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सिद्धिविनायक मंदिर परिसर में ₹500 करोड़ का पुनर्विकास: पहले चरण में 120 वाहनों की अंडरग्राउंड पार्किंग

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सिद्धिविनायक मंदिर परिसर में ₹500 करोड़ का पुनर्विकास: पहले चरण में 120 वाहनों की अंडरग्राउंड पार्किंग

सारांश

मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर का ₹500 करोड़ का कायाकल्प अब ज़मीन पर उतर रहा है — महाकाल लोक कॉरिडोर को डिज़ाइन करने वाली कंपनी की योजना, BMC का टेंडर जारी और पहले चरण में 120 वाहनों की अंडरग्राउंड पार्किंग। मुंबई के सबसे व्यस्त तीर्थस्थल पर यह बदलाव लाखों श्रद्धालुओं के अनुभव को नया रूप देगा।

मुख्य बातें

सिद्धिविनायक मंदिर परिसर के पुनर्विकास के लिए ₹500 करोड़ का प्रावधान; परियोजना तीन चरणों में पूरी होगी।
पहले चरण में 120 वाहनों की क्षमता वाली अंडरग्राउंड पार्किंग और मुख्य प्रवेश द्वार का सौंदर्यीकरण; अनुमानित लागत ₹80 करोड़ ।
BMC ने निविदा प्रक्रिया पूरी कर टेंडर जारी किया; पहला चरण लगभग एक वर्ष में पूरा होने की उम्मीद।
परियोजना का डिज़ाइन उसी कंपनी ने तैयार किया जिसने महाकाल लोक कॉरिडोर , उज्जैन का निर्माण किया था।
वर्तमान अनुमान के अनुसार प्रमुख विकास कार्यों पर कुल ₹150 करोड़ खर्च होने की संभावना।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने परियोजना का उद्घाटन किया; एकनाथ शिंदे के कार्यकाल में धनराशि की माँग की गई थी।

मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर परिसर के व्यापक पुनर्विकास को अब ठोस रफ्तार मिल गई है। ₹500 करोड़ की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत मंदिर परिसर में अंडरग्राउंड पार्किंग, नए प्रवेश द्वार और आधुनिक बुनियादी ढाँचे का निर्माण किया जाएगा। मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन सदा सरवणकर ने 9 जून 2026 को इस परियोजना की विस्तृत जानकारी साझा की।

परियोजना की पृष्ठभूमि

सरवणकर के अनुसार, मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, जिससे यातायात, पार्किंग और अन्य नागरिक सुविधाओं पर भारी दबाव पड़ता है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकार से विशेष वित्तीय सहायता की माँग की गई थी। उन्होंने बताया कि जब एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री और देवेंद्र फडणवीस उपमुख्यमंत्री थे, तब इस पुनर्विकास के लिए धनराशि का अनुरोध किया गया था।

बाद में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को इस परियोजना के लिए ₹500 करोड़ उपलब्ध कराने का निर्णय लिया।

महाकाल लोक की तर्ज पर डिज़ाइन

सरवणकर ने बताया कि इस परियोजना की रूपरेखा उसी कंपनी ने तैयार की है, जिसने उज्जैन स्थित महाकाल लोक कॉरिडोर का डिज़ाइन बनाया था। उसी आधुनिक और व्यवस्थित दृष्टिकोण को सिद्धिविनायक परिसर पर भी लागू किया जाएगा — जिसमें श्रद्धालुओं के अनुभव को केंद्र में रखा गया है।

तीन चरणों में होगा विकास

BMC ने इस परियोजना को तीन चरणों में पूरा करने का निर्णय लिया है। पहले चरण में मंदिर परिसर के निकट लगभग 120 वाहनों की क्षमता वाली अंडरग्राउंड पार्किंग का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ मुख्य प्रवेश द्वार का सौंदर्यीकरण, परिसर की फ्लोरिंग, ऊपरी संरचनाओं का विकास और दीवारों की मरम्मत जैसे कार्य भी शामिल हैं।

