सिरसा ग्रेनेड हमला: एनआईए ने 4 और आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोप-पत्र दाखिल किया, पाक नेटवर्क के तार
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 18 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के पंचकूला स्थित विशेष एनआईए अदालत में सिरसा महिला पुलिस स्टेशन ग्रेनेड हमला मामले में 4 नए आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोप-पत्र दाखिल किया। एजेंसी के अनुसार, इस पूरक चार्जशीट में साजिश की पूरी रूपरेखा और प्रत्येक आरोपी की अलग-अलग भूमिका का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
एनआईए के अनुसार, यह मामला 25 नवंबर 2025 को सिरसा में महिला पुलिस स्टेशन के निकट हुए ग्रेनेड हमले से संबंधित है। प्रारंभ में यह प्राथमिकी 26 नवंबर 2025 को सिरसा के सिविल लाइन थाने में दर्ज की गई थी। बाद में 30 दिसंबर 2025 को एनआईए ने इस मामले को अपने यहाँ फिर से दर्ज किया।
इस वर्ष 24 मई को एनआईए ने पंचकूला की विशेष अदालत में 9 आरोपियों के खिलाफ पहला आरोप-पत्र दाखिल किया था, जिसमें पाकिस्तानी नागरिक शहजाद भट्टी और सोहेल अहमद उर्फ सोहेल बलोच भी शामिल थे। ताज़ा पूरक आरोप-पत्र उसी जांच का विस्तार है।
नए आरोपी और उनकी भूमिका
पूरक आरोप-पत्र में जिन चार आरोपियों के नाम हैं, वे हैं — राजबीर सिंह उर्फ फौजी, वेद प्रकाश उर्फ पम्मा, जीवनजोत सिंह ग्रेवाल उर्फ ज्योति और चिराग ठकराल।
एनआईए की जांच के अनुसार, राजबीर सिंह उर्फ फौजी इस पूरे नेटवर्क में कोऑर्डिनेटर की भूमिका निभा रहा था। वह विदेशों में बैठे हैंडलरों के साथ मिलकर भारत में हथियार, हैंड ग्रेनेड और नशीले पदार्थों की खरीद एवं आवाजाही का काम करता था।
चिराग ठकराल, जीवनजोत सिंह ग्रेवाल और वेद प्रकाश ने राजबीर सिंह के निर्देश पर काम करते हुए सिरसा के महिला पुलिस स्टेशन पर हमले में इस्तेमाल किए गए विस्फोटकों को पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई।
साजिश का दायरा और सीमा पार कनेक्शन
एनआईए के अनुसार, यह हमला शहजाद भट्टी नेटवर्क के सदस्यों द्वारा एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत अंजाम दिया गया था। इसका मकसद पुलिसकर्मियों को नुकसान पहुँचाना और आम जनता में दहशत फैलाना था।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस साजिश के तार विदेशों में बैठे उन हैंडलरों से जुड़े हैं जो सीमा पार से आतंकी नेटवर्क संचालित कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सुरक्षा एजेंसियाँ उत्तर भारत में सक्रिय सीमा पार नेटवर्कों पर नज़र रख रही हैं।
कानूनी धाराएँ
चारों आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता-2023 की धारा 61(2) (धारा 109 के साथ पठित) और धारा 238, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम-1908 की धारा 5 और 6, तथा गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम-1967 (UAPA) की धारा 18, 18बी और 20 के तहत आरोप लगाए गए हैं।
एनआईए ने पूरक आरोप-पत्र में आगे की जांच के दौरान जुटाए गए नए साक्ष्यों को भी शामिल किया है।
आगे की जांच
एनआईए ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में जांच अभी जारी है। एजेंसी का लक्ष्य साजिश में शामिल अन्य व्यक्तियों की पहचान करना और सीमा पार आतंकी नेटवर्क की पूरी कड़ी का पर्दाफाश करना है। गौरतलब है कि यह पूरक आरोप-पत्र दर्शाता है कि एजेंसी की जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है और मामले में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।