विकास परियोजना के तहत पहले चरण में 120 वाहनों की क्षमता वाली अंडरग्राउंड पार्किंग का निर्माण किया जाएगा। मंदिर के चेयरमैन सदा सरवणकर ने बताया कि मुंबई महानगरपालिका (BMC) इस परियोजना को तीन चरणों में पूरा करेगी और पहले चरण के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी होकर टेंडर जारी किया जा चुका है।
परियोजना की पृष्ठभूमि और वित्तीय ढाँचा
सरवणकर के अनुसार, इस परियोजना की नींव तब रखी गई जब एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री और देवेंद्र फडणवीस उपमुख्यमंत्री के पद पर थे — उस दौरान मंदिर ट्रस्ट ने राज्य सरकार से विशेष वित्तीय सहायता की माँग की थी। बाद में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने BMC को ₹500 करोड़ उपलब्ध कराने का निर्णय लिया। परियोजना का उद्घाटन मुख्यमंत्री फडणवीस द्वारा किया गया।
गौरतलब है कि परियोजना के लिए ₹500 करोड़ का प्रावधान किया गया है, लेकिन सरवणकर ने स्पष्ट किया कि वर्तमान अनुमान के अनुसार प्रमुख विकास कार्यों को पूरा करने में लगभग ₹150 करोड़ का खर्च आ सकता है।
तीन चरणों में होगा विकास कार्य
पहले चरण में मंदिर परिसर के निकट 120 वाहनों की क्षमता वाली अंडरग्राउंड पार्किंग के साथ-साथ मुख्य प्रवेश द्वार का सौंदर्यीकरण और पुनर्निर्माण किया जाएगा। परिसर की फ्लोरिंग, ऊपरी संरचनाओं का विकास, दीवारों की मरम्मत और अन्य बुनियादी सुधार कार्य भी इसी चरण में शामिल हैं। पहले चरण पर लगभग ₹80 करोड़ खर्च होने का अनुमान है और इसे लगभग एक वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य है।
दूसरे और तीसरे चरण में मंदिर परिसर के आसपास की आधारभूत संरचना को और सुदृढ़ किया जाएगा तथा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएँ विकसित की जाएंगी।
महाकाल लोक कॉरिडोर की तर्ज पर डिज़ाइन
सरवणकर ने बताया कि इस परियोजना की योजना उसी कंपनी ने तैयार की है जिसने उज्जैन स्थित महाकाल लोक कॉरिडोर का डिज़ाइन तैयार किया था। इसी तर्ज पर सिद्धिविनायक मंदिर परिसर को आधुनिक और सुव्यवस्थित स्वरूप देने की योजना बनाई गई है — यह तुलना इस परियोजना की महत्वाकांक्षा को रेखांकित करती है।
यातायात और श्रद्धालुओं पर असर
सिद्धिविनायक मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, जिससे यातायात, पार्किंग और अन्य सुविधाओं को लेकर गंभीर चुनौतियाँ सामने आती रही हैं। अंडरग्राउंड पार्किंग और प्रवेश द्वार के पुनर्निर्माण से प्रभादेवी क्षेत्र में यातायात व्यवस्था सुगम होने की उम्मीद है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों दोनों को आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराना है।
आगे क्या
पहले चरण का कार्य शुरू हो चुका है और इसके लगभग एक वर्ष में पूरा होने की संभावना है। इसके बाद दूसरे और तीसरे चरण की शुरुआत होगी। यह परियोजना मुंबई के धार्मिक पर्यटन बुनियादी ढाँचे को नई दिशा दे सकती है — बशर्ते क्रियान्वयन समयसीमा के भीतर हो।