पहले चरण पर लगभग ₹80 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। BMC निविदा प्रक्रिया पूरी कर चुकी है और टेंडर जारी किया जा चुका है। परियोजना का उद्घाटन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा किया गया था। सरवणकर के अनुसार पहले चरण का कार्य लगभग एक वर्ष में पूरा होने की उम्मीद है।

दूसरे और तीसरे चरण में परिसर के आसपास की आधारभूत संरचना को और सुदृढ़ किया जाएगा तथा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएँ विकसित की जाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि हालाँकि परियोजना के लिए ₹500 करोड़ का प्रावधान किया गया है, किंतु वर्तमान अनुमान के अनुसार प्रमुख विकास कार्यों पर लगभग ₹150 करोड़ खर्च होने की संभावना है।

श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों पर असर

इस परियोजना का सीधा लाभ उन लाखों श्रद्धालुओं को मिलेगा जो प्रतिदिन सिद्धिविनायक के दर्शन के लिए आते हैं। अंडरग्राउंड पार्किंग से आसपास की सड़कों पर यातायात का दबाव कम होगा, जबकि आधुनिक प्रवेश व्यवस्था से भीड़ प्रबंधन में सुधार आएगा। स्थानीय नागरिकों को भी बेहतर सड़क और नागरिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

आगे की राह

पहले चरण के सफल क्रियान्वयन के बाद दूसरे और तीसरे चरण की विस्तृत योजना सामने आएगी। यह परियोजना मुंबई के धार्मिक पर्यटन बुनियादी ढाँचे को नई दिशा दे सकती है और अन्य प्रमुख मंदिरों के लिए एक मॉडल के रूप में उभर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मुंबई में बड़े नागरिक निर्माण कार्यों में देरी और लागत-वृद्धि का इतिहास रहा है — इसलिए एक वर्ष की समयसीमा को उम्मीद के साथ-साथ सतर्कता से भी देखा जाना चाहिए।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिद्धिविनायक मंदिर पुनर्विकास परियोजना क्या है?
यह मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर परिसर का ₹500 करोड़ का तीन-चरणीय पुनर्विकास कार्यक्रम है, जिसमें अंडरग्राउंड पार्किंग, नए प्रवेश द्वार और आधुनिक बुनियादी ढाँचे का निर्माण शामिल है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुविधा और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
पहले चरण में क्या काम होगा और कितना खर्च आएगा?
पहले चरण में लगभग 120 वाहनों की क्षमता वाली अंडरग्राउंड पार्किंग, मुख्य प्रवेश द्वार का सौंदर्यीकरण, फ्लोरिंग और दीवारों की मरम्मत शामिल है। इस चरण पर लगभग ₹80 करोड़ खर्च होने का अनुमान है और इसे एक वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य है।
इस परियोजना के लिए फंड कहाँ से आया?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने BMC को इस परियोजना के लिए ₹500 करोड़ उपलब्ध कराने का निर्णय लिया। मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन सदा सरवणकर ने राज्य सरकार से यह सहायता माँगी थी।
क्या इस परियोजना का डिज़ाइन महाकाल लोक कॉरिडोर जैसा होगा?
हाँ, परियोजना की रूपरेखा उसी कंपनी ने तैयार की है जिसने उज्जैन के महाकाल लोक कॉरिडोर का डिज़ाइन बनाया था। उसी आधुनिक और व्यवस्थित दृष्टिकोण को सिद्धिविनायक परिसर पर भी लागू किया जाएगा।
परियोजना की कुल लागत ₹500 करोड़ है या ₹150 करोड़?
सरकार ने परियोजना के लिए ₹500 करोड़ का प्रावधान किया है, लेकिन मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन सदा सरवणकर के अनुसार वर्तमान अनुमान में प्रमुख विकास कार्यों पर लगभग ₹150 करोड़ खर्च होने की संभावना है। शेष राशि का उपयोग बाद के चरणों में किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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