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सिद्धिविनायक मंदिर कॉरिडोर का भूमि पूजन, एकनाथ शिंदे बोले — 2 वर्षों में पूरी होगी परियोजना

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सिद्धिविनायक मंदिर कॉरिडोर का भूमि पूजन, एकनाथ शिंदे बोले — 2 वर्षों में पूरी होगी परियोजना

सारांश

मुंबई के 224 वर्ष पुराने सिद्धिविनायक मंदिर को अब आधुनिक कॉरिडोर मिलेगा। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में भूमि पूजन हुआ। दो वर्षों में पार्किंग, कतार प्रबंधन और मौसम-सुरक्षित मार्ग तैयार होंगे — लाखों दैनिक श्रद्धालुओं को सीधा फायदा।

मुख्य बातें

25 मई 2025 को मुंबई में सिद्धिविनायक मंदिर कॉरिडोर परियोजना के पहले चरण का भूमि पूजन संपन्न हुआ।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
परियोजना अगले 2 वर्षों में पूरी की जाएगी; इसमें आधुनिक पार्किंग , कतार प्रबंधन और सुरक्षित आवागमन शामिल।
सिद्धिविनायक मंदिर की स्थापना वर्ष 1801 में हुई थी; प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु दर्शन करते हैं।
ट्रस्ट कोषाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी ने कहा — कॉरिडोर से गर्मी, धूप और बारिश से भी राहत मिलेगी।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 25 मई 2025 को मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर कॉरिडोर परियोजना के पहले चरण के भूमि पूजन कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने कहा कि यह मंदिर केवल मुंबई नहीं, बल्कि पूरे देश की आस्था का केंद्र है और कॉरिडोर निर्माण के बाद श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। परियोजना अगले दो वर्षों में पूरी किए जाने का लक्ष्य है।

भूमि पूजन कार्यक्रम का आयोजन

यह कार्यक्रम महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में संपन्न हुआ। उपमुख्यमंत्री शिंदे ने सिद्धिविनायक ट्रस्ट के सभी सदस्यों को इस पहल के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि यहाँ प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं और उनकी सुविधाओं का विस्तार अत्यंत आवश्यक हो गया था।

मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

शिंदे ने बताया कि सिद्धिविनायक मंदिर की नींव करीब सवा दो सौ वर्ष पूर्व, वर्ष 1801 में रखी गई थी। इस प्राचीन मंदिर की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए कॉरिडोर परियोजना तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि मंदिरों का निर्माण और पुनर्निर्माण केवल विकास कार्य नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक जिम्मेदारी भी है।

परियोजना में क्या मिलेगा श्रद्धालुओं को

सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी ने बताया कि परियोजना के तहत आधुनिक पार्किंग सुविधा, बेहतर कतार प्रबंधन और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही, मंदिर परिसर में ऐसा कॉरिडोर विकसित किया जाएगा जहाँ श्रद्धालुओं को गर्मी, धूप या बारिश से राहत मिल सके। ट्रस्ट का लक्ष्य है कि भक्तों को आध्यात्मिक अनुभव के साथ-साथ आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध हों।

धार्मिक स्थलों के विकास की व्यापक पहल

शिंदे ने इस परियोजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में धार्मिक स्थलों के विकास की व्यापक पहल का हिस्सा बताया। उन्होंने अयोध्या में श्रीराम मंदिर और उज्जैन में महाकाल मंदिर कॉरिडोर का उदाहरण देते हुए कहा कि ये सभी कदम भारत की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने की दिशा में उठाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि इस तरह की कॉरिडोर परियोजनाएं देश के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की बड़ी जरूरत को रेखांकित करती हैं।

आगे की राह

परियोजना के दो वर्षों में पूरा होने की उम्मीद है। एक बार कॉरिडोर बनकर तैयार होने के बाद दर्शन के दौरान होने वाली भीड़ और असुविधा में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है। ट्रस्ट और राज्य सरकार मिलकर इस परियोजना की निगरानी करेंगे, ताकि निर्धारित समयसीमा में काम पूरा हो सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि ट्रस्ट-संचालित निधि और सरकारी भागीदारी के बीच जवाबदेही का ढाँचा अभी स्पष्ट नहीं है। बढ़ती श्रद्धालु संख्या के मद्देनज़र आधारभूत सुविधाओं का विस्तार निश्चित रूप से ज़रूरी है, लेकिन दो वर्षों की समयसीमा तभी विश्वसनीय होगी जब क्रियान्वयन की नियमित सार्वजनिक समीक्षा हो।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिद्धिविनायक मंदिर कॉरिडोर परियोजना क्या है?
यह मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और आधुनिकीकरण की परियोजना है, जिसका भूमि पूजन 25 मई 2025 को हुआ। इसके तहत आधुनिक पार्किंग, कतार प्रबंधन और मौसम से सुरक्षित कॉरिडोर मार्ग बनाया जाएगा।
सिद्धिविनायक कॉरिडोर परियोजना कब तक पूरी होगी?
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के अनुसार यह परियोजना अगले दो वर्षों में पूरी कर ली जाएगी। भूमि पूजन 25 मई 2025 को संपन्न हुआ है।
इस परियोजना से श्रद्धालुओं को क्या फायदा होगा?
सिद्धिविनायक ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी के अनुसार, कॉरिडोर बनने के बाद श्रद्धालुओं को आधुनिक पार्किंग, बेहतर कतार प्रबंधन, सुरक्षित आवागमन और गर्मी-बारिश से राहत मिलेगी। दर्शन का अनुभव अधिक सहज और सुगम बनेगा।
सिद्धिविनायक मंदिर की स्थापना कब हुई थी?
सिद्धिविनायक मंदिर की नींव वर्ष 1801 में रखी गई थी, यानी यह मंदिर करीब सवा दो सौ वर्ष पुराना है। यह मुंबई के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में से एक है।
इस परियोजना का उद्घाटन किसने किया?
परियोजना के पहले चरण का भूमि पूजन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में हुआ। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया और सिद्धिविनायक ट्रस्ट के सदस्यों को धन्यवाद दिया।
राष्ट्र प्रेस
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